कार्यालयी पत्र

प्रश्न-1 किसी आपराधिक घटना की अपनी सनसनीखेज़ पड़ताल में कुछ समाचार चैनल जाँच में बाधा डालते हैं और न्यायालयों में मामला पहुँचने से पहले ही आरोपी को अपराधी ठहरा देते हैं। इस प्रवृत्ति पर अपने विचार किसी समाचार-पत्र के संपादक को लिखिए।

उत्तर-

4/41, आज़ादपुर, दिल्ली।
 17 अप्रैल, 2019
सेवा में,
संपादक,
हिंदुस्तान टाइम्स,
मथुरा रोड, दिल्ली।
विषय- आपराधिक घटनाओं को समाचार चैनल द्वारा सनसनीखेज़ बनाए जाने के संबंध में।
महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान आपराधिक घटनाओं को समाचार चैनलों द्वारा सनसनीखेज़ बनाए जाने तथा न्यायालय के निर्णय से पूर्व स्वयं निर्णय लेने की प्रवृत्ति की ओर आकर्षित कराना चाहती हूँ।
पत्रकारिता को भारतीय समाज में लोकतंत्र का चौथा आधार स्तंभ माना जाता है। लोकतंत्र को सुचारु रूप से चलाने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान समय में कई बार देखा गया है कि विभिन्न समाचार चैनलों ने अपनी सनसनीखेज़ पड़ताल के द्वारा न्यायालयों के निर्णय से पूर्व ही आरोपी को अपराधी ठहरा कर जाँच की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की है। ‘आरूषि हत्याकांड’ इसका उपयुक्त उदाहरण है। समाचार चैनलों की यह प्रवृत्ति जन सामान्य की भावनाओं को आंदोलित करने के साथ ही न्यायिक प्रणाली को भी प्रभावित करती है। किसी भी समाचार चैनल को कार्य केवल उस घटना से संबंधित तथ्यों से जनता को अवगत कराना होता है। किसी भी आरोपी को अपराधी घोषित करना या न करना केवल न्यायालय का कार्य होता है।
अतः मेरा आपके माध्यम से ऐसे समाचार चैनलों से अनुरोध है कि उन्हें अपनी ऐसी प्रवृत्ति को त्याग देना चाहिए। मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि आप अपने समाचारपत्र के माध्यम से इन चैनलों के इस रवैये के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाए।
धन्यवाद।
भवदीया
ज्योति मेहरा

प्रश्न-2 दिल्ली में हुए बम धमाकों के एक चश्मदीद नाबालिग गवाह का फोटो और उसका इंटरव्यू कुछ समाचार चैनलों द्वारा दिखाया जाना बच्चे की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इस संबंध में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।

उत्तर- परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 नवंबर 2019
संपादक महोदय
नवभारत टाइम्स
बहादुरशाह जफर मार्ग
विषय- नाबालिक बच्चे की सुरक्षा के संबंध में।
महोदय,
निवेदन यह है कि पिछले दिनों दिल्ली में कुछ बम धमाके हुए। इन बम धमाकों का चश्मदीद गवाह एक बालक पुलिस के सामने आया। जैसे ही मीडिया को इसका पता चला, उन्होंने उस बच्चे का इंटरव्यू लिया तथा उसे चैनलों, अखबारों व पत्रिकाओं में प्रकाशित किया। उसमें उस नाबालिक बच्चे का संपूर्ण विवरण भी दिया गया। मेरी आपत्ति मीडिया की भूमिका के बारे में है। सुरक्षा एजेंसियों का कार्य गवाहों को गुप्त रखना होता है, न कि अपनी पीठ थपथपाने के लिए उन्हें मीडिया के सामने प्रस्तुत करना। इसके अतिरिक्त मीडिया के भी नैतिक व राष्ट्रीय दायित्व होते हैं। उन्हें भी उस बच्चे की सुरक्षा करनी चाहिए थी। उन्हें उसके फोटो व विवरण न देकर घटना के बारे में जानकारी ही देनी चाहिए थी। उन्हें चैनल या समूह की ख्याति के लिए बच्चे को मोहरा नहीं बनाना चाहिए था। उन्हें अपनी इस प्रकृत्ति पर रोक लगानी चाहिए। ये सब होने के बाद उस बच्चे के ऊपर जानलेवा हमले भी हो सकते हैं और बच्चे की जान भी जा सकती है।
अतः मेरा आपसे अनुरोध है कि आप उस नाबालिग बच्चे की सुरक्षा पर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करें। इसके अलावा उसके सुरक्षा के यथोचित उपाय किया जाए।
धन्यवाद
भवदीय
गोविन्द शाह

प्रश्न-3 किसी पर्यटन स्थल के होटल के प्रबंधक को निर्धारित तिथियों पर होटल के दो कमरे आरक्षित करने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखिए। पत्र में उन्हें कारण भी बताइए कि आपने वही होटल क्यों चुना।

उत्तर-

सेवा में,
प्रबंधक महोदय,
स्पार्क हेवन होटल,
नैनीताल, उत्तराखंड।
17 अप्रैल, 2019
विषय -होटल में कमरे आरक्षित करवाने हेतु।
महोदय,
मैं जय प्रकाश, दिल्ली का निवासी हूँ। मैंने आपके होटल की आवभगत के विषय में बहुत प्रशंसा सुनी है। मैं और मेरा परिवार दिनांक 25 अप्रैल, 2019 से 27 अप्रैल, 2019 तक नैनीताल में पर्यटन के उद्देश्य से आ रहे हैं इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप अप्रैल 20, 2019 से 27 अप्रैल 27 , 2019 तक की दिनांक के लिए मेरे नाम से दो कमरे आरक्षित कर दीजिए।
धन्यवाद
भवदीय
जय प्रकाश
दिल्ली

रचनात्मक लेखन

प्रश्न-1 युवा असंतोष विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- युवा असंतोष

आज चारों तरफ असंतोष का माहौल है। बच्चे-बूढ़े, युवक-प्रौढ़, स्त्री-पुरुष, नेता-जनता सभी असंतुष्ट हैं। युवा वर्ग विशेष रूप से असंतुष्ट दिखता है। घर-बाहर सभी जगह उसे किसी-न-किसी को कोसते हुए देखा-सुना जा सकता है। अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसका एक ही कारण नजर आता है नेताओं के खोखले आश्वासन।नेता अपने खोखले वादों से युवाओं को भरमाकर उन्हें बेरोजगारी की ओर धकेल देते हैं। युवा वर्ग को शिक्षा ग्रहण करते समय बड़े-बड़े सब्ज़बाग दिखाए जाते हैं,और जब उनकी शिक्षा पूर्ण होती है, तो वे बेरोजगारी की भीड़ में पीस जाते हैं।

वह मेहनत से डिग्रियाँ हासिल करता है, परंतु जब वह व्यावहारिक जीवन में प्रवेश करता है तो खुद को पराजित पाता है। उसे अपनी डिग्रियों की निरर्थकता का अहसास हो जाता है। इनके बल पर रोजगार नहीं मिलता। इसके अलावा, हर क्षेत्र में शिक्षितों की भीड़ दिखाई देती है। वह यह भी देखता है कि जो सिफ़ारिशी है, वह योग्यता न होने पर भी मौज कर रहा है वह सब कुछ प्राप्त कर रहा है जिसका वह वास्तविक अधिकारी नहीं है।इस कारण से युवाओं में एक अलग प्रकार का आक्रोश रहता है।

इनकी शान-शौकत भरी बनावटी जिंदगी आम युवा में हीनता का भाव जगाकर उन्हें असंतुष्ट बना देती है। ऐसे में जब असंतोष, अतृप्ति, लूट-खसोट, आपाधापी आज के व्यावहारिक जीवन का स्थायी अंग बन चुके हैं तो युवा से संतुष्टि की उम्मीद कैसे की जा सकती है? समाज के मूल्य भरभराकर गिर रहे हैं, अनैतिकता सम्मान पा रही है, तो युवा मूल्यों पर आधारित जीवन जीकर आगे नहीं बढ़ सकते।

प्रश्न-2 स्वदेश-प्रेम विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- स्वदेश-प्रेम

देश-प्रेम की भावना स्वाभाविक है। मनुष्य अपने देश की हर वस्तु, व्यक्ति, साहित्य, संस्कृति यहाँ तक कि उसके कण-कण से प्यार करता है। यह हृदय की सच्ची भावना है जो केवल सच्चाई व महानता को स्पष्ट करती है।सच्चा देश प्रेम बहुत ही कम देखने को मिलता है, और बढ़ते समय के साथ इसमें गिरावट आ रही है।

देश-प्रेम की भावना से प्रभावित होकर श्री राम ने सोने की लंका को धूल के समान समझा और विभीषण को लंका का राजा बना दिया। इसी तरह अन्य महान पुरुषों ने अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति अपने प्राण न्योछावर करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई। रानी लक्ष्मीबाई, कुँवर सिंह, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर, वीर सावरकर आदि न जाने कितने देश-प्रेमी थे जो आज हमारे लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

कुछ लोग स्वदेश-प्रेम को स्थूल रूप में लेते हैं। वे भारत माता की मूर्ति की पूजा करते हैं या ‘भारत माता की जय’ बोलने से अपने प्रेम की अभिव्यक्ति मान लेते हैं। यह किसी ढोंग से कम नहीं है,और ये अपने देश के प्रति एक धोखा है। देश-प्रेम सूक्ष्म भाव है जो हम अपने कार्यों से व्यक्त करते हैं। जो देशवासी अपने कर्तव्य देश के प्रति पूर्ण करता है, वही देश-प्रेमी है। स्वदेश-प्रेमी कभी देश के विघटन की बात नहीं करता। वह मानसिक व भौतिक शक्ति में वृद्धि का प्रयास करता है। साथ ही, देश के अन्यायपूर्ण शासनतंत्र को उखाड़ फेंकना भी देश-प्रेमी का कर्तव्य है, देश पर कोई संकट आए तो प्राण न्योछावर करने वाला ही देश-प्रेमी हो सकता है।

प्रश्न-3 बेरोजगारी का दानव विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- बेरोजगारी का दानव

यहाँ जो समस्याएँ दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ी हैं, इनमें जनसंख्या-वृद्धि, महँगाई, बेरोजगारी आदि मुख्य हैं। इनमें से बेरोजगारी की समस्या ऐसी है जो देश के विकास में बाधक होने के साथ ही अनेक समस्याओं की जड़ बन गई है। किसी व्यक्ति के साथ बेरोजगारी की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब उसे उसकी योग्यता, क्षमता और कार्य-कुशलता के अनुरूप काम नहीं मिलता, जबकि वह काम करने के लिए तैयार रहता है।बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है जो कई सारी कठिनाइयों और समस्याओं को अपने साथ लेकर आती है।

बेरोजगारी की समस्या शहर और गाँव दोनों ही जगहों पर पाई जाती है। नवीनतम आँकड़ों से पता चला है कि इस समय हमारे देश में ढाई करोड़ बेरोजगार हैं। इस संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। यद्यपि सरकार और उद्यमियों द्वारा इसे कम करने का प्रयास किया जाता है, पर यह प्रयास ऊँट के मुँह में जीरा साबित होता है। हमारे देश में विविध रूपों में बेरोज़गारी पाई जाती है। पहले वर्ग में वे बेरोजगार आते हैं जो पढ़-लिखकर शिक्षित और उच्च शिक्षित हैं। यह वर्ग मज़दूरी नहीं करना चाहता , क्योंकि ऐसा करने में उसकी शिक्षा आड़े आती है।एक वर्ग उन बेरोजगारों का भी है जो ना तो अधिक पढ़े-लिखे हैं और ना ही अधिक मजदूरी कर सकते हैं। और एक वर्ग वे भी हैं जो मजदूरी करना चाहते हैं, पर वे भी हर दिन अपने लिए रोजगार नहीं ढूँढ पाते हैं।

स्कूली पाट्यक्रमों में श्रम की महिमा संबधी पाठ शामिल किया जाना चाहिए ताकि युवावर्ग श्रम के प्रति अच्छी सोच पैदा कर सके। इसके अलावा एक बार पुनः लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थापना एवं उनके विकास के लिए उचित वातावरण बनाने को आवश्यकता है। किसानों को खाली समय में दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, जैसे कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इस काम में सरकार के अलावा धनी लोगों को भी आगे आना चाहिए ताकि भारत बेरोजगार मुक्त बन सके और प्रगति के पथ पर चलते हुए विकास की नई ऊँचाइयाँ छू सके।

रचनात्मक लेखन

प्रश्न-1 युवा असंतोष विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- युवा असंतोष

आज चारों तरफ असंतोष का माहौल है। बच्चे-बूढ़े, युवक-प्रौढ़, स्त्री-पुरुष, नेता-जनता सभी असंतुष्ट हैं। युवा वर्ग विशेष रूप से असंतुष्ट दिखता है। घर-बाहर सभी जगह उसे किसी-न-किसी को कोसते हुए देखा-सुना जा सकता है। अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसका एक ही कारण नजर आता है नेताओं के खोखले आश्वासन।नेता अपने खोखले वादों से युवाओं को भरमाकर उन्हें बेरोजगारी की ओर धकेल देते हैं। युवा वर्ग को शिक्षा ग्रहण करते समय बड़े-बड़े सब्ज़बाग दिखाए जाते हैं,और जब उनकी शिक्षा पूर्ण होती है, तो वे बेरोजगारी की भीड़ में पीस जाते हैं।

वह मेहनत से डिग्रियाँ हासिल करता है, परंतु जब वह व्यावहारिक जीवन में प्रवेश करता है तो खुद को पराजित पाता है। उसे अपनी डिग्रियों की निरर्थकता का अहसास हो जाता है। इनके बल पर रोजगार नहीं मिलता। इसके अलावा, हर क्षेत्र में शिक्षितों की भीड़ दिखाई देती है। वह यह भी देखता है कि जो सिफ़ारिशी है, वह योग्यता न होने पर भी मौज कर रहा है वह सब कुछ प्राप्त कर रहा है जिसका वह वास्तविक अधिकारी नहीं है।इस कारण से युवाओं में एक अलग प्रकार का आक्रोश रहता है।

इनकी शान-शौकत भरी बनावटी जिंदगी आम युवा में हीनता का भाव जगाकर उन्हें असंतुष्ट बना देती है। ऐसे में जब असंतोष, अतृप्ति, लूट-खसोट, आपाधापी आज के व्यावहारिक जीवन का स्थायी अंग बन चुके हैं तो युवा से संतुष्टि की उम्मीद कैसे की जा सकती है? समाज के मूल्य भरभराकर गिर रहे हैं, अनैतिकता सम्मान पा रही है, तो युवा मूल्यों पर आधारित जीवन जीकर आगे नहीं बढ़ सकते।

प्रश्न-2 स्वदेश-प्रेम विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- स्वदेश-प्रेम

देश-प्रेम की भावना स्वाभाविक है। मनुष्य अपने देश की हर वस्तु, व्यक्ति, साहित्य, संस्कृति यहाँ तक कि उसके कण-कण से प्यार करता है। यह हृदय की सच्ची भावना है जो केवल सच्चाई व महानता को स्पष्ट करती है।सच्चा देश प्रेम बहुत ही कम देखने को मिलता है, और बढ़ते समय के साथ इसमें गिरावट आ रही है।

देश-प्रेम की भावना से प्रभावित होकर श्री राम ने सोने की लंका को धूल के समान समझा और विभीषण को लंका का राजा बना दिया। इसी तरह अन्य महान पुरुषों ने अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति अपने प्राण न्योछावर करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई। रानी लक्ष्मीबाई, कुँवर सिंह, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर, वीर सावरकर आदि न जाने कितने देश-प्रेमी थे जो आज हमारे लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

कुछ लोग स्वदेश-प्रेम को स्थूल रूप में लेते हैं। वे भारत माता की मूर्ति की पूजा करते हैं या ‘भारत माता की जय’ बोलने से अपने प्रेम की अभिव्यक्ति मान लेते हैं। यह किसी ढोंग से कम नहीं है,और ये अपने देश के प्रति एक धोखा है। देश-प्रेम सूक्ष्म भाव है जो हम अपने कार्यों से व्यक्त करते हैं। जो देशवासी अपने कर्तव्य देश के प्रति पूर्ण करता है, वही देश-प्रेमी है। स्वदेश-प्रेमी कभी देश के विघटन की बात नहीं करता। वह मानसिक व भौतिक शक्ति में वृद्धि का प्रयास करता है। साथ ही, देश के अन्यायपूर्ण शासनतंत्र को उखाड़ फेंकना भी देश-प्रेमी का कर्तव्य है, देश पर कोई संकट आए तो प्राण न्योछावर करने वाला ही देश-प्रेमी हो सकता है।

प्रश्न-3 बेरोजगारी का दानव विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।

उत्तर- बेरोजगारी का दानव

यहाँ जो समस्याएँ दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ी हैं, इनमें जनसंख्या-वृद्धि, महँगाई, बेरोजगारी आदि मुख्य हैं। इनमें से बेरोजगारी की समस्या ऐसी है जो देश के विकास में बाधक होने के साथ ही अनेक समस्याओं की जड़ बन गई है। किसी व्यक्ति के साथ बेरोजगारी की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब उसे उसकी योग्यता, क्षमता और कार्य-कुशलता के अनुरूप काम नहीं मिलता, जबकि वह काम करने के लिए तैयार रहता है।बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है जो कई सारी कठिनाइयों और समस्याओं को अपने साथ लेकर आती है।

बेरोजगारी की समस्या शहर और गाँव दोनों ही जगहों पर पाई जाती है। नवीनतम आँकड़ों से पता चला है कि इस समय हमारे देश में ढाई करोड़ बेरोजगार हैं। इस संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। यद्यपि सरकार और उद्यमियों द्वारा इसे कम करने का प्रयास किया जाता है, पर यह प्रयास ऊँट के मुँह में जीरा साबित होता है। हमारे देश में विविध रूपों में बेरोज़गारी पाई जाती है। पहले वर्ग में वे बेरोजगार आते हैं जो पढ़-लिखकर शिक्षित और उच्च शिक्षित हैं। यह वर्ग मज़दूरी नहीं करना चाहता , क्योंकि ऐसा करने में उसकी शिक्षा आड़े आती है।एक वर्ग उन बेरोजगारों का भी है जो ना तो अधिक पढ़े-लिखे हैं और ना ही अधिक मजदूरी कर सकते हैं। और एक वर्ग वे भी हैं जो मजदूरी करना चाहते हैं, पर वे भी हर दिन अपने लिए रोजगार नहीं ढूँढ पाते हैं।

स्कूली पाट्यक्रमों में श्रम की महिमा संबधी पाठ शामिल किया जाना चाहिए ताकि युवावर्ग श्रम के प्रति अच्छी सोच पैदा कर सके। इसके अलावा एक बार पुनः लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थापना एवं उनके विकास के लिए उचित वातावरण बनाने को आवश्यकता है। किसानों को खाली समय में दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, जैसे कार्यों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इस काम में सरकार के अलावा धनी लोगों को भी आगे आना चाहिए ताकि भारत बेरोजगार मुक्त बन सके और प्रगति के पथ पर चलते हुए विकास की नई ऊँचाइयाँ छू सके।

समाचार लेखन

समाचार लेखन

प्रश्न-1 समाचार का इंट्रो लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर- इंट्रो समाचार का प्रारम्भिक एवं महत्त्वपूर्ण भाग होता है, जिसमें समाचार का समस्त सूचनात्मक भाग निहित होता है। इंट्रो के बाद का भाग तो मात्र विस्तार के लिए ही होता है। अत: इण्ट्रो प्रभावोत्पादक होना चाहिए व क्या, कब, कौन, कहाँ के समस्त तथ्यों का समावेश इसमें होना चाहिए। भाषा सहज परन्तु प्रभावशाली होनी चाहिए।

प्रश्न-2 समाचार लेखन की प्रक्रिया में उल्टा पिरामिड सिद्धांत क्या है?

उत्तर- उल्टा पिरामिड सिद्धांत समाचार लेखन का बुनियादी सिद्धांत है। यह समाचार लेखन का सबसे सरल, उपयोगी और व्यावहारिक सिद्धांत है। समाचार लेखन का यह सिद्धांत कथा या कहनी लेखन की प्रक्रिया के ठीक उलट है। इसमें किसी घटना, विचार या समस्या के सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों या जानकारी को सबसे पहले बताया जाता है, जबकि कहनी या उपन्यास में क्लाइमेक्स सबसे अंत में आता है। इसे उल्टा पिरामिड इसलिये कहा जाता है क्योंकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य या सूचना सबसे पहले आती है जबकि पिरामिड के निचले हिस्से में महत्वपूर्ण तथ्य या सूचना होती है। इस शैली में पिरामिड को उल्टा कर दिया जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सूचना पिरामिड के सबसे उपरी हिस्से में होती है आरै घटते हुये क्रम में सबसे कम महत्व की सूचनाये सबसे निचले हिस्से में होती है।

प्रश्न-3 टी वी समाचार के लिए क्या आवश्यक है? इसमें किन विशेष विषयों पर विशेष वुलेटिन तैयार किए जाते हैं?

उत्तर- टीवी समाचार तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। इनमें स्पष्टता होना अत्यंत आवश्यक है। उसके अभाव में दर्शक भ्रमित हो जायेंगे। टी वी समाचार संक्षिप्त भी होने चाहिए तथा इसमें भाषा का प्रवाह तथा ऑडियो विजुअल में साम्य भी होना चाहिए। टी वी में विशेष विषयों पर केन्द्रित विशेष बुलेटिन भी तैयार किए जाते हैं जैसे क्राइम से जुड़ी खबरों के लिए क्राइम बुलेटिन, खेल की खबरों के लिए स्पोर्ट्स बुलेटिन तथा चुनाव का खबरों को दर्शाने के लिए चुनाव बुलेटिन।

प्रश्न-4 अखबार और टी.वी. के समाचार लेखन में क्या अन्तर है?

उत्तर- अखबार एक पठन माध्यम है और टी.वी. दृश्य-श्रव्य माध्यम। अखबार का सम्बन्ध मुख्य रूप से साक्षर वर्ग से होता है, जबकि टी.वी. का सम्बन्ध साक्षर व निरक्षर दोनों वर्गों से। दोनों माध्यमों की प्रकृति में अन्तर होने के कारण दोनों के लिए समाचार लेखन में अन्तर होता है। अखबार की भाषा बहुसंख्यक लोगों द्वारा समझी जाने वाली होनी चाहिए। समाचार का आकार उपलब्ध स्पेस के अनुसार होना चाहिए। आलेख में कोई गलती या अशुद्धि नहीं होनी चाहिए। टी.वी. के लिए समाचार लेखन की बुनियादी शर्त दृश्य के साथ लेखन है। दृश्य अर्थात् बिजुअल्स के अनुसार ही समाचार लिखा जाता है। टी.वी. पर समाचार के कुछ चरण होते हैं, जैसे-ब्रेकिंग न्यूज, ड्राइ एंकर, फोन इन, एंकर विजुअल्स, एंकर बाइट, लाइव व एंकर पैकेज। इन सभी रूपों को ध्यान में रखते हुए अपेक्षानुसार समाचार लिखा जाता है।

प्रश्न-5 समाचार-पत्रों में हार्ड न्यूज व सॉफ्ट न्यूज से क्या तात्पर्य है?

उत्तर- समाचार-पत्रों में विविध प्रकार की खबरें प्रकाशित होती हैं। सामान्यत: दुर्घटना, अपराध, आदि से सम्बन्धित खबरें, रोजमर्रा के घटनाक्रम, दुर्घटनाओं और अपराध से सम्बन्धित खबरें हार्ड न्यूज कहलाती हैं तथा मानवीय रुचि व मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरें सॉफ्ट न्यूज कहलाती हैं।

द्वारा- गुलाब चंद जैसल

कविता-कहानी-नाटक लेखन https://youtu.be/YWA4ZhUdh9g

कविता-कहानी-नाटक लेखन

प्रश्न-1 कविता के किन प्रमुख घटको का ध्यान रखना चाहिए? लगभग 80-100 शब्दों में उत्तर लिखिए।

उत्तर- कविता भाषा में होती है इसलिए भाषा का सम्यक ज्ञान जरूरी है भाषा सब्दो से बनती है शब्दों का एक विन्यास होता है जिसे वाक्य कहा जाता है भाषा प्रचलित एवं सहज हो पर संरचना ऐसी कि पाठक को नई लगे कविता में संकेतो का बड़ा महत्व होता है इसलिए चिह्नों (, !,।) यहाँ तक कि दो पंक्तियों के बीचका खाली स्थान भी कुछ कह रहा होता है वाक्य-गठन की जो विशिष्ट प्रणालियाँ होती हैं, उन्हें शैली कहा जाता है इसलिए विभिन्न काव्य-शैलियों का ज्ञान भी जरुरी है। शब्दों का चयन, उसका गठन और भावानुसार लयात्मक अनुशासन वे तत्व हैं जो जीवन के अनुशासन की लिए जरुरी हैं।

प्रश्न-2 कहानी लेखन में कथानक के पत्रों का संबंध स्पष्ट कीजिए। लगभग 80-100 शब्दों में उत्तर लिखिए।

उत्तर- देशकाल, स्थान और परिवेश के बाद कथानक के पत्रों पर विचार करना चाहिए। हर पात्र का अपना स्वरूप, स्वभाव और उद्देश्य होता है। कहानी में वह विकसित भी होता है या अपना स्वरूप भी बदलता है। कहानीकार के सामने पत्रों का स्वरूप जितकारण पत्नारों का अध्ययन कहानी की एक बहुत महत्त्वपूर्ण और बुनियादी शर्त है। इसके स्पष्ट होगा उतनी ही आसानी उसे पत्रों का चरित्र-चित्रण करने और उसके संवाद लिखने में होगी। इसके अंतर्गत पात्रो के अंतः संबंध पर भी विचार किया जाना चाहिए। कौन-से पात्र की किस-किस परिस्थिति में क्या प्रतिक्रिया होगी, यह भी कहानीकार को पता होना चाहिए।

प्रश्न-3 नाटक लेखन की कार्य अवस्थाएँ किस प्रकार होती हैं? लगभग 80-100 शब्दों में स्पस्ट कीजिए।

उत्तर- नाटक में आरंभ से लेकर अंत तक पाँच कार्य अवास्थाए होती हैं, आरंभ, यत्न, प्राप्त्याशा, नियताप्ति और फलागम आरंभ-कथानक का आरंभ होता है और फलप्राप्ति की इच्छा जाग्रत होती है।
आरंभ – इसमें किसी भी तरह के नाटक की शुरुआत की जाती हैं। 
यत्न – इसमें फलप्राप्ति की इच्छा को पूर्ण करने के लिए प्रयत्न किए जाते हैं।
प्राप्त्याशा – इसमें फलप्राप्ति की आशा उत्पन्न होती है। 
नियताप्ति – इसमें फलप्राप्ति की इच्छा निश्चित रूप ले लेती है। 
फलागम आरंभ – इसमें फलप्राप्ति हो जाती है।

प्रश्न-4 कहानी का नाट्य- रूपांतरण करते समय किन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए? लगभग 80-100 शब्दों में उत्तर लिखिए।

उत्तर- कहानी का नाट्य रूपांतर करते समय इन महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिये-

  1. कहानी एक ही जगह पर स्थित होनी चाहिये।
    1. कहानी में संवाद नहीं होते और नाट्य संवाद के आधार पर आगे बढता है। इसलिये कहानी मे संवाद का समावेश करना जरूरी है।
    1. कहानी का नाट्य रूपांतर करने से पहले उसका कथानक बनाना बहुत जरूरी है।
    1. नाट्य मे हर एक पत्र का विकास, कहानी जैसे आगे बढती है, वैसे होता है इसलिये कहानी का नाट्य रूपांतर करते वक्त पात्र का विवरण करना बहुत जरूरी होता है।
    1. एक व्यक्ति कहानी लिख सकता है, पर जब नाट्य रूपांतर कि बात आती है, तो हर एक समूह या टीम कि जरूरत होती है।

प्रस्तुति – गुलाब चंद जैसल

कबीर की साखियाँ

कक्षा-8 वीं कविता सारांश एवं प्रश्नोत्तर

  कबीर की साखियाँ –

कबीर

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मेल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।।1।। 

आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक।
कह कबीर नहिं उलटिए,वही एक की एक।।2।। 

माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि।
मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरैयह तौ सुमिरन नाहिं।।3।।

कबीर घास न नींदिए, जो पाऊँ तलि होइ।
उड़ि पड़ै जब आँखि मैं, खरी दुहेली होइ।।4।।

जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।।5।।

कबीर की साखियाँ सारांश –: संत कबीर के दोहे हमें जीने की सही राह दिखाते हैं। पहले दोहे में कबीरदास जी कहते हैं कि हमें मनुष्य की जाति से ज्यादा उसके गुणों को सम्मान करना चाहिए। 

दूसरे दोहे में कबीर जी ने कहा है कि कभी भी अपशब्द के बदले में किसी को अपशब्द मत कहो। 

तीसरे दोहे में कबीरदास जी ने मन की चंचलता का वर्णन किया है। उनके अनुसार इंसान जीभ और माला से भले ही प्रभु का नाम जपता रहता है, लेकिन उसका मन अपनी चंचलता त्याग नहीं पाता है।

चौथे दोहे में कबीर जी कहते हैं कि कभी भी किसी को उसके छोटे या बड़े होने का घमंड नहीं करना चाहिए, कभी-कभी छोटे लोग भी बड़ों पर बहुत भारी पड़ जाते हैं, जैसे हाथी पर चींटी भारी पड़ जाती है। 

पाँचवें दोहे में संत कबीर कहते हैं कि मानव अपनी मानसिक कमजोरियां दूर करके, अपने संसार को ख़ुशहाली से भर सकता है।

कबीर की साखियाँ अर्थ सहित –

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मेल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।।1।।
कबीर की साखियाँ अर्थ सहित: कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि हमें कभी भी सज्जन इंसान की जाति पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि हमें तो उसके गुणों के आधार पर उसका सम्मान करना चाहिए। जैसे, तलवार की कीमत म्यान नहीं, बल्कि तलवार की धार में छिपी होतो है।

आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक।
कह कबीर नहिं उलटिए,वही एक की एक।।2।।
कबीर की साखियाँ अर्थ सहित: प्रस्तुत साखी में कबीरदास जी कहते हैं कि किसी के अपशब्दों का जवाब कभी भी अपशब्दों से मत दो। इससे वो अपशब्द बढ़ने के बजाय घटते-घटते ख़त्म हो जाएंगे।

माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहि।
मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरैयह तौ सुमिरन नाहिं।।3।।
कबीर की साखियाँ अर्थ सहित: प्रस्तुत दोहे में कबीर जी कहते हैं कि अगर आपका मन प्रभु की भक्ति में नहीं लगता है, तो फिर हाथ में माला लेकर घूमना, मुख से प्रभु का नाम लेना बेकार है। अगर प्रभु को पाना है, तो हमें एकाग्र होकर उनकी भक्ति करनी होगी।

कबीर घास न नींदिए, जो पाऊँ तलि होइ।
उड़ि पड़ै जब आँखि मैं, खरी दुहेली होइ।।4।।
कबीर की साखियाँ अर्थ सहित: प्रस्तुत दोहे में कबीर जी कहते हैं कि हमें कभी भी किसी को छोटा समझकर उसका निरादर नहीं करना चाहिए। जैसे, घास को छोटा समझ कर हर वक़्त दबाना नहीं चाहिए क्योंकि अगर इसका एक तिनका भी आंख में चला जाए, तो हमें बहुत पीड़ा होती है। 

जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय।
या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।।5।।
कबीर की साखियाँ अर्थ सहित: प्रस्तुत साखी में कबीर जी कहते हैं कि जिस मनुष्य का मन शांत होता है, दुनिया में उसका कोई शत्रु नहीं हो सकता है। यदि दुनिया का हर मनुष्य स्वार्थ, क्रोध जैसी भावनाओं का त्याग कर दे, ओ वो दयालु और महान बन सकता है।

कबीर की साखियाँ प्रश्न-उत्तर –

प्र॰1 ‘तलवार का महत्त्व होता है म्यान का नहीं’- उक्त उदाहरण से कबीर क्या कहना चाहते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. संत कबीरदास जी के अनुसार, हमें किसी व्यक्ति की सुंदरता का अनुमान उसके शरीर से नहीं, बल्कि उसके गुणों से लगाना चाहिए। जिस तरह म्यान तलवार का बाहरी कवच मात्र होती है, ठीक उसी तरह, शरीर मनुष्य का बाहरी आवरण मात्र होता है, इसीलिए हमें मनुष्य की असली पहचान उसके गुणों से ही करनी चाहिए।

प्र॰2 पाठ की तीसरी साखी-जिसकी एक पंक्ति है ‘मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं’ के द्वारा कबीर क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर. तीसरी साखी में कबीर कहना चाहते हैं कि अगर आप हाथ में माला जप रहे हैं, मुँह से प्रभु का नाम रट रहे हैं, लेकिन आपका मन अलग-अलग विचारों में उलझा हुआ है, तो ये बेकार है। प्रभु का नाम लेना और उनकी भक्ति करना तभी सार्थक है, जब आप अपने मन पर काबू पा लें और सच्चे मन से भक्ति करें।

प्र॰3 कबीर घास की निंदा करने से क्यों मना करते हैं। पढ़े हुए दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. उक्त दोहे में श्री कबीर जी कहना चाहते हैं कि अपने से छोटा समझ कर हमें किसी की निंदा या बेइज्जती नहीं करनी चाहिए। घास का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि पैरों के तले आने पर घास को मत कुचलो क्योंकि अगर घास का एक तिनका भी आँख में चला जाए, तो आपको बहुत कष्ट होगा। अर्थात, छोटे-से-छोटे व्यक्ति में भी कुछ गुण होते हैं और हमें उनका भी सम्मान करना चाहिए।

प्र॰4 मनुष्य के व्यवहार में ही दूसरों को विरोधी बना लेनेवाले दोष होते हैं। यह भावार्थ किस दोहे से व्यक्त होता है?
उत्तर.
 यह भावार्थ कबीर जी की अंतिम साखी में स्पष्ट हो रहा है-
‘जग में बैरी कोई नहीं जो मन शीतल होय।
या आपा को डारी दे, दया करै सब कोय।।’

           प्रस्तुति -गुलाब चंद जैसल

हिंदी आधार कक्षा 12 वीं सहायक सामग्री

द्वारा--गुलाब चंद जैसल

हिन्दी कक्षा –12वीं     छात्रोपयोगी-सहायकसामग्री

पाठों का सूत्रात्मक विवरण (संक्षिप्त परिचय)

(आरोह भाग-2 एवं वितान भाग-2 के पाठों का सार, उद्देश्य, संक्षिप्त परिचय )

1 कविता: आत्म परिचय (हरिवंश राय बच्चन)     

कविता सार :-

1.स्वयं को जानना दुनिया को जानने से अधिक कठिन भी हैं और आवश्यक भी।

2. व्यक्ति के लिए समाज से निरपेक्ष एवं उदासीन रहना न तो संभव है, न ही उचित है। दुनिया अपने व्यंग्य बाणों, शासन – प्रशासन से चाहे कितना कष्ट दे, पर दुनिया से कष्ट कर व्यक्ति अपनी पहचान नहीं बना सकता । परिवेश ही व्यक्ति को बनाता हैं, ढालता है।

3.इस कविता मे कवि ने समाज एवं परिवेश से प्रेम एवं संघर्ष का संबंध निभाते हुए जीवन मे सामंजस्य स्थापित करने की बात की हैं।

4.छायावादोतर गीति काव्य में प्रीति-कलह का यह विरोधाभास दिखाई देता हैं। व्यक्ति और समाज का संबंध इसी प्रकार प्रेम और संघर्ष का है जिसमें कवि आलोचना की परवाह न करते हुए संतुलन स्थापित करते हुए चलता हैं।

5.’नादान वही है हाय, जहां पर दाना’ पंक्ति के माध्यम से कवि सत्य की खोज के लिए , अहंकार को त्याग कर नई सोच अपनाने पर जोर दे रहा हैं।

(ख)कविता:- दिन जल्दी जल्दी ढलता है।

प्रस्तुत कविता में कवि हरिवंश राय बच्चन कहते हैं कि समय बीतते जाने का एहसास हमें लक्ष्य-प्राप्ति के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है। मार्ग पर चलने वाला राही यह सोचकर अपनी मंजिल की ओर कदम बढाता है कि कहीं रास्ते में ही रात न हो जाए। पक्षियों को भी दिन बीतने के साथ यह एहसास होता है कि उनके बच्चे कुछ पाने की आशा में घोंसले से झांक रहे होंगे। यह सोचकर उनके पंखो में गति आ जाती है कि वे जल्दी से अपने बच्चों से मिल सकें।

कविता में आशावादी स्वर है। गंतव्य का स्मरण पथिक के कदमों में स्फूर्ति भर देता है। आशा की किरण जीवन की जडता को समाप्त कर देती है। वैयक्तिक अनुभूति का कवि होने पर भी बच्चन जी की रचनाएं किसी सकारात्मक सोच तक ले जाने का प्रयास है।

2. पतंग  (आलोक धन्वा)

कविता सार :- पतंग कविता में कवि आलोक धन्वा बच्चों की बाल सुलभ इच्छाओं और उमंगों तथा प्रकृति के साथ उनके रागात्मक संबंधों का अत्यंत सुंदर चित्रण किया है । भादो मास गुजर जाने के बाद सर्द ऋतु का आगमन होता है । चारों ओर प्रकाश फैल जाता है सुबह के सूर्य का प्रकाश लाल चमकीला हो जाता है । सर्द ऋतु के आगमन से उत्साह एवं उमंग का माहौल बन जाता है ।

सर्दऋतु का यह चमकीला इशारा बच्चों को पतंग उठाने के लिए बुलाता है और पतंग उडाने के लिए मंद मंद वायु चला कर आकाश को इस योग्य बनाता है कि दुनिया की सबसे हल्की रंगीन कागज और बांस की सबसे पतली कमानी से बनी पतंगें आकाश की ऊंचाइयों में उड सके । बच्चों के पांवों की कोमलता से आकर्षित होकर मानों धरती उनके पास आती है । अन्यथा उनके पांव धरती पर पडते ही नहीं ऐसा लगता है । मानों वे हवा में उडते जा रहे हैं । पतंग उडाते समय बच्चे रोमांचित होते हैं । एक संगीतमय ताल पर उन्हे उनके शरीर हवा में लहराते हैं । वे किसी भी खतरे से बेखबर होते हैं । बाल मनोविज्ञान बाल क्रियाकलापों एवं बाल सुलभ इच्छाओं का सुंदर बिंबों के माध्यम से अंकन किया गया है ।

                    3. कविता के बहाने (कुवंर नारायण)

कविता सार :- कुवँर नारायण की रचनाओं में संयम, परिष्कार एवं साफ सुथरापन है। यथार्थ का कलात्मक संवेदनापूर्ण चित्रण उनकी रचनाओं की विशेषता है। उनकी रचनाएँ जीवन को समझने की जिज्ञासा है यथार्थ-प्राप्ति की घोषणा नहीं । व्यक्तिक एवं सामाजिक तनाव व्यंजनापूर्ण ढंग से उनकी रचनाओं में स्थान पाता है । प्रस्तुत कविता में कवित्व शक्ति का वर्णन है । कविता चिड़िया की उडान की तरह कल्पना की उडान है लेकिन चिड़िया के उडने की अपनी सीमा है जबकि कवि अपनी कल्पना के पंख पसार कर देश और काल की सीमाओं से परे उड़ जाता है। फूल कविता लिखने की प्रेरणा तो बनता है लेकिन कविता तो बिना मुरझाए हर युग में अपनी खुशबू बिखेरती रहती है । कविता बच्चों के खेल के समान है और समय और काल की परवाह किए बिना अपनी कल्पना के पंख पसार कर ऊडने की कला बच्चे ही जानते हैं ।

(ख) बात सीधी थी पर :

प्रस्तुत कविता में भाव के अनुरूप भाषा के महत्त्व पर बल दिया गया है । कवि कहते हैं कि एक बार वह सीधे और सरल कथ्य की अभिव्यक्ति में भी भाषा के चक्कर में ऐसा फंफ गया कि उसे कथ्य ही बदला बदला सा लगा। जिस प्रकार जोर –जबरदस्ती से कील की चूडी मर जाती है। उसी प्रकार बात का मूल भाव भी खत्म हो जाता है। भाव भाव के अभाव में अभिव्यक्ति बेकार हो जाती है।

अंत में भाव ने एक शरारती बच्चे के समान कवि से पूछा कि तूने क्या अभी तक भाषा का स्वाभाविक प्रयोग नहीं सीखा । इस कविता में भाषा की सम्प्रेषण शक्ति का महत्त्व समझाया गया है ।

कृत्रिमता एवं भाषा की अनावश्यक पच्चीकारी से भाषा की पकड कमजोर हो जाती है ।

4. कैमरे में बंद अपाहिज  (रघुबीर सहाय)

कविता सार :- इस कविता में कवि ने एक शारीरिक चुनौती झेल रहे व्यक्ति की पीड़ा के साथ साथ आज की मीडिया के दोगले चरित्र को भी उजागर किया है । हमें किसी की पीड़ा को मन से महसूस करते हुए संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए लेकिन कारोबार और स्वार्थ के दबाव तले आज मीडिया अति संवेदनहीन होकर अपनी भूमिका तलाश रही है । जिस पर लोगों को संवेदनशील बनाने का उत्तरदायित्व है आज वहीं संवेदनहीनता की भाषा और कलेवर लिए है ।

5- सहर्ष स्वीकारा है  (गजानन माधव मुक्तिबोध)

कविता सार:- कविता में जीवन के सुख-दुख, संघर्ष-अवसाद, उठा-पटक को समान रूप से स्वीकार करने की बात कही गई है। स्नेह की प्रगाढता अपनी परम सीमा पर पहुंचकर वियोग की कल्पना मात्र से त्रस्त हो उठती है। प्रेमालंबन अर्थात प्रियजन पर यह भावपूर्ण निर्भरता, कवि के मन में विस्मृति की चाह उत्पन्न करती है। वह अपने प्रिय को पूर्णतया भूल जाना चाहता है। वस्तुत: विस्मृति की चाह भी स्मृति का ही रूप है। यह विस्मृति भी स्मृतियों के धुंधलके से अछूती नहीं है। प्रिय की याद किसी-न-किसी रूप में बनी रहती है। परंतु कवि दोनों ही परिस्थितियों को उस परम सत्ता की परछाई मानता है। यह विस्मृति भी स्मृतियों के धुंधलके से अछूति नहीं है। प्रिय की याद किसी न किसी रूप में बनी ही रहती है। भावना की स्मृति विचार बनकर विश्व की गुत्थियां सुलझाने में मदद करती है। स्नेह में थोडी निस्संगता भी जरूरी है। अति किसी चीज की अच्छी नहीं। ‘वह’ यहां कोई भी हो सकता है दिवंगत मां प्रिय या अन्य । कबीर के राम की तरह, वडर्सवर्थ की मातृमना प्रकृति की तरह यह प्रेम सर्वव्यापी होना चाहता है।

6. उषा (शमशेर बहादुर सिंह)

कविता सार :-उषा कविता में कवि सूर्योदय के समय आकाश में बदलते रंगों के जादू के बिम्बों को अत्यंत आकर्षक रूप में उठाता है । सूर्योदय के ठीक पूर्व आसमान नीले शंख की तरह बहुत नीला नजर आता है । प्रातःकालीन नभ की तुलना काली सिल से की गई है जिसे अभी अभी केसर पीस कर धो दिया गया है । कभी कवि को राख से लीपे हुए चौके के समान लगता है , जो अभी गीला पडा है। नीले गगन में सूर्य की पहली किरण ऐसी दिखाई देती है मानो कोई सुंदरी नीले जल में नहा रही हो और उसका गौरा शरीर जल की लहरों के साथ झिलमिला रहा हो। प्रातःकालीन परिवर्तनशील सौंदर्य का दृश्य बिम्ब, प्राकृतिक परिवर्तनों को मानवीय क्रियाकलापों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। यथार्थ जीवन से चुने गए उपमानों जैसे :- राख से लीपा हुआ चौका, काली सिल, नीला शंख,स्लेट,लाल खडिया चाक आदि का प्रयोग । प्रसाद की कृति बीति विभावरी जाग री, से तुलना की जा सकती है ।

7. लक्ष्मण मूर्च्छा और राम का विलाप (तुलसीदास)

काव्य सार :- श्रीराम जी को समर्पित ग्रंथ श्रीरामचरितमानस उत्तर भारत में बडे भक्ति भाव से पढ़ा जाता है उसी महान ग्रंथ से यह अंश उद्घृत है।रावण पुत्र मेघनाद द्वारा शक्तिबाण से मुर्च्छित लक्ष्मण को देखकर राम व्याकुल हो जाते हैं । सुषेन वेद्य ने संजीवनी बूटी लाने के लिए हनुमान को हिमालय पर्वत पर भेजा। आधी रात व्यतीत होने पर जब हनुमान नहीं आए, तब राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को उठाकर हृदय से लगा लिया और साधारण मनुष्य की भांति विलाप करने लगे। हे ! भाई, तुम मुझे दुखी नहीं देख सकते थे। तुम्हारा स्वभाव सदा से ही कोमल था। मेरे साथ वन में सर्दी, गर्मी और विभिन्न प्रकार की विपरीत परिस्थितियों को भी सहा। जैसे पंख बिना पक्षी, मणि बिना सर्प और सूंड बिना श्रेष्ठ हाथी दीन हीन हो जाते हैं, हे ! भाई यदि मैं जीवित रहता हूँ तो मेरी दशा भी वैसी ही हो जायेगी। मैं अपनी पत्नी के लिए अपने प्रिय भाई को खोकर कौन सा मुहँ लेकर अयोध्या जाउंगा। इस बदनामी को भले ही सह लेता कि राम कायर है और अपनी पत्नी को खो बैठा । स्त्री की हानि विशेष क्षति नहीं हैं , परंतु भाई को खोना अपूरणीय क्षति है ।

‘रामचरितमानस’ के ‘लंका खंड” से गृहीत लक्ष्मण को शक्तिबाण लगने का प्रसंग़ कवि की मार्मिक स्थलों की पहचान का एक श्रेष्ठ नमूना है । भाई के शोक में विगलित राम का विलाप धीरे-धीरे प्रलाप में बदल जाता है जिसमें लक्ष्मण के प्रति राम के अंतर में छिपे कई कोण सहसा अनावृत हो जाते हैं । यह प्रसंग ईश्वर राम में मानव सुलभ गुणों का समंवय कर देता है। हनुमान का संजीवनी लेकर आ जाना करुण रस में वीर रस का उदय हो जाने के समान है।

विनय पत्रिका एक अन्य मह्त्त्वपूर्ण तुलसीदासकृत काव्य है। जिसके अंतर्गत कवितावली का प्रसंग लिया गया है। तुलसी का विविध विषमताओं से ग्रस्त कलिकाल तुलसी का युगीन यथार्थ है, जिसमें वे कृपालु प्रभु राम व राम राज्य का स्वप्न रचते हैं । युग और उसमें अपने जीवन का ना सिर्फ उन्हे गहरा बोध है बल्कि उसकी अभिव्यक्ति में भी वे अपने समकालीन कवियों से आगे हैं। यहाँ पाठ में प्रस्तुत “कवितावली” के छंद इसके प्रमाण है । पहले छंद स्वरूप हैं—- “ किसवी किसान………………..” में उन्होने दिखलाया है कि संसार के अच्छे बुरे समस्त लीला प्रपंचों का आधार —-“ पेट की आग” का गहन यथार्थ है; जिसका समाधान वे राम की भक्ति में देखते हैं । दरिद्रजन की व्यथा दूर करनेके लिए राम रूपी घंश्याम का आह्वान किया गया है ।पेट की आग बुझाने के लिए राम रूपी वर्षा का जल अनिवार्य है । इसकेलिए अनैतिक कार्य करने की आवश्यक्ता नहीं है । इस प्रकार, उनकी राम भक्ति पेट की आग बुझाने वाली यानि जीवन के यथार्थ संकटों का समाधान करने वाली है, ना कि केवल आध्यात्मिक मुक्ति देने वाली । गरीबी की पीडा रावण के समान दुखदायी हो गई है ।

तीसरे छंद “धूत कहो अवधूत कहो …….” में भक्ति की गहनता और सघनता में उपजे भक्त आत्मविश्वास का हूदय के सजीव चित्रण हैं। जिससे समाज में व्याप्त जाति तिरस्कार का साहस पैदा होता है । इस प्रकार भक्ति की रचनात्मक भूमिका का संकेत यहाँ है , जो आज के भेदभाव मूलकयुग में अधिक प्रासंगिक है ।

8. रूबाइयाँ (फिराक गोरखपुरी)

कविता/रुबाइ का सार :-उर्दू शायरी की रिवायत के विपरीत फिराक गोरखपुरी के साहित्य में लोक जीवन एवं प्रकृति की झलक मिलती है । सामाजिक संवेदना वैयक्तिक अनुभूति बनकर उनकी रचनाओं में व्यक्त हुई है । जीवन का कठोर यथार्थ उनकी रचनाओं में स्थान पाता है । उन्होने लोकभाषा के प्रतीकों का प्रयोग किया है । लाक्षणिक प्रयोग उनकी भाषा की विशेषता है । फिराक की रूबाइयों में घरेलु हिंदी का रूप दिखता है ।

‘रूबाई’ उर्दू और फारसी का एक छंद या लेखन शैली है, जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं । इसकी पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (काफिया) मिलाया जाता है तथा तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है । जैसे प्रयोग उनकी भाषा की सशक्ता के नमूने के तौर पर देखे जा सकते हैं ।

सार रुबाइयाँ :- रक्षाबंधन एक मीठा बंधन है। रक्षा बंधन के कच्चे धागों पर बिजली के लच्छे हैं । सावन में रक्षा बंधन आता है। सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है वही संबंध भाई का बहन से होता है ।

गजल :- इस कविता में फिराक की एक गजल भी शामिल है । रूबाइयों की तरह ही फिराक की गजलों में भी हिंदी समाज और उर्दू शायरी की परंपरा भरपूर है । इसका अद्भुत नमूना है यह गजल । यह गजल कुछ इस तरह बोलती है कि जिसमें दर्द भी है , एक शायर की हसरत भी है और साथ ही यह काव्य- शिल्प की वह ऊंचाई जो गजल की विशेषता मानी जाती है ।

9. छोटा मेरा खेत (उमा शंकर जोशी)

कविता का सार-  उमा शंकर जोशी एक गुजराती कवि होने के साथ साथ संस्कृत के भी विद्वान हैं । उन्होने गुजराती कविता को प्रकृति से जोडा है । आम आदमी के जीवन की झलक उनकी रचनाओं में मिलती है । खेती के रूपक द्वारा काव्य रचना- प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है । काव्य कृति की रचना बीजवपन से लेकर पौधों के पुष्पित होने के विभिन्न चरणों से गुजरती है । अंतर केवल इतना है कि कवि-कर्म की फसल कालजयी , शाश्वत होती है । उसका रस शरण अक्षय होता है । कागज का पन्ना, जिस पर रचना शब्दबद्ध होती है, कवि को एक चौकोर खेत की तरह लगता है । इस खेत की किसी अंधड(आशय भावानात्मक आंधी से होगा) के प्रभाव से किसी क्षण एक बीज बोया जाता है । यह बीज रचना विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है । यह मूल रूप कल्पना का सहारा लेकर विकसित होता है और प्रक्रिया में स्वयं विगलित हो जाता है । उससे शब्दों के अंकुर निकलते हैं और अंततः कृति एक पूर्ण स्वरूप में उपस्थित होती है ।

(ख) बगुलों के पंख- बगुलों के पंख कविता एक चाक्षुष बिम्ब की कविता है । सौंदर्य का अपेक्षित प्रभाव उत्पन्न करने के लिए कवियों ने कई युक्तियाँ अपनाई हैं जिसमें से सबसे प्रचलित युक्ति है – सौंदर्य के ब्यौरों के चित्रात्मक वर्णन के साथ अपने मन पर पडने वाले उसके प्रभाव का वर्णन और आत्मगत संयोग की यह युक्ति पाठक को उस मूल सौंदर्य के काफी निकट ले जाती है । जोशी जी की इस रचना में भी ऐसा ही है । कवि कालेबादलों से भरे आकाश में पंक्ति बना कर उडते सफेद बगुलों को देखता है । वे कजरारे बादलों में अटका सा रहा जाता है । वह इस माया से अपने को बचाने की गुहार लगाता है । क्या यह सौंदर्य से बांधने और बिंधने की चरम स्थिति को व्यक्त करने का एक तरीका है । प्रकृति का स्वतंत्र (आलंबनगत) चित्रण आधुनिक कविता की विशेषता है । चित्रात्मकवर्णन द्वारा कवि ने एक ओर काले बादलों पर उडती बगुलों की श्वेत पंक्ति का चित्र अंकित किया है तो दूसरी ओर अप्रतिम दृश्य के हृदय पर पडने वाले प्रभावको चित्रित किया है ।

(गद्य-आरोह भाग-2)

10. भक्तिन (महादेवी वर्मा‌)

पाठ का सार : भक्तिन जिसका वास्तविक नाम लक्ष्मी था, लेखिका महादेवी वर्मा की सेविका है । बचपन में ही भक्तिन की माँ की मृत्यु हो गई । सौतेली माँ ने पाँच वर्ष की आयु में ही विवाह तथा नौ वर्ष की आयु में गौना कर भक्तिन को ससुराल भेज दिया । ससुराल में भक्तिन ने तीन बेटियों को जन्म दिया ,जिस कारण उसे सास और जिठानियों की उपेक्षा का सामना करना पडा । सास और जिठानियाँ आराम फरमाती थी और भक्तिन और उसकी नन्ही बेटियाँ घर और खेत का सारा काम करती । भक्तिन का पति भक्तिन को बहुत आदर सम्मान देता था । पति के साथ भाव विचार कर वह अपना अलगौझा कर लेती है । भक्तिन चालाक भी है अलग होते समय उसने असंतोष के भावों को भी प्रकट किया लेकिन वह अंदर से अत्यंत प्रसन्न होती हुई सभी चीजें प्राप्त करने में कामयाब हो गई । जब वह सुख और मेहनत से रहने लगी तो उसके निष्ठुर भाग्य ने आकस्मिक ही उसके पति को छीन लिया । भक्तिन के सिर पर दुखों का पहाड टूट पडा । ससुराल वाले भक्तिन की दूसरी शादी करके वहाँ से निकालने की जुगत बैठाने लगे जिसका भक्तिन ने खुल कर विरोध किया और उनकी छाती पर ही बसे रहने का फरमान सुना दिया । भक्तिन ने अपनी बेटी का विवाह कर दिया लेकिन वह भी कुछ दिनों बाद विधवा हो गई । जेठोते भक्तिन की  बेटी का विवाह अपने साले के साथ करना चाहते थे इसके लिए भी भक्तिन व उसकी बेटी उनकी चाल का शिकार हो गई । गले पडे दामाद को घर जमाई बनाना भक्तिन का दुर्भाग्य ही था जिसके कारण भक्तिन को अनेक कष्ट हुए क्योंकि जमाई कुछ भी काम काज में हाथ ना बटाता था बल्कि उसे महाजन के कर्ज के दंड स्वरूप धूप में खडा रहना पडा जिस अपमान के चलते वह घर छोड कर लेखिका के पास काम की तलाश में पहुंचती है । भक्तिन लेखिका के चुल्हे चौके , लेखन, अध्यापन और तर्क शास्त्र के आधार पर सहयोग देने का साहस भी जुटा पाती थी । युद्ध के समय वह गाँव चलने का आग्रह करती है पाई पाई जोड़्कर एक सौ पाँच रूपये लेखिका को देकर वह गाँव देख आने के वादे के साथ जाती है लेकिन फिर कभी लौट नहीं पाई । लेखिका उसके संस्मरण रूप में उसे याद कर सच्ची श्रद्धांजलि देती है ।

11. बाजार दर्शन (जैनेंद्र कुमार)

सारांश : बाजार दर्शन पाठ में बाजारवाद और उपभोक्तावाद के साथ साथ अर्थनीति एवं दर्शन से संबंधित प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास किया गया है । बाजार का जादू तभी असर करता है जब मन खाली हो । बाजार के जादू को रोकने का उपाय यह है कि बाजार जाते समय मन खाली न हो ,मन में लक्ष्य भरा हो । बाजार की असली सार्थकता जरूरत के समय काम आना है । बाजार को वही लाभ दे सकता है जो वास्तव में अपनी आवश्यक्ताओं के अनुसार बाजार का उपयोग करता है । जो लोग अपने पैसों के घमंड में पर्चेजिंग पावर को दिखाने के लिए खरीददारी करते हैं वे वास्तव में आनंद नहीं दुख ही प्रदान करती हैं । इस पाठ में लेखक मन को नियंत्रण में करने और वास्तविकजीवन के जीने पर बल देता है । भगत जी का उदाहरण हमारे लिए मह्त्तवपूर्ण है तभी हम इस जगत में जीवन का सही अर्थ जान पायेंगे ।

12. काले मेघा पानी दे (धर्मवीर भारती)

सारांश :-‘काले मेघा पानी दे’ निबंध, लोकजीवन के विश्वास और विज्ञान के तर्क पर आधारित है । जब भीष्ण गर्मी के कारण व्याकुल लोग वर्षा कराने के लिए पूजा-पाठ और कथा विधान कर थक जाते हैं तब वर्षा कराने के लिए अंतिम उपाय के रूप में इंदर सेना निकलती है । इंदर सेना ,नंग-धडंग बच्चों की टोली है जो कीचड़ में लथपथ होकर गली मुहल्ले में पानी मांगने निकलती है । लोग अपने घरों की छतों खिडकियों से इन्दर सेना पर पानी डालते हैं । लोगों की मान्यता है कि इन्द्र, बादलों के स्वामी और वर्षा के देवता है । इंद्र की सेना पर पानी डालने से इंद्र भगवान पानी बरसायेंगे । लेखक का तर्क है कि जब पानी की इतनी कमी है तो लोग मुश्किल से जमा किए पानी को क्यों बर्बाद कर रहे हैं ? आर्य समाजी विचारधारा वाला लेखक इसे अंधविश्वास मानता है । इसके बिल्कुल उल्ट लेखक की जीजी इसे त्याग और दान से जोड कर देखती है । त्याग के बिना दान नहीं हो सकता । प्रस्तुत निबंध में लेखक ने भ्रष्टाचार की समस्या को उठाते हुए कहा है कि जीवन में कुछ पाने के लिए त्याग जरूरी है ।जो लोग त्याग और दान को नहीं मानते ,वे ही भ्रष्टाचार में लिप्त होकर देश और समाज को लूटते हैं । जीजी की अस्था, भावनात्मक सच्चाई को पुष्ट करती है और तर्क केवल वैज्ञानिक तथ्य को सत्य मानता है । जहाँ तर्क,यथार्थ के कठोर धरातल पर सच्चाई को परखता है तो वहीं आस्था, अनहोनी  बात को भी स्वीकारता है । भारत की स्वतंत्रता के पचास साल बाद भी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार और स्वार्थ की भावना को देखकर लेखक दुखी है । सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएँ गरीबों तक क्यों नहीं पहुंच रही ? काले मेघा के दल उमड रहे हैं पर आज भी गरीब की गगरी फूटी हुई क्यों है ? लेखक इसी प्रश्न के साथ मौन हो जाता है ।

13. पहलवान की ढोलक (फणीश्वरनाथ रेणु)

सार : आंचलिक कथाकार फ़णीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ में कहानी के मुख्य पात्र लुट्टन के माता-पिता का देहांत उसके बचपन में ही हो गया था । अनाथ लुट्टन को उसकी विधवा सास ने पाल पोसकर बडा किया । उसकी सास को गाँव वाले सताने लगे । लोगों से अपमान का बदला लेने के लिए कुश्ती के दाँव-पेंच सीखकर कसरत करके लुट्टन पहलवान बन गया । एक बार लुट्टन श्याम नगर मेले में गया जहां ढोल की आवाज और कुश्ती के दाँव-पेंच देखकर उसने जोश में आकर नामी पहलवान चाँद सिहँ को चुनौती दे दी । ढोल की आवाज से प्रेरणा पाकर लुट्टन ने दाँव लगाकर चाँद सिहँ को पट्ककर हरा दिया और राज पहलवान बन गया । उसकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई । पंद्रह वर्षों तक अजेय बना रहा । उसके दो पुत्र थे । लुट्टन ने दाँव पेंच अपने दोनों बेटो को भी सीखा दिए थे । राजा की मृत्यु के बाद नए राजकुमार ने लुट्टन का पूरा राज खर्च देख कर उसे दरवार से बाहर का रास्ता दिखा दिया । अब लुट्टन गाँव में ही अपने बेटों के साथ रहने लगा और गाँब के बच्चों को दाव पेच सीखाने लगा । महामारी के दिनों में भी लुट्टन सुबह शाम ढोल नगाडे‌ के साथ कुश्ती का अभ्यास करता था । यह ढोल को ही अपना गुरु मानता था । महामारी और अकाल से लड़ने का साहस वह इसी ढोल से लिया करता था ।  पहलवान ढोल बजा कर लोगों को बीमारी से लडने की हिम्मत बंधा रहा था जिस दिन पहलवान के दोनों लडके मृत्यु के शिकार हुए उस दिन भी वह ढोल बजा कर सभी का हौंसला बढा रहा था । इस कहानी में लुट्टन पहलवान की हिम्मत और जिजीविषा का वर्णन हुआ है । इस करुण त्रासदी में लुट्टन कई सवाल छोड़ जाता है कि कला का कोई स्वतंत्र अस्तित्व है या कला केवल व्यवस्था की मोहताज है ।

14. चार्ली चैप्लिन और हम सब (विष्णु खरे)

पाठ परिचय-  हास्य फ़िल्मों के महान अभिनेता ‘चार्ली चैप्लिन’ की जादुई  विशेषताओं का उल्लेख करता है जिसमें उसने करुणा और हास्य में सामंजस्य स्थापित कर फ़िल्मों को सार्वभौमिक रूप प्रदान किया। चार्ली ने कला में बुद्धि की अपेक्षा भावना को महत्त्व दिया है। बचपन के संघर्षों ने चार्ली के जीवन की पृष्ठभूमि तैयार की है। भारतीय कला और सौंदर्यशास्त्र में करूणा का हास्य में परिवर्तन भारतीय परम्परा में नहीं मिलता लेकिन चार्ली एक ऐसा जादूई व्यक्तित्व है जो हर देश, संस्कृति और सभ्यता को अपना सा लगता है। भारतीय जन मानस ने उन्हे मन से स्वीकार किया है। स्वयं पर हँसना चार्ली ने ही सिखाया है। भारतीय सीनेमा के प्रसिद्ध कलाकार राजकपूर को भारतीयकरण कहा जा सकता है। चार्ली की अधिकांश फिल्में मूक हैं इसलिए उन्हे मानवीय होना पडा ।

15 नमक  (रजिया सज्जाद जहीर)

पाठ परिचय- ‘नमक’ कहानी में भारत-पाकिस्तान विभाजन के पश्चात मानचित्र में सीमारेखा खिंच जाती है…जमीन बंट जाती है पर जनता की भावनाएं, उसका लगाव अपने मूल स्थान से बना रहता है भारत में रहने वाली सिख बीवी लाहौर को अपना वतन मानती है और भारतीय कस्टम अधिकारी, ढाका के नारियल पानी को याद्कर उसे सर्वश्रेष्ठ बताता है। दोनो देशों के नागरिकों के बीच मुहब्बत का नमकीन स्वाद आज भी कायम है। तभी सफ़िया भारत में रहने वाली अपनी मुंहबोली मां, सिख बीवी के लिए लाहौरी नमक लाने के लिए कस्टम और कानून की परवाह नहीं करती।

16 शिरीष के फूल (आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी)

पाठ परिचय-  शिरीष के फ़ूल नामक ललित निबंध में लेखक ने शिरीष के फ़ूल के माध्यम से मनुष्य की अजेय जिजीविषा, धैर्यशीलता और कर्तव्यनिष्ठ बने रहने के मानवीय मूल्य को  स्थापित किया है। शिरीष को अवधूत कहा गया है क्योंकि संन्यासी की भांति वह सुख-दुख की चिंता नहीं करता। गर्मी, लू, वर्षा और आंधी में भी अविचल खड़ा रहता है। निबंधकार ने शिरीष के फ़ूल के सौन्दर्य, महत्त्व और स्वरूप का वर्णन करते हुए विभिन्न सामाजिक विषयों पर रोचक टिप्पणी की है।

17 श्रम विभाजन और जाति प्रथा (डॉ. भीमराव आंबेडकर)

पाठ परिचय- श्रम-विभाजन और जातिप्रथा नामक पाठ में जाति आधारित श्रम विभाजन को अस्वाभाविक और मानवता विरोधी बताया गया है। यह सामाजिक भेदभाव को बढ़ाता है। प्रथा आधारित श्रम विभाजन में व्यक्ति की रुचि को महत्त्व नहीं दिया जाता।  आदर्श समाज की नींव समानता ,स्वतंत्रता पर टिकी रहती है। लेखक ने आदर्श समाज के निर्माण में लोकतंत्रात्मक विशेषताओं को बनाए रखने पर बल दिया है ।

पूरक पुस्तक वितान भाग -2

पाठ 1सिल्वर वैडिंग मनोहर श्याम जोशी

पाठ का सार- सिल्वर वेडिंग’ कहानी की रचना मनोहर श्याम जोशी ने की है |  इस पाठ के माध्यम से पीढ़ी के अंतराल का मार्मिक चित्रण किया गया है | आधुनिकता के दौर में, यशोधर बाबूपरंपरागत मूल्यों को हर हाल में जीवित रखना चाहते हैं| उनका उसूलपसंद होना दफ्तर एवम घर के लोगों के लिए सरदर्द बन गया था| यशोधर बाबू को दिल्ली में अपने पाँव जमाने में किशनदा ने मदद की थी, अतः वे उनके आदर्श बन गए|

दफ्तर में विवाह की पच्चीसवीं सालगिरह के दिन ,दफ्तर के कर्मचारी, मेनन और चड्ढा उनसे जलपान के लिए पैसे माँगते हैं | जो वे बड़े अनमने ढंग से देते हैं क्योंकि उन्हें फिजूलखर्ची पसंद नहीं | यशोधर बाबू के तीन बेटे हैं| बड़ा बेटा भूषण, विज्ञापन कम्पनी में काम करता है | दूसरा बेटा आई. ए. एस. की तैयारी कर रहा है और तीसरा छात्रवृति के साथ अमेरिका जा चुका है | बेटी भी डाक्टरी की पढ़ाईं के लिए अमेरिका जाना चाहती है, वह विवाह हेतु किसी भी वर को पसंद नहीं करती | यशोधर बाबूबच्चों की तरक्की से खुश हैं किंतु परंपरागत संस्कारों के कारण वे दुविधा में हैं | उनकी पत्नी ने स्वयं को बच्चों की सोच के साथ ढाल लिया है | आधुनिक न होते हुए भी, बच्चों के ज़ोर देने पर वे अधिक माडर्न  बन गई है|

बच्चे घर पर सिल्वर वेडिंग की पार्टी रखते हैं, जो यशोधर बाबू के उसूलों के खिलाफ था| उनका बेटा उन्हें ड्रेसिंग गाउन भेंट करता है तथा सुबह दूध लेने जाते समय उसे ही पहन कर जाने को कहता है, जो उन्हें अच्छा नहीं लगता | बेटे का ज़रूरत से ज़्यादा तनख्वाह पाना, तनख्वाह की रकम स्वयं खर्च करना, उनसे किसी भी बात पर सलाह न माँगना और दूध लाने का जिम्मा स्वयं न लेकर उन्हें ड्रेसिंग गाउन पहनकर दूध लेने जाने की बात कहना जैसी बातें, यशोधर बाबू को बुरी लगती है| जीवन के इस मोड़ पर वे स्वयं को अपने उसूलों के साथ अकेले पाते हैं |

पाठ 2   जूझ: (आनंद यादव)

पाठ का सार –‘जूझ’ पाठ आनंद यादव द्वारा रचित स्वयं के जीवन–संघर्ष की कहानी है| पढ़ाई पूरी न कर पाने के कारण, उसका मन उसे कचोटता रहता था | दादा ने अपने स्वार्थों के कारण उसकी पढ़ाई छुड़वा दी थी | वह जानता था कि दादा उसे पाठशाला नहीं भेजेंगे | आनंद जीवन में आगे बढ़ना चाहता था | वह जनता था कि खेती से कुछ मिलने वाला नहीं |वह पढ़ेगा-लिखेगा तो बढ़िया-सी नौकरी मिल जाएगी |

      आनंद ने एक योजना बनाई कि वह माँ को लेकर गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति दत्ता जी राव के पास जाएगा| दत्ता जी राव ने उनकी पूरी बात सुनी और दादा को उनके पास भेजने को कहा | दत्ता जी ने उसे खूब फटकारा, आनंद को भी बुलाया | दादा ने भी कुछ बातें रखीं कि आनंद को खेती के कार्य में मदद करनी होगी| आनंद ने उनकी सभी बातें सहर्ष मान लीं| आनंद की पढ़ाई शुरू हो गई| शुरु में कुछ शरारती बच्चों ने उसे तंग किया किन्तु धीरे-धीरे उसका मन लगने लगा| उसने कक्षा के मानीटर वसंत पाटिल से दोस्ती कर ली जिससे उसे ठीक प्रकार से पढ़ाई करने की प्रेरणा मिली| कई परेशानियों से जूझते हुए आनंद ने शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा| मराठी पढ़ाने के लिए श्री सौंदलगेकर आए| उन्होंने आनंद के हृदय में एक गहरी छाप छोड़ी| उसने भी कविताओं में रूचि लेनी प्रारम्भ की| उसने खेतों में काम करते –करते कविताएँ कंठस्थ की मास्टर ने उसकी कविता बड़े ध्यान से सुनी| बालक का आत्मविश्वास बढ़ने लगा और उसकी काव्य-प्रतिभा में निखार आने लगा|

पाठ 3  अतीत में दबे पाँव: (ओम थानवी)

पाठ का सार –यह ओम थानवी के यात्रा-वृत्तांत और रिपोर्ट का मिला-जुला रूप है|उन्होंने इस पाठ में विश्व के सबसे पुराने और नियोजित शहरों-मुअनजो-दड़ो तथा हड़प्पा का वर्णन किया है | पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुअनजो-दड़ो ओर पंजाब प्रांत में हड़प्पा नाम के दो नगरों को पुरातत्वविदों ने खुदाई के दौरान खोज निकाला था । मुअनजो-दड़ो ताम्रकाल का सबसे  बड़ा शहर था |मुअनजो-दड़ो अर्थात मुर्दों का टीला । यह नगर मानव निर्मित छोटे–छोटे टीलों पर बना था |मुअनजो-दड़ो में प्राचीन और बड़ा बौद्ध स्तूप है | इसकी नगर योजना अद्वितीय है| लेखक ने खंडहर  हो चुके टीलों, स्नानागार, मृद-भांडों, कुओं–तालाबों, मकानों व मार्गों का उल्लेख किया है जिनसे शहर की सुंदर नियोजन व्यवस्था का पता चलता है| बस्ती में घरों के दरवाजे मुख्य सड़क की ओर नहीं खुलते, हर घर में जल निकासी की व्यवस्था है, सभी नालियाँ की ढकी हुई हैं, पक्की ईंटों  का प्रयोग किया गया है|

नगर में चालीस फुट लम्बा ओर पच्चीस फुट चौड़ा एक महाकुंड भी है |इसकी दीवारें ओर तल पक्की ईंटों से बने हैं | कुंड के पास आठ स्नानागार हैं | कुंड में बाहर के अशुद्ध पानी को न आने देने का ध्यान रखा गया | कुंड में पानी की व्यवस्था के लिए कुंआ है | एक विशाल कोठारभी है जिसमें अनाज रखा जाता था | उन्नत खेती के भी निशान दिखते हैं -कपास, गेहूं, जौ, सरसों, बाजरा आदि के प्रमाण मिले हैं|

          सिंधु घाटी सभ्यता में न तो भव्य राजमहल मिलें हैं ओर ही भव्य मंदिर| नरेश के सर पर रखा मुकुट भी छोटा है| मुअनजो-दड़ो सिंधु घाटी का सबसे बड़ा नगर है फिर भी इसमें भव्यता व आडम्बर का अभाव रहा है| उस समय के लोगों ने कला ओर सुरुचि को महत्त्व दिया| नगर-नियोजन, धातु एवं पत्थर की मूर्तियाँ, मृद-भांड ,उन पर चित्रित मानव ओर अन्य आकृतियाँ ,मुहरें, उन पर बारीकी से की गई चित्रकारी| एक पुरातत्त्ववेत्ता के मुताबिक सिंधु सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो ”राजपोषित या  धर्मपोषित न होकर समाजपोषित था|

पाठ 4 : डायरी के पन्ने:  ऐन फ्रैंक

पाठ का सार – ‘डायरी के पन्ने’ पाठ में ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ नामक ऐन फ्रैंक की डायरी  के कुछ अंश दिए गए हैं| ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ ऐन फ्रैंक द्वारा दो साल अज्ञातवास के दरम्यान लिखी गई थी| 1933 में फ्रैंकफर्ट के नगरनिगम चुनाव में हिटलर की नाजी पार्टी जीत गई| तत्पश्चात यहूदी-विरोधी प्रदर्शन बढ़ने लगे| ऐन फ्रैंक का परिवार असुरक्षित महसूस करते हुए नीदरलैंड के एम्सटर्डम शहर में जा बसा |द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत तक 1939 तो सब ठीक था| परंतु 1940 में नीदरलैंड पर जर्मनी का कब्ज़ा हो गया ओर यहूदियों के उत्पीड़न का दौर शुरु हो गया| इन परिस्थितियों के कारण 1942 के जुलाई मास में फ्रैंक परिवारजिसमें माता-पिता,तेरह वर्ष की ऐन ,उसकी बड़ी बहन मार्गोट तथा दूसरा परिवार –वानदान परिवार ओर उनका बेटा पीटरतथा इनके साथ एक अन्य व्यक्ति मिस्टर डसेल दो साल तक गुप्त आवास में रहे| गुप्त आवास में इनकी सहायता उन कर्मचारियों ने की जो कभी मिस्टर फ्रैंक के दफ्तर में काम करते थे||‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ ऐन फ्रैंक द्वारा उस दो साल अज्ञातवास के दरम्यान लिखी गई थी|अज्ञातवास उनके पितामिस्टर ऑटो फ्रैंक का दफ्तर ही था| ऐन फ्रैंक को तेरहवें जन्मदिन पर एक डायरी उपहार में मिली थी ओर उसमें उसने अपनी एक गुड़िया-किट्टी को सम्बोधित किया है|

ऐन अज्ञातवास में पूरा दिन– पहेलियाँ बुझाती, अंग्रेज़ी व फ्रेंच बोलती, किताबों की समीक्षा करती, राजसी परिवारों की वंशावली देखती, सिनेमा ओर थिएटर की पत्रिका पढ़ती और उनमें से नायक-नायिकाओं के चित्र काटतेबिताती थी| वह मिसेज वानदान की हर कहानी को बार-बार सुनकर बोर हो जाती थी ओर मि. डसेल भी पुरानी बातें– घोड़ों की दौड़, लीक करती नावें, चार बरस की उम्र में तैर सकने वाले बच्चे आदि सुनाते रहते|

उसने युद्ध संबंधी जानकारी भी दी है- कैबिनेट मंत्री मि. बोल्के स्टीन ने लंदन से डच प्रसारण में यह घोषणा की थी कि युद्ध के बाद युद्ध के दौरान लिखी गईं डायरियों का संग्रह किया जाएगा, वायुयानों से तेज़ गोलाबारी, हज़ार गिल्डर के नोट अवैध घोषित किए गए | हिटलर के घायल सैनिकों में हिटलर से हाथ मिलाने का जोश , अराजकता का माहौल- कार, साईकिल की चोरी, घरों की खिड़की तोड़ कर चोरी, गलियों में लगी बिजली से चलने वाली घड़ियाँ, सार्वजनिक टेलीफोन चोरी कर लिए गए|

ऐन फ्रैंक ने नारी स्वतंत्रता को महत्त्व दिया,उसने नारी को एक सिपाही के बराबर सम्मान देने की बात कही|  एक तेरह वर्षीय किशोरी के मन की बेचैनी को भी व्यक्त किया- जैसे मि. डसेल की ड़ाँट-फटकार ओर उबाऊ भाषण, दूसरों की बातें सुनकर मिसेज फ्रैंक का उसेडाँटना ओर उस पर अविश्वास करना, बड़ों के द्वारा उसके काम ओर केशसज्जा पर टीका-टिप्पणी करना, सिनेमा की पत्रिका खरीदने पर फिज़ूलखर्ची का आरोप लगाना, पीटर द्वारा उसके प्रेम को उजागर न करना आदि|

ऐन फ्रैंक की डायरी के द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका, हिटलर एवं नाजियों द्वारा यहूदियों का उत्पीड़न, डर, भुखमरी, गरीबी, आतंक, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, घृणा, तेरह साल की उम्र के सपने, कल्पनाएँ, बाहरी दुनिया से अलग-थलग पड़ जाने की पीड़ा, मानसिक ओर शारीरिक जरूरतें, हँसी-मज़ाक, अकेलापन आदि का जीवंत रूप देखने को मिलता है |

                                                          1. कविता (आत्म-परिचय)

1.     ‘मैं जग जीवन का भार लिए………गान किया करता हूं ‘—विचार करे।

2.             कवि एक ओर तो जीवन का भार लिए फिरता है और दूसरी ओर प्यार –यह कैसे संभव है ?

3.             कवि के ह्रदय के तारों को किसने झंकृत कर दिया होगा? उससे उसके जीवन पर क्या प्रभाव पडा?

4.             कवि ने यह क्यों कहा होगा कि स्नेह सुरा का पान किया करता हूं?

5.             अपने मन का गान करने से कवि का क्या अर्थ है ?

6.             कवि ने यह क्यों– ” मैं फूट पडा ,तुम कहते छंद बनाना”।

7.             कवि संसार को क्या संदेश देना चाहता है ?

8.             जहां नादान वहां दाना भी रहते हैं —-का अर्थ बताओ।

9.             ‘ मै जग-जीवन का भार लिए फिरता हूं— अर्थ स्पष्ट करें।

एक गीत : दिन जल्दी जल्दी ढलता है

1. दिन जल्दी जल्दी ढलता है — का अर्थ स्पष्ट करें।

2. कविता में चिडिया, पथिक का उदाहरण क्यों दिया गया है । कवि अपने घर क्यों नहीं लौटना चाहता ?

2. पतंग

1. कविता में भादो का जो वर्णन मिलता है  उसका वर्णन अपने शब्दों मे कीजिए ।

2. ‘रोमांचित शरीर का संगीत’’ का जीवन की लय से क्या संबंध है ?

3. जन्म से ही वे अपने साथ लाते है कपास—कपास से बच्चों का क्या संबंध है ?

4 पतंग के साथ बच्चों के उडने का क्या संबंध है ? 

3. कविता के बहाने

1. कविता और चिड़िया के उडने में क्या अंतर है ?

2. कविता रचना और फूलों के खिलने का क्या संबंध बताया गया है ?

3. बिना मुरझाए कौन कहाँ महकता है ?

4 कविता की कौन कौन सी विशेषता बताई गई है ?

बात सीधी थी पर :

1.       ‘भाषा के चक्कर’ का तात्पर्य बताएँ ।

2.       कवि ने बात को पाने के चक्कर में क्या क्या किया ?

3.       कवि की क्या कमी थी ?

4.       कवि ने किस कार्य को करतब कहा है ?

5.       भाषा ने कवि से क्या पूछा ?

6.       जोर जबरदस्ती से क्या अभिप्राय है ?

4. कैमरे में बंद अपाहिज :

1. ‘हम दूरदर्शन पर बोलेंगे’ में आए ‘हम’ शब्द का अर्थ बताएँ ।

2. प्रश्न पूछने वाला अपने उद्देश्य में कितना सफल हो पाता है ?

3. प्रश्नकर्त्ता कैमरे वाले को क्या निर्देश देता है ?

4. दर्शकों की मानसिकता क्या है ?

5. कविता में आए शब्द’ सामाजिक उद्देश्य’ क्या है ?

5. सहर्ष स्वीकारा है :

1. कवि जीवन की प्रत्येक स्थिति को क्यों स्वीकारता है ?

2. गरीबी के लिए प्रयुक्त विशेषण का औचित्य बताएँ ।

3. पुनरुक्ति अलंकार के उदाहरण छांटिए तथा उनका प्रभाव बताएँ ।

4. कवि अपने दिल की तुलना किससे करता है और क्यों ?

5. कवि ने अपनी प्रेमिका की तुलना किससे की है और क्यों ?

6. कवि दंड क्यों पाना चाहता है और कहाँ जाना चाहता है ?

6. उषा :

1. आपने कभी अपने गाँव की सुबह देखी हो तो वर्णन करो ।

2. ‘अभी गीला पडा है’ से क्या अभिप्राय है ?

3. कवि काली सिल और लाल केसर के माध्यम से क्या कहना चाहता है ?

4. उषा का जादू कैसा है और कैसे टूटता है ?

7. बादल राग :

1. ‘अस्थिरसुख पर दुख की छाय’ क्यों कहा है ?

2. पृथ्वी में सोए हुए अंकुर किसे कहा गया है और क्यों ?

3. संसार के भयभीत होने का संदेश क्यों दिया गया है ?

4. गगन स्पर्शी स्पर्धाधीर कौन है ?

5. कविता में आए प्रतीकों का वर्णन करो ।

8. कवितावली :

1. पेट भरने के लिए लोग कौन कौन से अनैतिक कार्य कर रहे हैं –वर्तमान संदर्भ में बताएं ।

2. कवि ने समाज के किन किन वर्गों का वर्णन किया है ?

3. तुलसी के समाज की समस्याओं को आप आज भी देखते हैं उनका वर्णन करो ।

4. मानव की सभी जरूरतों की पूर्ति का साधन किसे बताया गया है ?

लक्ष्मण मूर्च्छा और राम का विलाप :

1.       हनुमान भरत की किस बात से प्रभावित हुए ?

2.       हनुमान के चरित्र की विशेषताएं बताइये ।

3.       राम ने लक्ष्मण की किन किन विशेषताओं का उल्लेख किया ?

4.       वे कौन कौन सी वस्तुएं हैं जो संसार में मानव पुनः प्राप्त कर सकता है ?

5.       करूणा रस में वीर रस की अनुभुति से क्या अर्थ है ?

6.       कुम्भकरण का नारी के प्रति कैसा दृष्टिकोण है ?

रूबाइयाँ :

1.       कवि ने चाँद का टुकडा किसे कहा है और क्यों ?

2.       बच्चे की हँसी का क्या कारण है ? आप पर बच्चे की हँसी का क्या असर होता है ।

3.       बच्चा कब अपनी माँ को प्यार से देखता है ?

4.       दीवाली जैसे त्योहारों का जीवन में क्या मह्त्त्व है ?

गजल :

1.       कवि ने गजल में किस ऋतु का वर्णन किया है ?

2.       नौरस विशेषण का अर्थ बताएँ ।

3.       ‘जर्राजर्रा सोए है’—का अर्थ स्पष्ट करें ।

4.       शब में कौन बोलता है ? क्या आपने कभी सुना है ?

5.       निंदाकरने वालो के बारे में क्या कहा गया है ?

छोटा मेरा खेत :

1.       कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है ?

2.       प्रतीकात्मकता को स्पष्ट करें ।

3.       ‘क्षण का बीज’ किसे कहा है ?

4.       कल्पना और चिंतन को किस प्रतीक द्वारा दिखाया गया है ?

बगुलों के पंख :

1.       कवि किस दृश्य पर मुग्ध है और क्यों ?

2.       ‘उसे कोई तनिक रोक रखो’ में कवि की किस मनोवृत्ति का पता चलता है ?

3.       कविता के मानवीकरण को स्पष्ट करें ।

पाठ= प्रथम ( भक्तिन)

निम्न महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को हल करों

1.लेखिका ने भक्तिन की तुलना हनुमान जी से क्यों की  ?

2.भक्तिन के नाम में क्या विरोधाभास था  ?

3.भक्तिन ने लेखिका से क्या आग्रह किया ?

4.लेखिका ने लक्ष्मी का क्या नामकरण किया और क्यों ?

5. विमाता ने लक्ष्मी को क्या संदेश भेजा ?

6. लक्ष्मी की सास ने उसके पिता का समाचार क्यों नहीं दिया ?

7 लक्ष्मी की सास ने उसे क्या कह कर विदा किया ?

8 लक्ष्मी ने अपनी व्यथा को कैसे प्रस्तुत किया ?

9 लक्ष्मी के जीवन के दूसरे परिच्छेद में (विवाह के बाद) क्या हुआ ?

10 लक्ष्मी के जीवन के दूसरे परिच्छेद में (विवाह के बाद) जीवन कैसा चला?

11जिठानियों के बच्चों की तुलना काकभुसुंडी से क्यों की है?

12 लक्ष्मी कौन सी लीक छोडकर चली जिसके कारण उसे सास का दंड भोगना पडा ?

13. लक्ष्मी का दुर्भाग्य भी कम हठी नहीं था ऐसा लेखिका ने क्यों कहा है?

14 जिठोतो को कौन सी आशा की किरण दिखाई दी ?

15 जिठौत ने क्या षड्यंत्र रचा ?

16 मां बेटी ने उनके षड्यंत्र को कैसे विफल किया ?

17 भक्तिन के जीवन के चार परिच्छेद कौन से थे ?

पाठ= 2 (बाजार दर्शन)

1.मन खाली और जेब भरी होने से लेखक का क्या आशय है ?

2.आज-कल बाजारों मे फैंसी चीजो की भरमार है, इससे क्या लाभ- हाँनियां है?

3 भगत जी का उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए कि सभी पर बाजार का  जादू नहीं चलता ?

4 मनुष्य की धन पर विजय जड की चेतन पर विजय कैसे है ?

5 ‘बाजार दर्शन’ पाठ में लेखक ने किस बाजार को मानव की विडम्बना कहा है?

6. पाठ के आधार पर बताएं की किन लोगों के आगे पैसे की व्यंग्य शक्ति चूर-चूर हो जाती है ?

पाठ=3 ( काले मेघा पानी दे)

1.             काले मेघा पानी दे पाठ का मूल उद्देश्य स्पष्ट करें ?

2.             इंदर सेना का कार्य-कलाप लेखक को अंधविश्वास क्यों लगा ?

3.             जीजी ने लेखक को समझाने के लिए क्या-क्या तर्क दिए?

4.             त्याग के बिना दान नही होत— पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए?

5.             पानी संकट की वर्तमान स्थिति पर विचार करो ।

पाठ=4 (पहलवान की ढोलक)

1.            कुश्ती के समय ढोल की आवाज और लुट्टन के दांव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्दों को सुन कर आपके मन पर क्या प्रभाव पडता है?

2.             गांव में महामारी फैलने और बेटों की मौत के बाद भी लुट्टन ढोल क्यों बजाता था ?

3.             ढोलक की आवाज का पूरे गांव पर क्या असर पडता था?

4.             महामारी फैलने के बाद गांव में सूर्योदय और सूर्यास्त के द्श्य का वर्णन करो ?

5.             रात्रि में पहलवान की ढोलक किसे ललकारती थी ?

6.             लुट्टन ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरू कोई और नहीं ये ढोलक ही है ।

पाठ=5 चार्ली चेप्लिन यानि हम सब

1.             लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा कि चार्ली पर अभी 50 वर्षो तक काफी कुछ कहा जायेगा?

2.            चेप्लिन ने न केवल फिल्मों को लोकतांत्रिक बनाया बल्कि वर्ण व्यवस्था को भी तोडा —- इसका अर्थ स्पष्ट करें।

3.             लेखक ने चार्ली का भारतीयकरण किसे कहा है और क्यों गांधी व नेहरू समीपता चाहते थे?

4.             जीवन की जिद्दोजहद ने किस प्रकार चार्ली के जीवन का निर्माण किया है ?

5.             चार्ली सबसे ज्यादा स्वयं पर कब हंसता है ?

पाठ=6 नमक

1. नमक कहानी में हिंदुस्तान पाकिस्तान में रहने वाले लोगो की भावनाओं,संवेदनाओं से उभारा गया है कैसे?

2. विभाजन के अनेक स्वरूपो में बंटी जनता को मिलाने की अनेक भूमियां हो सकती है —क्या विभाजन से दिलो का विभाजन हो जाता है ?

3. ‘किसका वतन कहां है—वह जो कस्टम के इस तरफ है या उस तरफ़’— आशय स्पष्ट करें?

पाठ=7 शिरीष के फूल

1.             लेखक ने शिरीष के फूल को कालजयी अवधूत क्यों कहा है?

2. हृदय की कोमलता बचानेकेलिए कभी कभी व्यवहार की कठोरता भी आवश्यक हो जाती है —स्पष्ट करें।

3. द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल व संघर्ष से भरी जिंदगी में जिजीविषु बने रहने की सीख कैसे दी है?

4. हाय ! वह अवधूत आज कहां— कह कर किस महापुरूष की और संकेत किया है ?

पाठ=8 (क) श्रम-विभाजन और जाति प्रथा

1. जाति के अनुसार काम करने से क्या हानियां हुई ? समाज में काम करने की स्वतंत्रता के क्या लाभ है ?

2. भारतीय समाज के पिछडने के क्या कारण थे?

3. समाज के विकास में भाईचारा व सहयोग से क्या लाभ होते हैं ?

4.इस पाठ के आधार पर मनुष्य की कौन कौन सी क्षमता पर विचार किया है?

(ख)  आदर्श समाज

1.डॉ. अंबेदकर ने जिस आदर्श समाज की संकल्पना की है। उस पर लेख लिखिए।

2. लेखक ने समाज की किन-किन समस्याओं पर विचार किया है ?

3. समानत और स्वतंत्रता पर विचार दीजिए?

॥ सहायक सामग्री ।।

हिंदी (केंद्रिक) सत्र 2019-20

अपठित गद्य/पद्य निर्धारित अंक:16

(गद्यांश के लिए 12  और काव्यांश के लिए 4 अंक निर्धारित)

मुख्य ध्यान देनें योग्य बातें :-

·      अपठित गद्य या पद्य के प्रश्नों के उत्तर 1 या 2 अंकों के होते हैं जिन्हे कम से कम दो बार पढना चाहिए ।

·      प्रश्नों के उत्तर देते समय सरलतम प्रश्नों का चुनाव पहले करें ।

·      प्रश्नों को सावधानी से पढ़कर समझना अति अनिवार्य है उत्तर देते समय ज्यादा विस्तार न करें ।

·      आपकी भाषा सरल और सहज होनी चाहिए ताकि उलझन पैदा न हो ।

·      व्याकरण सम्मत भाषा का प्रयोग करने का प्रयास करना चाहिए ।

·      कथ्य में जिस विषय को बार बार उठाया गया हो उसी से संबंधित शीर्षक होना चाहिए ।

निम्न उदाहरण देखिए :-

सुव्यवस्थित समाज का अनुसरण करना अनुशासन कहलाता है। व्यक्ति के जीवन में अनुशासन का बहुत महत्तव है। अनुशासन के बिना मनुष्य अपने चरित्र का निर्माण नहीं कर सकता तथा चरित्रहीन व्यक्ति सभ्य-समाज का निर्माण नहीं कर सकता। अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए भी मनुष्य को अनुशासनबद्ध होना अति अनिवार्य है। विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भावी जीवन की आधारशीला होता है, अतः विद्यार्थियों के लिए अनुशासन में रह कर जीवन यापन करना अत्यंत आवश्यक है।

वर्तमान समाज में सर्वत्र अव्यवस्था का साम्राज्य फैला हुआ है। विद्यार्थी, राजनेता, सरकारी कर्मचारी, श्रमिक आदि सभी स्वयं को स्वतंत्र भारत का नागरिक मानकर मनमानी कर रहे है। शासन में व्याप्त अस्थिरता समाज के अनुशासन को भी प्रभावित कर रही है। यदि किसी को अनुशासन में रहने के लिए कहा जाए तो वह ‘शासन का अनुशरण’ करने की बात कहकर अपनी अनुशासनहीनता पर पर्दा डालने का प्रयास करता है। वास्तव में अनुशासन शब्द का अर्थ अपने पर नियंत्रण ही है। विद्यार्थी जीवन में अबोधता के कारण उन्हे भले बुरे की पहचान नहीं होती। ऐसी स्थिति में थोडी सी असावधानी उन्हे अनुशासनहीन बना देती है। आजकल विद्यार्थियों की पढाई में रूचि नहीं है। वे आधुनिक शिक्षा पद्धति को बेकारों की सेना तैयार करने वाली नीति मान कर इसके प्रति उदासीन हो गए है तथा फैशन, सुख-सुविधापूर्ण जीवन जीने के लिए गलत रास्तों पर चलने लगे हैं। वर्तमान जीवन में व्याप्त राजनीतिक दलबंदी भी विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता को प्रोत्साहित करती है। राजनीतिक नेता अपने स्वार्थ के लिए विद्यार्थियों को भडका देते है तथा विद्यार्थी वर्ग भले–बुरे की चिंता किए बिना तोड-फोड मे लग जाता है।

आधुनिक युग में अति व्यस्त जीवन पद्धति के कारण माता पिता अपनी संतान का पूरा ध्यान नहीं रख पाते। चार-पांच घंटे कॉलेज में रहने वाला विद्यार्थी उन्नीस बीस घंटे तो अपने परिवारजनों के साथ ही रहता है। पारिवारिक परिवेश का उस पर बहुत प्रभाव पडता है। यदि उसके माता-पिता अनुशासित जीवन नहीं जीते तो उसे भी उच्छृख्ल जीवन जीना पडता है। वे माता पिता जो अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते उनके बच्चों में भी समय पाबंदी और मूल्यों को लेकर संदेह बना रहता है तथा बच्चे भी शिक्षा की तरफ ध्यान नहीं दे पाते। विद्यार्थियों में अनुशासन बनाएं रखने के लिए विशेष योजना चलानी चाहिए ताकि उनमें नैतिक व चारित्रिक उत्थान को बढाया जा सके। इस प्रकार के प्रोत्साहनों से उन्हे अपने कर्त्तव्य का बोध कराया जा सकता है। अतः हम कह सकते है कि अनुशासन से ही विद्यार्थियों के साथ साथ राष्ट्र को ऊंचा उठाया जा सकता है। इससे उसका स्वभाव व सद्वृत्तियों को ऊंचा उठाया जा सकता है। ऐसा विद्यार्थी समाज और राष्ट्र का नाम करता है। उसमें सद्गुण और कर्मठता के गुण आते है। परिश्रम और कर्त्तव्य के द्वारा वह देश सेवा करता है।      

(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।                                       1

(ख) अनुशासन से क्या अभिप्राय है ?                                        2

(ग) मानव जीवन में अनुशासन का क्या महत्त्व है ?                        1

(घ) मानव जीवन के विकास हेतु क्या आवश्यक है?                             2

(ङ) वर्तमान समाज में किस प्रकार की स्थिति होनी चाहिए ?                       1

(च) आजकल विद्यार्थी पढाई के प्रति उदासीन क्यों है?                      1

(छ) आजकल माता-पिता अपनी संतान के प्रति ध्यान क्यों नहीं देपा रहे है?       1

(ज) कौन से अध्यापक कक्षा में इधर उधर की बाते करते है?                 1

(झ) माता पिता का बच्चों के प्रति क्या कर्त्तव्य होना चाहिए ?                  1

(ञ) ‘सद्गुण’ तथा ‘कर्मठ’ शब्दों के वाक्य बनाइये।                         1

(ट) ‘परिश्रमी’ तथा ‘उच्छृंखल’ ’शब्दों के दो-दो पर्यायवाची बनाए।                   2         

(ठ) कुमार्ग तथा सत्संगति शब्दों के विलोम लिखिए।                        1

उत्तर :-

(क) जीवन में अनुशासन का महत्तव

   (क)  अपने पर नियंत्रण ।

   (ख)  इससे जीवन में निखार आता है ।

   (ग)  अनुशासन की पालना ।

   (घ)  अनुशासन प्रिय

   (ङ)  सामाजिक, घरेलु और आस पास की परिस्थितियां राह नहीं दिखा रही ।

   (च)  कामकाज और व्यस्तता के कारण ।

   (छ)  जो अनुशासन के अंतर्गत नहीं चलते ।

   (ज)  उनको सही दिशा और मार्गदर्शन देना चाहिए ।

   (ठ) सद्मार्ग, कुसंगति

प्रश्न 2 काव्यांश का उदाहरण-                                           अंक 5

थे कर्मवीर कि मृत्यु का भी ध्यान कुछ धरते न थे,

थे युद्धवीर कि काल से भी हम कभी डरते न थे।

थे दानवीर कि देह का भी लोभ हम करते न थे,

थे कर्मवीर कि प्राण के भी मोह पर मरते न थे,

थे भीम तुल्य महाबली अर्जुन समान महारथी,

श्रीकृष्ण लीलमय हुए थे, आप जिनके सारथी।

उपदेश गीता का हमारा युद्ध का ही गीत है,

जीवन समर में भी जनों को जो दिलाता जीत है॥

हम थे धनुर्वेदक जैसे और वैसा कौन था ?

जो शब्दबेधी बाण छोडे शूर ऐसा कौन था ?

हां मत्स्य जैसे लक्ष्य बेधक धीर धन्वी थे यहाँ

रिपु को गिराकर अस्त्र पीछे लौट आते थे वहाँ ॥

वह सामरिक सिद्धांत भी औदार्यपूर्ण पवित्र था,

थी युद्ध में ही शत्रुता, अन्यत्र वैरी मित्र था।

जय लोभ में भी छल कपट आने न पाता पास था,

प्रतिपक्षियों को भी हमारे साथ का विश्वास था।

(क) अंतिम दो पंक्तियों के माध्यम से कवि ने पूर्वजों की कौन सी विशेषता बताई है?

(ख) हमारे पूर्वजों को किनके समान श्रेष्ठ बताया है?

(ग) गीता का उपदेश क्या है ?

(घ)  हमारे पूर्वजों के सामरिक सिद्धांत कौन से थे ?

 (ड) कर्मवीर कौन थे और कैसे ?                                              1X5=5

उत्तर :-

(क)     वे छल कपट और मोह से मुक्त रहते थे ।

(ख)    अर्जुन और भीम के समान ।

(ग)      कर्म का उपदेश (युद्ध करना पुण्य) ।

(घ)     युद्ध भूमि में ही शत्रु अन्यत्र मित्र का भाव ।

(ङ)    हमारे पूर्वज, कर्म करना और उन्हे महत्त्व देना ।

अथवा

तुम भारत, हम भारतीय हैं, तुम माता, हम बेटे हैं ,

किसकी हिम्मत है कि तुम्हे दुष्टता दृष्टि से देखे ।

ओ माता , तुम एक अरब से अधिक भुजाओं वाली,

सबकी रक्षा में तुम सक्षम, हो अदम्य बलशाली ।

भाषा, वेश, प्रदेश भिन्न है, फिर भी भाई- भाई ,

भारत की सांझी संस्कृति में पलते भारतवासी ।

सुदिनों में हम एक साथ हँसते, गाते, सोते हैं,

दुर्दिन में भी साथ साथ जगते, पौरूष धोते हैं ।

तुम हो शस्य श्यामला, खेतों में तुम लहराती हो ,

प्रकृति प्राणमयी, साम गानमयी, तुम न किसे भाती हो ।

तुम न अगर होती तो धरती वसुधा क्यों कहलाती ?

गंगा कहाँ बहा करती, गीता क्यों गाई जाती ?

प्रश्न :-

(क)     सांझी संस्कृति का क्या भाव है ?

(ख)      भारत को अदम्य बलशाली क्यों कहा गया है ?

(ग)      सुख-दुःख के दिनों में भारतीयों का परस्पर सहयोग कैसा होता है ?

(घ)      साम गानमयी का क्या तात्पर्य है ?

(ङ)      “ओ माता”, तुम एक अरब से अधिक भुजाओं वाली’ में कौन सा अलंकार है ?

उत्तर :-

(क)    भाषा, वेश, प्रदेश भिन्न होते हुए भी सभी के सुख-दुख एक हैं ।

(ख)    भारत की एक अरब से अधिक जनसंख्या भारत माता की मजबूत भुजाएँ हैं ।

(ग)     भारतीयों का सुख दुख में भी मिल जुलकर रहने का भाव उत्तम है ।

(घ)     सुमधुर संगीत से युक्त ।

(ङ)    रूपक अलंकार ।

प्रश्न 3 निबंध लेखन                                            अंक=5

ध्यान देनें योग्य बातें :-

·         दिए गए विषयों को ध्यान से पढे और विचार करें कि कौन से विषय पर आप ज्यादा प्रभावी ज्ञान, उदाहरण और विचार कर सकते हैं ।

·         किसी भी निबंध की भूमिका, विस्तार और उपसंहार लिखना ही चाहिए ।

·         पुनरावृत्ति दोष से बचे ।

·         भाषा सरल ,सहज और बोध प्रधान हो। एक बात को बार-बार न दोहराएँ ।

निबंध हेतु नमूना :

विज्ञान : वरदान या अभिशाप

(क)     भूमिका

(ख)     विज्ञान वरदान है (पक्ष में)

·         शिक्षा के क्षेत्र में

·         चिकित्सा के क्षेत्र में

·         मनोरंजन के क्षेत्र में

·         कृषि के क्षेत्र में

·         यातायात के क्षेत्र में

(ग) विज्ञान अभिशाप (विपक्ष में )

·         शिक्षा के क्षेत्र में

·         चिकित्सा के क्षेत्र में

·         मनोरंजन के क्षेत्र में

·         कृषि के क्षेत्र में

·         यातायात के क्षेत्र में

(घ). विज्ञान के प्रति हमारे दायित्व

(ड.) उपसंहार

(उपरोक्त बिंदुओं को विद्यार्थी अपने अध्यापकों की सहायता से बढा भी सकते हैं )

विद्यार्थियों के अभ्यास हेतु महत्त्वपूर्ण निबंधों की सूचि :-

1.  भारत और विश्व                2.  महानगरीय जीवन :अभिशाप या वरदान        

3. बदलते जीवन मूल्य           4.  भारत और नई सदी      5.  कामकाजी महिलाएँ और उनकी समस्याएँ       

6. राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका   7.  खेल-कूद का जीवन में मह्त्तव              

8. पराधीन सपनेहूँ सुख नाहीं     9.  विज्ञापनों का लुभावना संसार     10। नारी का समाज में स्थान

11.इंटरनेट की दुनिया          12. पर्यावरण और हमारा दायित्व

प्रश्न 4 : पत्र लेखन :-

विचारों, भावों, संदेशों एवं सूचनाओं के संप्रेषण के लिए पत्र सहज, सरल तथा पारंपरिक माध्यम है । पत्र अनेक प्रकार के हो सकते हैं, पर प्रायः परीक्षाओं में शिकायती पत्र, आवेदन पत्र तथा संपादक के नाम पत्र पूछे जाते हैं । इन पत्रों को लिखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए ।

·         पता और दिनांक- पत्र के ऊपर बाईं ओर प्रेषक का पता व दिनांक लिखा जाता है (छात्र पते के लिए परीक्षा भवन भी लिखते हैं)

·         संबोधन और पता- जिसको पत्र लिखा जा रहा है उसको यथानुरूप संबोधित किया जाता है , औपचारिक पत्रों में पद ,नाम और कार्यालयी पता रहता है ।

·         विषय- केवल औपचारिक पत्रों में प्रयोग करें (पत्र के कथ्य का संक्षिप्त रूप, जिसे पढ़ कर पत्र की सामग्री का संकेत मिल जाता है )

·          पत्र की सामग्री- यह पत्र का मूल विषय है, इसे संक्षेप में सारगर्भित और विषय के स्पष्टीकरण के साथ लिखा जाए ।

·         पत्र की समाप्ति- इसमें धन्यवाद,आभार, साभार सहित जैसे शब्दों को लिखा जाता है इसके बाद लेखक अपना नाम व पता हस्ताक्षर सहित देता है ।

·         विशेष सूचना :- विद्यार्थी बोर्ड की परीक्षा में कहीं भी अपना नाम व पता न दें जो पत्र में प्रस्तुत हुआ है केवल वही नाम पता देना होता है । जानबूझ कर अपना सही पता नाम देना परीक्षा नियमों का उल्लंघन है ।

·         पत्र का नमूना

समाचार पत्र के संपादक को ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’ के समाचार को प्रकाशित करने हेतु अनुरोध पत्र लिखो

परीक्षा भवन,

……………

दिनांक:-…………

प्रतिष्ठा में,

संपादक महोदय,

दैनिक…………,

क.ख.ग

विषय :- विद्यालय में आयोजित ‘स्वच्छ विद्यालय अभियान’ की सूचना हेतु ।

श्रीमान/श्रीमती जी,

मैं आपके समाचार पत्र…….का नियमित पाठक हूँ । आपके समाचार पत्र में देश विदेश के साथ साथ क्षेत्रीय समाचारों को भी बाखूबी प्रकाशित करते हो । मैं केंद्रीय विद्यालय क्र-1 का छात्र हूँ । मेरे विद्यालय में कल प्राचार्य श्री …. सिहँ जी के नेतृत्व में स्वच्छ विद्यालय अभियान चलाया गया जिसमें सभी शिक्षकों एवं बच्चों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया । सभी कक्षाओं, बरामदों , प्रयोगशालाओं व बगीचों की सफाई की गई । प्राचार्य महोद्य ने अभियान का निरीक्षण भी किया व सफाई के महत्त्व को बच्चों के सामने प्रस्तुत किया गया । इस गतिविधि की फोटो भी आपको भेज रहा हूँ मुझे उम्मीद है कि आप इसे अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करोगे जिससे अन्य लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूकता मिले ।

धन्यवाद सहित

भवदीय

क.ख.ग.

अभ्यासार्थ पत्र  :-

1.  किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक के नाम पत्र लिखिए जिसमें वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया हो ।

2.  हिंसा प्रधान फिल्मों को देखकर बाल वर्ग पर पडने वाले दुष्प्रभावों का वर्णन करते हुए किसी दैनिक समाचार पत्र के नाम पत्र लिखो ।

3.  अनियमित डाक वितरण की शिकायत करते हुए पोस्टमास्टर को पत्र लिखो ।

4.  लिपिक पद हेतु विद्यालय के प्राचार्य को आवेदन पत्र लिखें।

5.  अपने क्षेत्र में बिजली संकट से उत्पन्न कठिनाइयों का वर्णन करते हुए अधिशासी अभियंता विद्युत बोर्ड को पत्र लिखिए ।

6.  भारतीय युवाओं में क्रिकेट के प्रति अत्याधिक लगाव की चर्चा करते हुए अन्य खेलों के प्रति उदासीनता पर किसी समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखो ।

7.  दूरदर्शन केंद्र के निदेशक को प्रायोजित कार्यक्रमों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए पत्र लिखो।

8.  किसी दुर्घटना के साक्षी/दर्शक उस घटना के प्रति उदासीन रहते हैं कोई सहायता नहीं करते इस विषय पर संपादक को पत्र लिखो ।

9.  महिलाओं के प्रति बढ रहे अपराधों के कारणों का उल्लेख करते हुए संपादक को पत्र लिखो ।

10. अपने क्षेत्र की कानून व्यवस्था की बिगडती हालत पर खेद व्यक्त करते हुए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखो ।

जनसंचार माध्यम

1.  प्र. संचार किसे कहते हैं ?

उत्तर :’संचार’ शब्द चर्‍ धातु के साथ सम्‍ उपसर्ग जोडने से बना है—जिसका अर्थ है चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना । संचार संदेशों का आदान प्रदान है । सूचनाओं,विचारों और भावनाओं का लिखित, मौखिक या दृश्य-श्रव्य माध्यमों के जरिए सफलतापूर्वक आदान-प्रदान करना या एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना संचार है ।

2.  प्र. संचार माध्यम से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : संचार प्रक्रिया को सम्पन्न करने में सहयोगी तरीके तथा उपकरण संचार के माध्यम कहलाते हैं ।

3.  प्र संचार के मूल तत्व लिखिए ?

उत्तर : * संचारक या स्रोत

·             एंकोडिंग (कूटीकरण)

·             संदेश (जिसे संचारक प्राप्त कर्ता तक पहुँचाना चाहता है)

·            माध्यम (संदेश को प्राप्त कर्ता तक पहुँचाने वाला माध्यम होता है जैसे ध्वनि तरंगे, तरंगे, टेलिफोन,समचार पत्र, रेडियो, टी.वी. आदि ।

·            प्राप्तकर्त्ता (डिकोडिंग कर संदेश को प्राप्त करने वाला)

·            फीडबैक (संचार प्रक्रिया में प्राप्तकर्ता की प्रतिक्रिया)

·            शोर (संचार प्रक्रिया में आने वाली वाधा)

4.  प्र. संचार के प्रमुख प्रकारों का उल्लेख कीजिए ।

उत्तर : * सांकेतिक संचार        * मौखिक संचार

·             अमौखिक संचार       * अंतर्वैयक्तिक संचार

·             समूह संचार          * जनसंचा

5.  प्र. जनसंचार से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : प्रत्यक्ष संवाद की बजाय किसी तकनीकि या यांत्रिक माध्यम के द्वारा समाज के एक विशालवर्ग़ से संवाद कायम करना जनसंचार कहलाता है ।

6.  प्र. जनसंचार के प्रमुख माध्यमों का उल्लेख कीजिए ।

उत्तर : समाचार पत्र , रेडियो, इंटरनेट, टी.वी. सीनेमा आदि ।

7.  प्र. जनसंचार की विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर 1. इसमें फीडबैक तुरंत प्राप्त नहीं होता ।

2. इसके संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है ।

3 संचारक और प्राप्तकर्त्ता के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता ।

4 जनसंचार के लिए एक औपचारिक संगठन की आवश्यक्ता होती है ।

5 इसमें ढेर सारे द्वारपाल काम करते हैं ।

8.  प्र. जनसंचार के प्रमुख कार्य कौन कौन से हैं ?

उत्तर : 1 सूचना देना 2. शिक्षित करना 3 मनोरंजन करना 4 निगरानी करना 5 एजेंडा तय करना 6 विचार विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना ।

9.  प्र.लाइव से क्या अभिप्राय: है ?

उतर : किसी घटना का घटना स्थलसे सीधा प्रसारण लाइव कहलाता है ।

10.प्र. भारत का पहला समाचार वाहक किसे माना जाता है ?

उत्तर : देवऋषि नारद

11.प्र. जनसंचार का सबसे पहला मह्त्त्वपूर्ण एवं विस्तृत माध्यम कौन सा था ?

उत्तर : समाचार पत्र एवं पत्रिका

12.प्र. प्रिंट मिडिया के तीन प्रमुख पहलु कौन कौन से हैं ?

उत्तर : समाचारों को संकलित करना , संपादन करना , मुद्रण तथा प्रसारण ।

13.प्र. समाचारों को संकलित करने का कार्य कौन करता है ?

उत्तर : संवाददाता

14.प्र.भारत में पत्रकारिता की शुरुआत कब और किससे हुई ?

उत्तर : भारत में पत्रकारिता की शुरुआत सन्‍ 1780 में जेम्स ऑगस्ट हिकी के बंगाल गजट से हुई जो कलकता से प्रकाशित हुआ ।

15.प्र. हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र किसे माना जाता है ?

उत्तर : उदंत मार्तंड, संपादक जुगल किशोर शुक्ल ।

16.प्र. आजादी से पहले कौन कौन प्रमुख पत्रकार हुए ?

उत्तर: महात्मा गाँधी, लोकमान्य तिलक, मदना मोहन मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी, माखनलाल चतुर्वेदी ।

17.प्र. आजादी से पूर्व समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं के नाम लिखो ।

उत्तर : केसरी, हिंदुस्तान, सरस्वती, हंस, कर्मवीर, आज, प्रताप,प्रदीप, विशाल भारत आदि

18.प्र. आजादी के बाद की प्रमुख पत्र एवं पत्रिकाओं के नाम लिखो ।

उत्तर- प्रमुख पत्र– नव भारत टाइम्स, जनसत्त, नई दुनिया, हिंदुस्तान, अमर उजाला दैनिक भास्कर

पत्रिकाएँ:- धर्मयुग,साप्ताहिक हिंदुस्तान, दिनमान, रविवार, इंडियाटुडे, आउटलुक

पत्रकार :- अज्ञेय, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, मनोहर श्याम जोशी, राजेंद्र माथुर ।

19.प्र. पत्रकारिता क्या है ?

उत्तर: ऐसी सूचनाओं का संकलन एवं संपादन कर आम पाठकों तक पहुँचान, जिनमें अधिक से अधिक लोगों की रूचि हो तथा जो अधिक से अधिक लोगों को प्रभावित करती हो , पत्रकारिता कहलाती है ।

20.प्र. पत्रकारीय लेखन तथा साहित्यिक सृजनात्मक लेखन में क्या अंतर है ?

उत्तर : पत्रकारीय लेखन का मूल उद्देश्य सूचना प्रदान करना होता है , इसमें तथ्यों की प्रधानता होती है जबकि साहित्यिक सृजनत्मक लेखन भाव,कल्पना और सौंदर्य प्रधान होता है ।

21.प्र. पत्रकारिता के प्रमुख आयाम कौन कौन से होते है ?

उत्तर : संपादकीय,फोटो पत्रकारिता, कार्टून कोना, रेखांकन, कार्टोग्राफ ।

22.प्र. समाचार किसे कहते हैं ?

उत्तर :जो घटना, सूचना अधिक से अधिक लोगों को प्रभावित करे ।

23.समाचार के तत्वों का उल्लेख करें ।

उत्तर : नवीनता, निकटता, प्रभाव, जनरूचि, उपयोगी, निष्कपटता ।

24.प्र. डेड लाइन से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : समाचार माध्यमों के लिए समाचारों को प्रकाशित करने के निर्धारित समय को डेड लाइन कहते है ।

25.प्र. संपादन से आप क्या समझते हो ?

उत्तर : प्रकाशन के लिए प्राप्त सामग्री से उसकी अशुद्धियाँ दूर कर पठनीय और प्रकाशन योग्य बनाना संपादन कहलाता है ।

26.प्र.संपादकीय क्या है ?

उतर : संपादक द्वारा किसी प्रमुख घटना या समस्या पर दिए गए विचारात्मक लेख को, जिसे संबंधित समाचार पत्र की राय भी कहा जाता है, उसे संपादकीय कहते हैं ।

27.प्र. पत्रकारिता के प्रमुख प्रकारों का वर्णन करें ।

उत्तर : * खोजी पत्रकारिता

·         विशेषीकृत पत्रकारिता

·         वॉचडॉग पत्रकारिता

·         एड्वोकेसी पत्रकारिता

·         पीत पत्रकारिता

·         पेज थ्री पत्रकारिता

28.प्र. खोजी पत्रकारिता क्या है ?

उत्तर : जिसमें आमतौर पर सार्वजनिक महत्त्व के मामले, जैसे भ्रष्टाचार, घपले घोटाले, अनियमितताएँ और गडबडियों को सामने लाया जाता है ।

29.वाचडॉग पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर : सरकारी कामकाज पर पैनी नजर रखते हुए गडबडियों के संबंध में पत्रकारिता करना ।

30.एडवोकेसी पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर : किसी खास मुद्दे या विचारधारा पर जनमत तैयार करने की मुहीम के लिए की गई पत्रकारिता एडवोकेसी पत्रकारिता कहलाती है ।

31.प्र.पीत पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर : पाठकों को लुभाने के लिए झूठी अफवाहों, प्रेम संबंधों, आरोपों प्रत्यारोपों आदि से जुडी सनसनी खेज समाचारों को पीत पत्रकारिता कहते हैं ।

32.पेज थ्री पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर : ऐसी पत्रकारिता जिसमें फैशन, अमीरों की पार्टियों, महफिल और जाने माने लोगों के निजी जीवन को उजागर किया जाए ।

33.प्र. विशेषीकृत पत्रकारिता क्या है ?

उत्तर : किसी विशेष क्षेत्र की जानकारी देते हुए उसका विश्लेषण करना विशेषीकृत पत्रकारिता है ।

34.प्र. वैकल्पिक पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर : मुख्य धारा की मीडिया के विरुद्ध जो मीडिया स्थापित व्यवस्था के विकल्प को सामने लाकर अनुकूल सोच को अभिव्यक्त करता है उसे वैकल्पिक पत्रकारिता कहा जाता है ।

35.विशेषीकृत पत्रकारिता के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख करो ।

उत्तर : * संसदीय पत्रकारिता

·         न्यायालय पत्रकारिता

·         आर्थिक पत्रकारिता

·         खेल पत्रकारिता

·         विज्ञान और विकास पत्रकारिता

·         अपराध पत्रकारिता

·         फैशन और फिल्म पत्रकारिता

36.प्र. प्रिंट मीडिया से क्या आशय है ?

उत्तर : छपाई वाले संचार माध्यम को प्रिंट मीडिया कहते हैं । इसे मुद्रण माध्यम भी कहते हैं ।

37.प्र. आधुनिक छापेखाने का आविष्कार किसने किया ?

उत्तर : जर्मनी के गुटेनवर्ग ने ।

38.प्र. भारत में पहला छापा खाना कब और कहां पर खुला था?

उत्तर : सन्‍ 1556 में गोवा में खुला ।

39.जनसंचार के मुद्रित माध्यम कौन से हैं ?

उत्तर : अखबार, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि ।

40.मुद्रित मध्यम की विशेषताएँ बताएँ ?

उत्तर : * छपे हुए शब्दों में स्थायित्व होता है ।

·         यह माध्यम लिखित भाषा का विस्तार है ।

·         यह चिंतन्, विचार-विश्लेषण का माध्यम है ।

41.प्र.मुद्रित माध्यम की सीमाएँ लिखिए ।

उत्तर : * निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम के नहीं होते ।

·         ये तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते ।

·         इसमें स्पेश तथा शब्द सीमा का ध्यान रखना पडता है ।

42.मुद्रित माध्यम के लेखन के लिए कौन कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?

उत्तर : *भाषागत शुद्धता का ध्यान  रखा जाना चाहिए ।

·         प्रचलित भाषा का प्रयोग किया जाए ।

·         समय, शब्द व स्थान की सीमा का ध्यान रखा जाना चाहिए ।

43.इलैक्ट्रोनिक माध्यम से क्या सम्झते हैं ?

उत्तर :  जिन जनसंचार में इलैक्ट्रोनिक उपकरणों का सहारा लिया जाता है, इलैक्ट्रोनिक माध्यम कहते हैं ।

44.ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना कब हुई ?

उत्तर : सन्‍ 1936 में ।

45.एफ.एम. रेडियो की शुरुआत कब से हुई ?

उत्तर सन्‍ 1993 में ।

46.रेडियो किस प्रकार का माध्यम है ?

उत्तर : इलैक्ट्रोनिक श्रव्य माध्यम है ।

47.रेडियो समाचार किस शैली पर आधारित होते हैं ?

उत्तर : उल्टा पिरामिड शैली में ।

48.उल्टा पिरामिड शैली किसे कहते हैं ? यह कितने भागों में बंटी है ?

उत्तर : जिसमें तथ्यों को महत्त्व के क्रम से प्रस्तुत किया जाता है, सर्वप्रथम सबसे महत्तवपूर्ण तथ्यको तथा उसके बाद कम महत्व की सूचनाओं को घटते क्रम में रखा जाता है । उसे उल्टा पिरामिड शैली कहते हैं ।

49. भारत में पहली मूक फिल्म किसने बनाई ?

    उत्तर:- भारत में पहली मूक-फिल्म ‘राजा हरिश्चन्द्र’ (1913) दादा साहब फाल्के ने बनाई |

50    भारत की पहली बोलती फिल्म कौन सी थी ?

    उत्तर:- आलम आरा (1931) |

51. पत्रकारिता का मूल तत्त्व क्या है ?

    उत्तर:- पत्रकारिता का मूल तत्त्व जिज्ञासा है |

52.  मनुष्य सूचनाएँ क्यों जानना चाहता है ?

उत्तर : अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए, मनुष्य सूचनाएँ इसलिए जानना चाहता है ताकि वह भविष्य की योजनाएँ बना सके | सूचनाएँ उसके दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती है |

53.   समाचार प्राप्त करके के माध्यम कौन-कौन से हैं ?

   उत्तर:- समाचार-पत्र, इंटरनेट, रेडियो, टेलीविजन आदि |

54.   डिकोडिंग का अर्थ बताइए |

उत्तर :- इसका अर्थ है- अस्पष्ट संदेश में निहित अर्थ समझने की कोशिश करना| यह एनकोडिंग से उलटी प्रक्रिया है| इसमें संदेश  प्राप्तकर्ता प्राप्त चिन्हों व संकेतों के अर्थ निकालता है |

55. फीडबैक किसे कहते हैं ?

उत्तर :- संचार प्रक्रिया में संदेश प्राप्तकर्ता द्वारा दर्शायी गई प्रतिक्रिया को फीडबैक कहते हैं| यह सकारात्मक या नकारात्मक दोनों हीप्रकार की हो सकती है |

56.   शोर क्या है ?

उत्तर :- संचार प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को शोर कहते हैं, यह शोर मानसिक से लेकर तकनीकी और भौतिक हो सकता है| इसके कारण कोई संदेश अपने प्राप्तकर्ता तक अपने मूल रूप में नहीं पहुँच पाता |

57.   भारत में छपने वाला पहला अखबार कौन-सा था ?

      उत्तर :- बंगाल गजट (1780) |

58. हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र कौन-सा था ?

      उत्तर :- पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा सम्पादित – उदंत मार्तंड (1876-80) |

59.   संचार के साधन कौन-कौन से हैं ?

    उत्तर:- टेलीफोन, इंटरनेट, समाचार-पत्र, फैक्स, रेडियो, टेलिविज़न, सिनेमा आदि |

60.   संचार की प्रक्रिया के तत्त्व कौन-कौन से हैं ?

    उत्तर:- संचार की प्रक्रिया के तत्त्व निम्नलिखित हैं :-

(क)      स्त्रोत      (ख) एनकोडिंग     ग) माध्यम        (घ) प्राप्तकर्ता

61.   पत्रकारिता किसे कहते हैं ?

उत्तर:- देश-विदेश में घटने वाली घटनाओं को समाचार के रूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को पत्रकारिता कहते हैं |

62.   सम्पादन का अर्थ बताइए |

उत्तर:- सम्पादन का अर्थ है – किसी सामग्री से उसकी अशुद्धियों को दूर करके उसे पठनीय बनाना| इसमें उपसम्पादक रिपोर्टर की खबर सम्बन्धी भाषा-शैली, व्याकरण, वर्तनी तथा तथ्य सम्बन्धी अशुद्धियों को दूर करता है |

63.   सम्पादन के मुख्यबिंदु कौन-कौन से हैं ?

    उत्तर :- (१) तथ्यों की शुद्धता या तथ्यपरकता     (२) वस्तुपरकता

(३) निष्पक्षता                        (४)संतुलन          

(५) स्त्रोत

64.   वस्तुपरकता और तथ्यपरकता इनमें क्या अंतर है ?

उत्तर:- वस्तुपरकता का संबंध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक मूल्यों से होता है, जबकि तथ्यपरकता का संबंध अधिकाधिक तथ्यों से है | वस्तुपरकता तथ्य को देखने की दृष्टि है |

65.   सम्पादकीय पृष्ठ पर टिप्पणी लिखिए |

उत्तर:- सम्पादकीय पृष्ठ को समाचार-पत्र का महत्त्वपूर्ण पृष्ठ मन जाता है| इस पर विभिन्न घटनाओं व समाचारों पर अखबार अपनी राय व्यक्त करता है| इस पृष्ठ पर विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के लेख होते हैं| सम्पादक के नाम पत्र भी इस पृष्ठ पर ही होते हैं| जो लोगों की भावनाओं को व्यक्त करते हैं |

66.   फीचर क्या है ?

उत्तर : फीचरएक प्रकार का सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है ।

67.   समाचार के छहः ककार कौन कौन से हैं ?

उत्तर : क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों और कैसे ।

68      भारत में टी.वी की शुरुआत कब हुई और क्यों

उत्तर:- भारत में टी.वी. की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को हुई | इसका उद्देश्य शिक्षा और सामुदायिक विकास को प्रोत्साहित करना था |

69      बीट का क्या महत्त्व है ?

उत्तर : इससे समाचार पत्र के प्रकाशन एवं पाठकों के पठन में सुविधा होती है ।

70   आलेख किसे कहते हैं ।

 उत्तर : किसी विषय पर सार गर्भित एवं आलोचनात्मक लेख आलेख की श्रेणी में आता है ।

नमूना आलेख :-

शेर का घर जिम कार्बेट नेशनल पार्क

जंगली जीवों की विभिन्न प्रजातियों को संरक्षण देने तथा उनकी संख्या को बढाने के उद्देश्य से हिमालय की तराई से लगे उत्तराखंड के पौडी और नैनीताल जिले में भारतीय महाद्वीप के पहले राष्ट्रीय अभयारण्य की स्थापना प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक जिम कार्बेट के नाम पर की गई है । जिम कार्बेट नेशनलपार्क नैनीताल से एक सौ पंद्रह किलोमीटर और दिल्ली से दौ सौ नब्बे किलोमीटर दूर है । यह अभयारण्य पाँच सौ इक्कीस किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है । नवम्बर से जून के बीच यहाँघूमने फिरने का सर्वोत्तम समय है ।

यह अभायरण्य चार सौ से ग्यारहा सौ मीटर की ऊंचाई पर है । ढिकाला इस पार्क का प्रमुख मैदानी स्थल है और कांडा सबसे ऊंचा स्थान है । रॉयल बंगाल टाइगर और एशियाई हाथी का पसंदीदा घर है । यह एशिया का सबसे पहला संरक्षित जंगल है । रामगंगा नदी इसकी जीवन धारा है । यहां एक सौ दस तरह के पेड़ पौधे, पचास तरह के स्तनधारी जीव, पच्चीस प्रजातियों के सरीसृप और छहः सौ तरह के रंग बिरंगे पक्षी हैं। हिमालयन तेंदुआ, हिरण, भालू, जंगली कुत्ते, भेडिये, बंदर, लंगूर, जंगली भैंसे जानवरों से भरे यह जंगल आबाद है । हर वर्ष लाखों पर्यटक यहाँ आते हैं । शाल वृक्षओं से घिरे लम्बे लम्बे वन-पथ और हरे भरे घास के मैदान इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चाँद लगाते हैं ।

रिपोर्ट/ प्रतिवेदन लेखन एवं विशेषताएँ  (3 अंक)

सूचनाओं के तथ्यपरक आदान-प्रदान को रिपोर्ट या रिपोर्टिंग कहते हैं । प्रतिवेदन इसका हिंदी रूपांतरण है। रिपोर्ट किसी संस्था, आयोजन या कार्यक्रम की तथ्यात्मक जानकारी है ।

रिपोर्ट के गुण :-

·         तथ्यों की जानकारी स्पष्ट, सटीक और प्रामाणिक हो ।

·         संस्था/विभाग के नाम का उल्लेख हो ।

·         अध्यक्ष आदि पदाधिकारियों के नाम ।

·         गतिविधियाँ चलाने वालों के नाम ।

·         कार्यक्रम का उद्देश्य ।

·         आयोजन स्थल, दिनांक, दिन और समय ।

·          उपस्थित लोगों की जानकारी ।

·         दिए गए भाषणों के प्रमुख अंश ।

·         लिए गए निर्णयों की जानकारी ।

·         भाषा सरल, सुबोध, सूचनात्मक होनी चाहिए ।

·         सूचनाएँ अन्य पुरूष शैली में दी जाती है ।

·         संक्षिप्तता और क्रमिकता अनिवार्य गुण होना चाहिए ।

·         नई बात नए अनुच्छेद से लिखें ।

·         प्रतिवेदक या रिपोर्टर के हस्ताक्षर ।

फीचर लेखन (3 अंक)

समकालीन घटना तथा किसी भी क्षेत्र विशेष की विशिष्ट जानकारी के सचित्र तथा मोहक विवरण को फीचर कहा जाता है। फीचर मनोरंजक ढंग से तथ्यों को प्रस्तुत करने की कला है। वस्तुतः फीचर मनोरंजन की उंगली थामकर जानकारी परोसता है। इस प्रकार मानवीय रूचि के विषयों के साथ सीमित समाचार जब चटपटा लेख बन जाता है तो वह फीचर कहलाता है। फीचर में ज्ञान+मनोरंजन का समावेश होता है जो पाठक को वर्तमान से भूत और भविष्य की तरफ ले जाने में सक्षम है ।

 फीचर और समाचार लिखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

1.  समाचार साधारण भाषा में, फीचर विशिष्ट शैली में लिखा जाता है ।

2.  एक समाचार हर एक पत्र में एक ही स्वरूप में रहता है जबकि फीचर अलग अलग पत्रों में अलग अलग प्रस्तुत होते हैं ।

3.  फीचर में अतिरिक्त साज सज्जा, तथ्यों और कल्पना का रोचक मिश्रण रहता है ।

4.  घटना के परिवेश, विविध प्रतिक्रियाएँ व उनके दूरगामी परिणाम भी फीचर में रहा करते हैं ।

5.  फीचर में जांनकारी और मनोरंजन रहता है , समाचार में जानकारी ही होती है

6.  फीचर में फोटो से अधिक संभावनाएँ होती हैं । जैसे

उदाहरण:-

“संगत का असर आता है, फिर चाहे आदमी हो या तोता । ब्रिटेन में एक तोते को अपने मालिक की संगत में शराब की ऐसी लत लगी कि उसने घर वालों और पडोसियों का जीना बेहाल कर दिया । जब तोते को सुधारने की सारी कोशिशें असफल हो गई तब मजबूरन मालिक को ही शराब छोडनी पड़ी । मार्क बेटोकियो ने अफ्रीकी प्रजाति का तोता मर्लिन पाला । मर्क यदा कदा शराब पी लेते । गिलास में बची शराब मर्लिन चट कर जाता । धीरे- धीरे मर्लिन की तलब बढ्ने लगी । वह वक्त बेवक्त शराब मांगने लगा………………………।

अभ्यास के लिए निम्न विषयों पर फीचर लिखें :-

·         चुनावी वायदे

·         महँगाई के बोझ तले मजदूर

·         वाहनों की बढती संख्या

·         किसान का एक दिन

·         क्रांति के स्वप्न दृष्टा : अब्दुल कलाम

·         क्रिकेट का नया संस्करण : ट्वेंटी ट्वेंटी

·         बेहतर संसाधन बन सकती है जनसंख्या ।

 (पद्य भाग-आरोह-2)

                                                        1 कविता :-   आत्म परिचय  (हरिवंश राय बच्चन)

काव्य खंड पर आधारित दो प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे- अर्थग्रहण संबंधी एवं सौंदर्य बोध संबंधी

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

                  मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूं,

                  फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूं,

                  कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर,

                  मैं सांसों के दो तार लिए फिरता हूं।

प्र1-कवि अपने ह्रदय में क्या क्या लिए फिरता हैं?

उ- कवि अपने सांसारिक अनुभवों के सुख-दुख हृदय में लिए फिरता हैं।

प्र2-कवि का जग से कैसा रिश्ता हैं?

उ- कवि का जग जीवन से खट्टा मीठा रिश्ता हैं।

प्र3-परिवेश का व्यक्ति से कया संबंध है? ‘मैं सांसों के दो तार लिए फिरता हूं’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता हैं?

उ- संसार में रह कर संसार से निरपेक्षता संभव नही हैं क्योंकि परिवेश में रहकर ही व्यक्ति की पहचान बनती है। उसकी अस्मिता सुरक्षित रहती है।

प्र4-विरोधो के बीच कवि का जीवन किस प्रकार व्यतीत होता हैं?

उ-दुनिया के साथ संघर्ष पूर्ण रिश्ते चलते कवि का जीवन- विरोधों के बीच सामंजस्य करते हुए व्यतीत होता है।

सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न

                  “मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूं,

                  मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूं,

                  जग पूछ रहा उनको जो जग की गाते,

                  मैं अपने मन का गान किया करता हूं”

प्र1- कविता की इन पंक्तियों से अलंकार छांटकर लिखिए।

उ- स्नेह-सुरा – रूपक अलंकार

प्र2- कविता में प्रयुक्त मुहावरे लिखिए।

उ- ‘जग पूछ रहा’.’जग की गाते’,’मन का गान’ आदि ।

प्र3- कविता में प्रयुक्त शैली का नाम लिखें।

उ- गीति-शैली ।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोतर

प्र1- कवि कौन- कौन सी स्थितियों में मस्त रहता है और क्यों?

उ- कवि सांसारिक सुख-दुख की दोनों परिस्थितियों में मग्न रहता हैं। उसके पास प्रेम की सांत्वनादायिनी अमूल्य निधि है।

प्र2 –कवि भव-सागर से तरने के लिए क्या उपाय अपना रहा हैं?

उ- संसार के कष्टों सहते हुए हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि कष्टों को सहना पडेगा। इसके लिए मनुष्य को हंसकर कष्ट सहना चाहिए।

प्र3- ‘अपने मन का गान’ का क्या आशय है?

उ- संसार उन लोगों को आदर देता है जो उसकी बनाई लीक पर चलता है परंतु कवि केवल वही कार्य करता है जो उसके मन, बुद्धि व विवेक को अच्छा लगता है।

प्र4- ‘नादान वही हैं हाय जहां पर दाना‘ का क्या आशय है?

उ- जहां कही मनुष्य को विद्वता अहंकार है, वास्तव में वही नादानी का सबसे बडा लक्षण है।

प्र5- ‘रोदन में राग’ कैसे संभव है?

उ-कवि की रचनाओं में व्यक्त पीडा वास्तव में उसके ह्रदय में मानव मात्र के प्रति व्याप्त प्रेम का ही सूचक है।

प्र6- ‘मैं फूट पडा तुम कहते छंद बनाना’ का अर्थ स्पष्ट करो।

उ- कवि की श्रेष्ठ रचनाएं वास्तव में उसके मन की पीडा की ही अभिव्यक्ति है जिनकी सराहना संसार का श्रेष्ठ साहित्य कह कर किया करता है।

                  2.   कविता:- दिन जल्दी जल्दी ढलता है।

अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्न

                        “बच्चे प्रत्याशा में होंगे,

                        नीडों से झांक रहे होंगे।

                      यह ध्यान परों में चिडिया के,

                        भरता कितनी चंचलता है”।

प्र1- पथ और रात से क्या तात्पर्य है?

उ- जीवन रुपी पथ में मृत्यु रूपी रात से सचेत रहने के लिए कहा गया है।

प्र2- पथिक के पैरों की गति किस प्रकार बढ जाती है ?

उ- मंजिल के पास होने का अहसास, व्यक्ति के मन में स्फूर्ति भर देता हैं।

प्र3- चिड़िया की चंचलता का क्या कारण है?

उ- चिड़िया के बच्चे उसकी प्रतिक्षा करते होंगे, यह विचार चिडिया के पंखों में गति भर कर चंचल बना देता है।

प्र4- प्रयासो में तेजी लाने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए?

उ-प्रयासो में तेजी लाने के लिए मनुष्य को जीवन में एक निश्चित मधुर लक्ष्य स्थापित करना चाहिए।

पाठ के आधार पर स्तरीय प्रश्नोंत्तर :-

                          2. ॥ पतंग ॥

                          आलोक धन्वा

सौंदर्यबोध संबंधी प्रश्न :-

जन्म से ही लाते हैं अपने साथ कपास,

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए,

ओर भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं,

छतों को ओर भी नरम बनाते हुए,

जब वे पेग भरते हुए चले आते हैं

डाल की तरह लचीले वेग से अक्सर ॥

प्र1. ‘जन्म से ही लाते हैं अपने साथ कपास’—इस पंक्ति की भाषा संबंधी विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर : नए प्रतीकों का प्रयोग (कपास-कोमल)

प्र2. इस पंक्ति में प्रयुक्त लाक्षणिक अर्थ को स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर : लाक्षणिकता : ‘दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए’ संगीतमय वातावरण की सृष्टि।

प्र3. सुनहला सूरज प्रतीक का अर्थ बताएं ।

उत्तर : निडर, उत्साह से भर जाना ।

पाठ के आधार पर स्तरीय प्रश्नोत्तर :-

 स्तर:- 1

1. कविता में भादो का जो वर्णन मिलता है  उसका वर्णन अपने शब्दों मे कीजिए ।

उ. कविता में भादो वर्षा ऋतु का अंतिम महीना है। सवेरे का सूरज खरगोश की आंखों जैसा लाल दिखाया गया है।  प्रातकाल के मनोहारी वातावरण, मंद मंद समीर के प्रवाह सहित कई ग्रामीण झांकियां उभरती है।

2. कवि ने सवेरे के लिए किस विशेषण का प्रयोग किया है ?

उ. लाल विशेषण का प्रयोग हुआ है।

3.बच्चों को पतंग उडाते हुए छतों के किनारों से कौन बचाता है ?

उ. उनके रोमांच का वेग।

स्तर:-2

1.पतंग के साथ बच्चों के उडने का क्या संबंध है ?

उ. क्योंकि जिस तरह से बच्चे आकाश में पतंग़ ऊडाते है उसी प्रकार उनकी कल्पनाएं भी आकाश में उडती है।

2.शरद ऋतु का आगमन कैसे हुआ ?

उ.भादों के बाद रिमझिम फुहारों के साथ ।

3. दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?

उ. बच्चे रोमांचित होकर ,निर्भय होकर खेलते हैं।

स्तर:-3

1.जन्म से ही वे अपने साथ लाते है कपास—कपास से बच्चों का क्या संबंध है ?

उ. जिस प्रकार कपास कोमल और मुलायम होती है उसी तरह से बच्चे भी जन्म के साथ ही कोमलता लेकर आते है।

2.कवि ने सवेरे की तुलना किससे की है और क्यों ?

उ. लाल गेंद से।

3.पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहें है—पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।

उ. इसका अर्थ है कि बच्चे भी कल्पना करके आसमान में निरंतर उड रहे होते हैं।

                    3.कविता के बहाने एवं बात सीधी थी पर

                                    कुवंर नारायण

·         काव्य सौंदर्य पर आधारित प्रश्न :-

कविता की उडान है चिड़िया के बहाने

कविता की ऊडान भला चिड़िया क्या जाने

बाहर भीतर

इस घर उस घर

कविता के पंख लगा उडने के माने

चिडिया क्या जाने ?

प्र.1 इस पंक्तियों की भाषा संबंधी विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर : इन पंक्तियों की भाषा संबंधी निम्नलिखित विशेषताएँ –

·       नए प्रतीक –चिडिया

·   मुहावरों का सटीक प्रयोग—सब घर एक कर देना , कवि की कल्पना की उर्वर शक्ति जिसका प्रयोग करने में कवि जमीन आसमान एक कर देता है ।

प्र.2 कविता की उडान –का लाक्षणिक अर्थ बताएं ।

उत्तर : काव्य की सूक्ष्म अर्थ निरूपण शक्ति, कवि की कल्पना का विस्तार ।

प्र.3 कविता के पंख किसका प्रतीक हैं?

उत्तर : कवि की कल्पना शक्ति का ।

पाठ के आधार पर स्तरीय प्रश्नोत्तर :-

स्तर-1

प्र. कविता और बच्चे को समानांतर रखने का क्या कारण हैं ?

उ. जिस प्रकार बच्चे के मन में किसी भी तरह का द्वंद्व नहीं होता वह सहज होता है ठीक उसी तरह से कविता भी सहज और सरल होती है।

2.प्र. भाषा को सहुलियत से बरतने का क्या अर्थ है ?

उ. भाषा को सहज ढंग से बोलना चाहिए ।

स्तर-2

.प्र. बिना मुरझाए महकने का क्या अर्थ है?

उ. कविता के अर्थ निरंतर नए और सरल होते चले जाते हैं।

2.प्र. बात और भाषा परस्पर जुडी होती है मगर कभी कभी भाषा के चक्कर में जरा टेढी हो जाती है कैसे?

उ. बात भाषा के चक्कर में पड कर अपना स्वरूप बदल लेती है। बात और भाषा के चक्कर में पडकर लोग अपनी भावना को मार बैठते है।

स्तर-3

प्र. ‘उडने और खिलने’ से कविता का क्या संबंध है ?

उ. उडने का संबंध पक्षी से है जिस प्रकार पंछी उडान भरता है उसी प्रकार कवि भी कल्पना के  आकाश में उडान भरता है। इसी तरह खिलने का संबंध फूल के साथ है जिसमें कोई भेद भाव नहीं होता।

प्र. ‘कविता के बहाने’कविता के माध्यम से सब घर एक कर देने के माने” का अर्थ बताएं।

उ. इसका अर्थ है कि बच्चे कभी भी किसी के साथ कोई भेद भाव नहीं करते ।

4. कैमरे में बंद अपाहिज (रघुबीर सहाय)

कविता के अर्थ ग्रहण संबंधी प्रश्न :

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे

हम समर्थ शक्तिवान

हम एक दुर्बल को लायेंगे

एक बंद कमरे में

उससे पूछेंगे ,तो आप क्या अपाहिज हैं ?

तो आप क्यों अपाहिज हैं ।

1.   प्र.‘हम दूरदर्शन पर बोलेंगे हम सर्वशक्तिमान’—का निहित अर्थ स्पष्ट करें ।

उत्तर : इन पंक्तियों में अहं की ध्वनि अभिव्यक्ति है, पत्रकारिता का बढता वर्चस्व दिखाया गया है ।

2.   प्र. हम एक दुर्बल को लायेंगे –पंक्ति का व्यंग्यार्थ स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर : पत्रकारिता के क्षेत्र में करूणा का खोखला प्रदर्शन एक परिपाटी बन गई है ।

3.   प्र. क्या आप अपाहिज हैं? तो आप क्यों अपाहिज हैं –पंक्ति द्वारा कवि किस विशिष्ट अर्थ की अभिव्यक्ति करने में सफल हुआ है ?

उत्तर : पत्रकारिता में व्यवसयिकता के चलते संवेदनहीनता बढती जा रही है । यहां अपेक्षित उत्तर प्राप्त करने का अधैर्य व्यक्त हुआ है ।

स्तर:-1

.प्र. यदि शारीरिक रूप से कमजोर और दर्शक दोनो एक साथ रोने लगेंगे तो प्रश्नकर्ता का कौन सा उद्देश्य पूरा हो सकेगा?

उ. सभी को रूलाने का ।

.प्र. हम कैमरे के सामने अपाहिज से क्या प्रश्न पूछेंगे?

उ. क्या आप अपाहिज हैं?

   अपाहिज होना कष्ट तो देता होगा?

    अपाहिज होकर कैसे लगता है?

स्तर;- 2

प्र. “और ह्म एक दुर्बल को लायेंगे” पंक्ति के माध्यम से कवि क्या व्यंग्य करना चाहता है?

उ. मीडिया की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

.प्र. ‘यह अवसर खो देंगे ?’— पंक्ति का अर्थ बताएं।

उ.दूरदर्शन पर आने का व अपना दुख सभी को जग जाहिरकरने का मौका पा सकेगा।

स्तर:-3

.प्र कैमरे में बंद अपाहिज कविता करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है स्पष्ट कीजिए।

 उत्तर : जी हाँ इस कविता में जिस तरह के शब्दों का प्रयोग हुआ है वह संवेदनहीनता का संजीदा उदाहरण ही है ।

  प्र. कैमरे पर किस चीज की कीमत है ? क्या कविता में वह चीज प्राप्त हुई ?

उत्तर : कैमरे पर वक्त की कीमत है । दूरदर्शन पर जिस संवेदनहीनता के दृश्य प्रस्तुत किए जाने की उत्कट इच्छा जाहिर की गई वह प्राप्त नहीं हुई ।

                     5- सहर्ष स्वीकारा है (गजानन माधव मुक्तिबोध)      

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

जिंदगी में जो कुछ भी हैं

सहर्ष स्वीकारा है;

इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है,

वह तुम्हें प्यारा है।

गरबीली गरीबी यह, ये गंभीर अनुभव सब यह वैभव विचार सब,

दृढता यह, भीतर की सरिता यह अनुभव सब

मौलिक है,मौलिक है

इसलिए कि पल पल  में

जो कुछ भी जाग्रत है अपलक है

संवेदन तुम्हारा है।

प्र1.- कवि और कविता का नाम लिखिए।

उत्तर- कवि- गजानन माधव मुक्तिबोध

      कविता- सहर्ष स्वीकारा है

प्र2- गरबीली गरीबी, भीतर की सरिता आदि प्रयोगों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- गरबीली गरीबी- निर्धनता का स्वाभिमानी रूप। कवि के विचारों की मौलिकता, अनुभवों की गहराई, दृढता, ह्रदय का प्रेम उसके गर्व का कारण हैं।

प्र3- कवि अपने प्रिय को किस बात का श्रेय दे रहा है?

उत्तर- निजी जीवन के प्रेम का संबंल कवि को विश्व व्यापी प्रेम से जुडने की प्रेरणा देता है। अत: कवि इसका श्रेय अपने प्रिय को देता है।

सौंदर्य बोध ग्रहण संबंधी प्रश्न

जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है

जितना भी उडेलता हूं, भर-भर फिर आता है

दिल में क्या झरना है?

मीठे पानी का सोता है

भीतर वह, उपर तुम

मुस्काता चांद ज्यों धरती पर रात भर

मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा हैं।

प्र1- कविता की भाषा संबंधी दो विशेषताएं लिखिए।

उत्तर- 1- सटीक प्रतिकों

     2- नए उपमानो का प्रयोग

प्र2- दिल में क्या झरना है? मीठे पानी का सोता है।– का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- दिल में क्या झरना है?- ह्रदय के अथाह प्रेम का परिचायक

     मीठे पानी का सोता है- अविरल, कभी समाप्त होने वाला प्रेम ।

प्र3- कविता में प्रयुक्त बिंब का उदाहरण लिखिए।

उत्तर- दृश्य बिंब- मुस्काता चांद ज्यों धरती पर रात भर। मुझ पर तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा।

स्तर : 1

प्र. ‘सहर्ष स्वीकारा है कविता में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।

उ. कवि अपने प्रेमी पात्र को सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहता है। वह सुख दुख, संघर्ष-अवसाद, उठा पटक को स्मान रूप से स्वीकार करता है । प्रिय से बिछुडने के बाद भी स्मृतियों के सहारे विश्व चेतना का अहसास करता है ।

.प्र. कवि और कविता का नाम स्पष्ट कीजिए।

उ. कविता का नाम=सहर्ष स्वीकारा है, कवि= श्री गजानन माधव मुक्तिबोध्।

 स्तर: –  2

.प्र. गरीबी को कवि ने गरबीली क्यों कहा है ?

उ. क्योंकि गरीबी ही कवि को जीवन की पहचान देती है।

प्र. कवि ने भीतर की सरिता किसे और क्यों कहा है ?

उ. कवि ने अपने भावों को सरिता की संज्ञा दी है। ‘दिल का झरना’ कवि के मौलिक विचारों का स्रोत है जो निरंतर उसके अभिव्यक्त करने के बाद भी निरंतर भर भर आता है

स्तर:- 3

1.प्र. बहलाती सहलाती आत्मीयता से कवि का क्या आशय है?

उ.अपने कोमल भावों के अहसास से है।

2.प्र. बहलाती सहलाती आत्मीयता बर्दाश्त नहीं होती है ….और कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा है में आप कैसे अंतर्विरोध पाते है ?स्पष्ट कीजिए।

उ. कविता के शीर्षक सहर्ष स्वीकारा है के अंतर्गत कवि की स्थिति स्पष्ट होती है वह अपनेसभी अनुभव व सुख दुख व अपने प्रेमी पात्र को इसलिए समर्पित करना  चाहता है क्योंकि प्रिय की आत्मीयता के कारण ही वह आगे बढ़ना चाहता है।

   6. उषा (शमशेर बहादुर सिहँ)

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :-

प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे

भोर का नभ

राख से लीपा चौका

(अभी गीला पडा है)

बहुत काली सिल जरा से लाल केसर

से कि जैसे धुल गई हो

स्लेट पर या लाल खडिया चाक

मल दी हो किसी ने

नील जल में या किसी की

गौर झिलमिल देह

जैसे हिल रही हो।

और…….

जादू टूटता है इस उषा का अब

सूर्योदय हो रहा है ।

प्र. उषा कविता में सूर्योदय के किस रूप को चित्रित किया गया है ?

उत्तर : कवि ने प्रातःकालीन परिवर्तनशील सौंदर्य का दृश्य बिम्ब मानवीय क्रियाकलापों के माध्यम से व्यक्त किया गया है ।

प्र. भोर के नभ और राख सी लीपे गए चौके में क्या समानता है ?

उत्तर : भोर के नभ और राख से लीपे हुए चौके में यह समानता है कि दोनों ही गहरे सलेटी रंग के हैं, पवित्र हैं। नमी से युक्त हैं ।

प्र. स्लेट पर लाल……..पंक्ति का अर्थ बताएँ ।

उत्तर : भोर का नभ लालिमा से युक्त स्याही लिए हुए होता है । अतः लाल खडिया चाक से मली हुई स्लेट के समान प्रतीत होती हैं ।

प्र. उषा का जादू किसे कहा गया है ?

उत्तर: विविध रूप रंग बदलती सुबह व्यक्ति पर जादुई प्रभाव डालते हुए उसे मंत्र मुग्ध कर देती है ।

स्तर:- 1

.प्र.सूर्योदय से पहले आकाश में किस प्रकार के परिवर्तन होते है?

उ सूर्योदय से पहले आकाश अपना रूप रंग- बिरंगे रूप में बदलता  रहता है।

2.प्र. कविता व कवि का नाम बताएं।

उ. कवि का नाम= शमशेर सिहँ बहादुर, कविता का नाम= उषा

3.प्र प्रातःकाल का आकाश कैसा प्रतीत हो रहा था ?

उत्तर : राख से लीपे चौके जैसा, नीले शंख सा ।

स्तर : 2

.प्र. सूर्योदय से उषा का कौन सा जादू टूटता है?

उ  प्रातःकाल की सभी झांकियां परिवर्तित होने से जादू टूटता है।

.प्र. भोर के नभ को राख से लीपा चौका क्यों कहा गया है?

उ क्योंकि वह स्लेटी रंग का नजर आ रहा है।

3.प्र कवि ने भोर के नभ की क्या विशेषताएँ बताई हैं ?

उ. राख से लीपे चौके जैसा, नीले शंख जैसा।

स्तर :3

प्र. कवि ने किस शैली में कविता का वर्णन किया है ?

उत्तर : चित्रात्मक (बिम्बात्मक) शैली में ।

प्र कविता में आए अलंकारों का परिचय दें ।

उत्तर: काली सिल से लाल केसर – उपमा

     जैसे हिल रही हो – उत्प्रेक्षा अलंकार

7. लक्ष्मण मूर्च्छा और राम का विलाप (तुलसीदास)

अर्थग्रह्ण संबंधी प्रश्न :-

उहां राम लछिमनहि निहारी । बोले वचन मनुज अनुसारी ।

अर्ध राति गई कपि नहीं आयउ । राम उठाई अनुज उर लयउ ।

सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ । बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ ।

मम हित लागि तजेहु पितु माता । सहेहु विपिन हिम आतप बाता ।

उतरु काह दैहंउ तेहि जाई । उठि किन मोहि सिखवनु भाई ।

1.  प्र. ‘बोले वचन मनुज अनुसारी’ – का तात्पर्य क्या है ?

उत्तर :भाई के शोक में विगलित राम का विलाप धीरे धीरे प्रलाप में बदल जाता है । जिससे लक्ष्मण के प्रति राम के अंतर में छिपे प्रेम के कई कोण सहसा अनावृत हो जाते हैं । यह प्रसंग इधर राम ने मानव सुलभ गुणों का समंवय कर देता है । वे मनुष्य की भांति विचलित होकर ऐसे वचन कहते हैं जो मानवीय प्रकृति को ही शोभा देते हैं  ।

2.  प्र. राम ने लक्षमण के किन गुणों का वर्णन किया है ?

उत्तर : * लक्षमण राम से बहुत स्नेह करता है ।

·         उन्होने  भाई के लिए अपने माता-पिता का भी त्याग कर दिया ।

·         वे वन में वर्षा,हिम, धूप आदि कष्टों का सहन कर रहे हैं ।

·         उनका स्वभाव बहुत मृदुल है ।वे भाई के दुख को नहीं देख सकते ।

3.  प्र. राम के अनुसार कौन सी वस्तुओं की हानि कोई हानि नहीं होती कहा है ?

उत्तर :राम के अनुसार धन, पुत्र, भवन, घर और परिवार की हानि कोई हानि नहीं होती इन्हे खो देने पर पुनः प्राप्त किया जा सकता ।

4.  प्र.पंख के बिना पक्षी और सूंड के बिना हाथी की क्या दशा होती है ?काव्य प्रसंग में इनका उल्लेख क्यों किया गया है ?

उत्तर : राम विलाप करते हुए अपनी भावी स्थिति का वर्णन कर रहे हैं कि जैसे पंख के बिना पक्षी और सूंड के बिना हाथी पीडित हो जाता है ,उनका अस्तित्व नग्नय हो जाता है वैसा ही असहनीय कष्ट राम को लक्ष्मण के न होने से होगा ।

स्तर 1

.प्र.कवितावली में तुलसी दास ने जिन सामाजिक बुराइयों का जिक्र किया है उनका वर्णन करें।

उ. समाज में धर्म-अधर्म, न्याय-अन्याय के कार्य हो रहे है। पेट भरने के लिए बेटा बेटी तक को बेच रहे है।

.प्र.भाई के वियोग में राम की जो दशा हुई उसे स्पष्ट करें।

उ. भाई के बिना राम बिना पंख के पक्षी, बिना मणी के नाग , बिना सूंड के हाथी की तरह महसूस करते है।

स्तर:-2

1.प्र. शोकग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का अविर्भाव कहा गया है?

उ. जब राम विल्काप कर रहे थे तब भालू, वानर सभी दुखी महसूस कर रहे थे तभी हनुमान का उपस्थित होना सभी के लिए वीरता का संचार माध्यम बना।

2.प्र. मांगिकै खाइबो,मसित को सोईबो ,लेबौ को एकू न दौको न कऊ..पंक्ति में किस लोकोक्ति का प्रयोग किया गया है?

उ. इसमें कवि की निडरता व निर्भिकता के साथ साथ राम के प्रति अपार श्रद्धा का परिचायक है।

स्तर:-3

1काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें:-

               (क) जथा पंख बिनु खग अति दीना । मनी बिनु फनि करिबर कर हीना ॥

               (ख) अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड देव जियावै मोही॥

उ.*भाषा तत्सम प्रधान अवधी है ।*दोहा छंद है।*अनुप्रास , पद मैत्री,  उदाहरण अलंकार है।*

2. दारिद दसासन दबाई दुनी दीन बंधु

                     दुरित दहन देखी तुलसी हहा करी—– काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।

उ. राम जी ही गरीबी के रावण को धराशाही कर सकते है।

3. कविता में तुलसी ने कौन सी भाषा प्रयोग की है ?

उ. अभिधात्मक शैली, अवधी भाषा ।

8. रूबाइयाँ (फिराक गोरखपुरी)

वो रूपवती मुखडे पे इक नरम दमक

बच्चे के घरोंदे में जलाती है दिए ।

रक्षा बंधन की सुबह रस की पुतली

बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे

भाई के हैं बाँधती चमकती राखी ।

प्र. माँ के चेहरे पर कैसा भाव आता है ?

उ. माँ के चेहरे पर खुशी का भाव आता है ।

प्र. माँ कहाँ दीया कहाँ जलाती है ?

उ. बच्चों के छोटे छोटे घरोंदों में ।

प्र. रस की पुतली कौन है ? उसे यह संज्ञा क्यों दी गई ?

उ. रस की पुतली राखी बाँधने वाली बहन है । भाई के प्रति अधिक स्नेह होने के कारण दिया है ।

स्तर:-1

.प्र..आंगन में कौन खडी है ? क्या लिए खडी है ?

उ. आंगन में मां खडी है। वह अपने हाथों में अपने चांद के टुकडे को लिए हुए है।

2.प्र. दीवाली पर लोग क्या करते हैं ?

उ. दीवाली पर लोग अपने घरों को सवारते, सजाते है।

स्तर:- 2

1.प्र. शायर राखी के लच्छे को बिजली की तरह चमक कह कर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?

उ. रक्षाबंधन का पावन पर्व सावन में आता है। सावन में आकाश में घटाएं छाई और बिजलीचमकती रहती है। इस प्रकार सावन का जो संबंध झीनी घटा से है, घटा का जो संबंध बिजली से है वह संबंध भाई का बहन से है।

2.प्र. खुद का परदा खोलने से क्या आशय है ?

उ. स्वयं की कमजोरियों से पर्दा हटाना, अपनी बुराइयों अवगुणों से साक्षात्कारा कराना ।

स्तर:- 3

1.प्र. कवि किस्मत पर रोने की बात क्यों कहता है?

उ. लोग अपनी कर्महीनता को दोषा न देकर अपनी किस्मत को दोष देते रहते है।

     “नहला के छलके छलके निर्मल जल से

   उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके

   किस प्यार से देखता है बच्चा मुहं को

   जब कुहनियों में लेके पहनाती है कपडे”॥

2.उपरोक्त पंक्तियों में किस रस की अभिव्यक्ति हुई है ?

उ.श्रृंगार व वात्सल्य रस का चित्रण हुआ है।

3. पंक्तियों में किस शब्द शक्ति का प्रयोग किया गया है?

उ. अभिधा शब्द शक्ति का प्रयोग हुआ है।

4. पंक्तियों में किस तरह की है?

उ. छंद बद्ध

5. पंक्तियों में किस गुण का प्रयोग किया गया है?

उ.प्रसाद गुण

6. पंक्तियों में छलके-छलके शब्दों में कौन सा अलंकार है?

उ. पुनरूक्ति

 9. छोटा मेरा खेत व बगुलों के पंख (उमा शंकर जोशी)

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :-

छोटा मेरा खेत चौकोना,

कागज का एक पन्ना,

कोई अंधड कहीं से आया

क्षण का बीज वहाँ बोया गया ।

कल्पना के रसायनों को पी

बीज गल गया निःशेष, शब्द के अंकुर फूटे,

पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष ।

1.  छोटा मेरा खेत किसका प्रतीक है ?

उत्तर : कागज के पन्ने का जिस पर कवि कविता करता है ।

2.  कवि खेत मे कौन सा बीज बोता है ?

उतर: कवि खेत में कल्पना का बीज बोता है ।

3.  कवि की कल्पना से कौन से पल्लव अंकुरित होते हैं ?

उत्तर : कवि की कल्पना से शब्द के पल्लव अंकुरित होते हैं ।

स्तर:-1

1.प्र.कवि ने अपने खेत में कौन सा बीज बोया है ?

उ. कवि ने अपने खेत में शब्द रूपी बीज बोया है।

2.प्र.संपूर्ण कृति का रूप कौन लेता है ?

उ. कवि के भाव शब्दों का रूप लेकर एक संपूर्ण कृति का रूप लिया था ।

स्तर:-2

1.प्र.कौन सा बीज गल कर नष्ट हो गया है?

उ. भाव रूपी बीज गल कर नष्ट हो गया है।

2.प्र. कवि का खेत अनूठा है ?कैसे

उ. रोपाई क्षण भर और कटाई लम्बे समय तक चलती रहती है

3.प्र. कवि को अपनी माया से कौन बांध रहा है?

उ.कजरारे बाद्ल और तैरती हुई शाम का तेजाबी सफेद काव्य माया में बांध रहा है।

स्तर:-3

1.प्र.छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है ?

उ. जिस प्रकार कागज का पन्ना चौकोर होता है उसी प्रकार छोटा खेत भी चौकोर होता है। जिस प्रकार खेत में बीज बोया जाता है ठीक उसी प्रकार कागज के पन्ने पर कोई कल्पना के सहारे कवि द्वारा अभिव्यक्ति रूपी बीज बोया जाता है।

2.1प्र. रचना के संदर्भ में अंधड और बीज क्या है ?

उ. अंधड भावनात्मक आंधी का तथा बीज रचना विचार और अभिव्यक्ति प्रतीत होती है।

कार्यालयी हिंदी और रचनात्मक लेखन – कार्यालयी पत्र

कार्यालयी हिंदी और रचनात्मक लेखन – कार्यालयी पत्र

कार्यालयी पत्र

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अपने भावों, सूचनाओं, विचारों को दूसरों तक संप्रेषित करना चाहता है। पत्र इस कार्य हेतु सर्वाधिक उत्तम साधन है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने इच्छित व्यक्ति से अपने मन की बात आसानी से कह सकता है। इसके अतिरिक्त, आज का दैनिक जीवन बहुत जटिल हो गया है। मनुष्य को सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं आदि से संबंध स्थापित करने पड़ते हैं। इस कार्य में पत्र बहुत ही सहायक सिद्ध होता है।

पत्र के प्रकार

पत्र अनेक प्रकार के होते हैं। विषय, संदर्भ, व्यक्ति और स्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के पत्रों को लिखने का तरीका भी अलग-अलग होता है। आमतौर पर पत्र दो प्रकार के होते हैं-(क) अनौपचारिक पत्र (ख) औपचारिक पत्र।

(क) अनौपचारिक पत्र- इस तरह के पत्र नजदीकी या रिश्तेदार को लिखे जाते हैं। इसमें पत्र पाने वाले तथा लिखने वाले के बीच घनिष्ठ संबंध होता है। यह संबंध पारिवारिक तथा मित्रता का भी हो सकता है। ऐसे पत्रों को व्यक्तिगत पत्र भी कह सकते हैं। इन पत्रों की विषयवस्तु निजी व घरेलू होती है। इनका स्वरूप संबंधों के आधार पर निर्धारित होता है। इन पत्रों की भाषा-शैली में कोई औपचारिकता नहीं होती तथा इनमें आत्मीयता का भाव व्यक्त होता है।

(ख) औपचारिक पत्र- इस तरह के पत्रों में एक निश्चित शैली का प्रयोग किया जाता है। सरकारी, गैर-सरकारी संदभों में औपचारिक स्तर पर भेजे जाने वाले पत्रों को ‘औपचारिक पत्र’ कहा जाता है। इनमें व्यावसायिक, कार्यालयी और सामान्य जीवन-व्यवहार के संदर्भ में लिखे जाने वाले पत्रों को शामिल किया जाता है।

औपचारिक पत्रों के दो प्रकार होते हैं-

(i) सरकारी, अर्ध-सरकारी और व्यावसायिक संदभों में लिखे जाने वाले पत्र- इनकी विषयवस्तु प्रशासन, कार्यालय और कारोबार से संबंधित होती है। इनकी भाषा-शैली का स्वरूप निश्चित होता है। इनका प्रारूप भी प्राय: निश्चित होता है। सरकारी कार्यालयों, बैंकों और व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा किया जाने वाला पत्र-व्यवहार इस वर्ग के अंतर्गत आता है। विभिन्न पदों के लिए लिखे गए आवेदन-पत्र भी इसी वर्ग में आते हैं।

(ii) सामान्य जीवन व्यवहार तथा अन्य विशिष्ट संदभों में लिखे जाने वाले पत्र- ये पत्र परिचित एवं अपरिचित व्यक्तियों को तथा विविध क्षेत्रों से संबद्ध अधिकारियों को लिखे जाते हैं। इनकी विषयवस्तु आम जीवन से संबद्ध होती है। इनके प्रारूप में स्थिति व संदर्भ के अनुसार परिवर्तन हो सकता है। इनके अंतर्गत शुभकामना-पत्र, बधाई-पत्र, निमंत्रण-पत्र, शोक संवेदना-पत्र, शिकायती-पत्र, समस्यामूलक पत्र, संपादक के नाम पत्र आदि आते हैं।

पत्र के अंग

पत्र का वर्ग कोई भी हो, उसके चार अंग होते हैं –

(i) पता और दिनांक (ii) संबोधन तथा अभिवादन (iii) पत्र की सामग्री या कलेवर (iv) पत्र को समाप्ति या समापन भाग

(i) पता और दिनांक

अनौपचारिक पत्र के बाई ओर ऊपर कोने में पत्र-लेखक का पता लिखा जाता है और उसके नीचे तिथि दी जाती है। औपचारिक पत्र में बाई ओर प्रेषक के विभाग का नाम, पता व दिनांक दिया जाता है। इसके बाद बायीं ओर ही प्राप्तकर्ता का नाम, पद, विभाग आदि दिया जाता है।

(ii) संबोधन तथा अभिवादन

दोनों तरह के पत्रों में पत्र पाने वाले के लिए किसी-न-किसी संबोधन शब्द का प्रयोग किया जाता है, जैसे-पूज्य/ आदरणीय/पूजनीय/प्रियवर/मान्यवर/महोदय/महोदया/श्रीमान आदि।

औपचारिक पत्रों में संबोधन से पहले पत्र का विषय अवश्य लिखा जाता है।

अनौपचारिक स्थिति में

‘प्रिय’ संबोधन का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है –

• अपने से छोटों के लिए

• अपने बराबर वालों के लिए

• घनिष्ठ व्यक्तियों के लिए

औपचारिक स्थिति में

• मान्यवर/प्रिय महोदय/महोदया

• प्रिय श्री/श्रीमती/सुश्री/नाम या उपनाम

• प्रिय नाम/श्री आदि।

(ख) औपचारिक पत्रों में पदनाम के बाद अल्पविराम का प्रयोग नहीं किया जाता।

(ग) अनौपचारिक पत्रों में अपने से बड़ों के लिए ‘नमस्कार’, ‘नमस्ते’, ‘प्रणाम’ जैसे अभिवादनों का प्रयोग होता है ।

जबकि औपचारिक पत्रों में इस तरह के अभिवादन की जरूरत नहीं होती।

अभिवादन शब्द लिखने के बाद पूर्ण-विराम अवश्य लगाना चाहिए; जैसे –

पूज्य पिता जी,

प्रणाम

(iii) पत्र की सामग्री या कलेवर

अभिवादन के बाद पत्र में मूल विषय या कथन लिखना चाहिए। इसे हम ‘कलेवर’ भी कह सकते हैं। इसमें हम अपनी बात कहते हैं। कलेवर के संबंध में निम्नलिखित सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए –

कलेवर की भाषा सरल होनी चाहिए तथा वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए।

लेखक द्वारा लिखी गई बातों का अर्थ स्पष्ट होना चाहिए।

कलेवर बहुत विस्तृत नहीं होना चाहिए।

सरकारी पत्र में यदि काटकर कुछ लिखा जाता है तो उस पर छोटे हस्ताक्षर कर देने चाहिए।

पत्र में पुनरुक्ति नहीं होनी चाहिए।

पत्र लिखते समय ‘गागर में सागर’ भरने की शैली को अपनाया जाना चाहिए।

(iv) पत्र की समाप्ति या समापन भाग

अनौपचारिक पत्र के अंत में लिखने वाले और पाने वाले की आयु, अवस्था तथा गौरव-गरिमा के अनुरूप स्वनिर्देश बदल जाते हैं; जैसे-तुम्हारा, आपका, स्नेही, शुभचिंतक, विनीत आदि।

औपचारिक पत्रों का अंत प्राय: निर्धारित स्वनिर्देश द्वारा होता है; यथा-भवदीय, आपका, शुभेच्छु आदि। इसके बाद पत्र लेखक के हस्ताक्षर होते हैं। औपचारिक पत्रों में हस्ताक्षर के नीचे प्राय: प्रेषक का पूरा नाम और पद का नाम लिखा जाता है। विशेष-परीक्षा में प्रेषक के नाम के स्थान पर ‘क० ख० ग० ‘ लिखना चाहिए। पते के स्थान पर ‘परीक्षा भवन’ तथा नगर के स्थान पर ‘अ० ब० स० ‘ लिख देना चाहिए। इससे उत्तर पुस्तिका की गोपनीयता भंग नहीं होती है।

I. आवेदन-पत्र

1. मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक को ‘मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव’ पद के लिए एक आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 23 मार्च, 20XX

महाप्रबंधक

मानव संसाधन विभाग

(दिल्ली)

विषय- मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव पद हतु आवेदन।

महोदय

मुझे ‘रोजगार समाचार’ दिनांक ……………… · में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके विभाग में ‘मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव’ की जरूरत है। मैं अपनी योग्यता व अनुभव के आधार पर स्वयं को इस पद के लिए उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –

नाम- क०ख०गा० नारंग

पिता का नाम- श्री अ०ब०स० नारंग

जन्मतिथि- 10.12.1982

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1996, 75% अंक

2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई० 1998, 80% अंक

3. बी०ए०, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2001, 60% अंक

4. पीजीडी बी०एम०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2003, 70% अंक

अनुभव- विक्रय प्रतिनिधि के रूप में हिंदुस्तान लीवर कंपनी का कार्यानुभव।

मैं वचन देता हूँ कि यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो मैं पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते हुए आपको संतुष्ट रखने का पूर्ण प्रयास  करूँगा।

धन्यवाद।

भवदीय

° ……………………

(क०खoo नारंग)

संलग्नक-

1. 10वीं की सत्यापित प्रतिलिपि

2. 10 + 2 की सत्यापित प्रतिलिपि

3. बी०ए० की सत्यापित प्रतिलिपि

4. पीजीडी बी०एम० की सत्यापित प्रतिलिपि

2. मेरठ स्थिति ‘ लोकायन ‘ संस्था ‘ को घर-घर जाकर वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के बारे में एक सवक्षण करना हो। नवयुवकों की आवश्यकता है। अभ्यर्थी दवारा संस्था के सचिव को अपनी योग्यता और रुचियों काविवरण देते हुए आवेदन-पत्र ।

परीक्षा भवन

मेरठ

दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

सचिव महोदय

‘ लोकायन ‘ संस्था

मेरठ (उत्तर प्रदेश)।

विषय- ‘सर्वेक्षणकर्ता’ हतु आवेदन-पत्र।

महोदय

मुझे ‘ दैनिक भास्कर ‘ समाचार-पत्र दिनांक 10 अप्रैल ……… में प्रकाशित विज्ञापन से ज्ञात हुआ कि आपकी संस्था को वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के बारे में सर्वेक्षण करने के लिए युवाओं की जरूरत है। मैं स्वयं को इस कार्य के लिए अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है- नाम- क०ख०गo कुमार

पिता का नाम- श्री अ०ब०स० दास

जन्मतिथि- 15.07.1981

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1997, प्रथम श्रेणी

2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई० 1999, प्रथम श्रेणी

3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2002, द्वतीय श्रेणी

4. लोक संपर्क, डिप्लोमा, इग्नू 2003, प्रथम श्रेणी

मैं वायदा करता हूँ कि यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो इस कार्य को मैं पूरी निष्ठा से करूंगा। आशा है आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

° ……………………

(क०ख०ग० कुमार)

संलग्न- सभी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

3. गांधी जी के जीवन और दर्शन पर लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में काम करने के लिए कुछ युवक-युवतियों की आवश्यकता है। व्यवस्थापक, गांधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली को स्ववृत्त का उल्लेख करते हुए आवेदन पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 16 मार्च 20XX

व्यवस्थापक

गांधी दर्शन,

राजघाट, नई दिल्ली।

विषय- प्रदर्शनी में कार्य करने हतु आवेदन-पत्र।

महोदय

मुझे समाचार-पत्र से ज्ञात हुआ कि आपके संस्थान द्वारा गांधी जी के जीवन और दर्शन पर प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इसके लिए कुछ युवक-युवतियों की आवश्यकता है। मैं इस प्रदर्शनी में कार्य करना चाहता हूँ क्योंकि गांधी जी मेरे आदर्श हैं। उनके दर्शन से मैं बहुत प्रभावित हूँ। आज की अनेक समस्याएँ गांधी-दर्शन का पालन करने से समाप्त हो सकती हैं। आशा है कि आप मुझे इस प्रदर्शनी में काम करने का अवसर प्रदान करेंगे। मेरा स्ववृत्त इस प्रकार है नाम- कoख०ग कुमार

पिता का नाम- श्री अ०ब०स० कुमार

जन्मतिथि- 20.09.1989

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई०, दिल्ली, 2004, 75% अंक

2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई०, दिल्ली, 2006, 60% अंक

3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2009, 50% अंक

विशेष रुचि- गांधी-दर्शन का विशेष अध्ययन।।

भवदीय

° ……………………

(क०ख०ग० कुमार)

संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

4. एक बहुराष्ट्रीय बैंक को अपनी ग्राहक-संख्या में विस्तार के लिए कुछ सहायक चाहिए। अभ्यर्थी दवारा अपनी रुचि, योग्यता और अनुभव का उल्लेख करते हुए बैंक के प्रबंधक को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 16 मार्च 20XX

प्रबंधक

………….. बैंक

दिल्ली।

विषय- सहायकों की भर्ती के सबध में आवेदन-पत्र/

महोदय

मुझे दिनांक …………….. के ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके बैंक को कुछ सहायकों की जरूरत है। मैं इस कार्य के लिए स्वयं को अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –

नाम-कoख०ग० दास

पिता का नाम-श्री अ०ब०स० दास

जन्मतिथि-10.10.1988

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 2003, 65% अंक

2. 10+2 वाणिज्य, सी०बी०एस०ई० 2005, 60% अक

3. बी०कॉम० जामिया मिलिया विश्वविद्यालय 2008, 55% अंक

4. कंप्यूटर कोर्स–एक-वर्षीय डिप्लोमा

रुचि- वाणिज्य का ज्ञान प्राप्त करना।

अनुभव- दिल्ली के सहकारी बैंक में दो वर्ष का सहायक पद का अनुभव।

आशा है आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे तथा मुझे अवसर देंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

° ……………………

(क०ख०ग० दास)

संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

5. ‘हस्तक्षेप’ अलीगढ़, उत्तर प्रदेश को ऐसे युवक-युवतियों की आवश्यकता है जो गरीब तथा श्रमिक व्यक्तियों में जाकर हुए उक्त संस्था के सचिव को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

अलीगढ़

दिनांक: 15 मार्च 20XX

सचिव

हस्तक्षेप

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)।

विषय- ‘एड्स ‘ के विषय में जागरूकता फैलाने के सबध में आवेदन-पत्र।

महोदय

मुझे समाचार-पत्र ‘दैनिक भास्कर’ से पता चला है कि आपकी संस्था को ऐसे युवक-युवतियों की आवश्यकता है जो गरीब और श्रमिकों में ‘एड्स’ के बारे में जागरूकता फैला सकें। यह समाज-कल्याण का कार्य है और मैं इस कार्य में अपना योगदान करना चाहता हूँ। मेरी रुचि भी समाज-सेवा में रही है। आशा है आप मुझे इस सेवा का अवसर प्रदान करके कृतार्थ करेंगे।

मेरा विवरण निम्नलिखित है-

नाम- क०ख०ग० गुप्ता

पिता का नाम- श्री अ०ब०स० गुप्ता

जन्मतिथि– 15.03.1985

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड 2000, प्रथम श्रेणी

2. बारहवीं 2002, प्रथम श्रेणी

3. बी०ए०, मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ 2005, द्रवितीय श्रेणी

4. ‘लोक संपर्क’ में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (एक-वर्षीय), मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ

रुचि- लोगों से मेलजोल बढ़ाना।

भवदीय

° ………………….

क०ख०ग० गुप्ता

संलग्नक- सभी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

6. कल्पना कीजिए कि कोई अभ्यर्थी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना अध्ययन पूरा कर लिया है और ‘नवभारत टाइम्स’ अखबार में पत्रकार पद के लिए आवेदन भेजना चाहता है। इसके लिए अभ्यर्थी दवारा लिखा गया आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 1 मार्च 20XX

संपादक

नवभारत टाइम्स,

नई दिल्ली।

विषय- पत्रकार पद के लिए आवदन।

महोदय

आपके समाचार- पत्र में दिनांक ’ को प्रकाशित विज्ञापन से ज्ञात हुआ कि आपके समाचार-पत्र में पत्रकार के कुछ पद रिक्त हैं। मैं स्वयं को इस पद के लिए योग्य मानता हूँ। मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि यदि आप मुझे अवसर देंगे तो मैं अपना कार्य निष्ठा के साथ  करूँगा।

मेरा परिचय निम्नलिखित है-

नाम- क०ख०ग० कुमार

पिता का नाम- अ०ब०स० कुमार

जन्मतिथि- 15.06.1982

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1997, 65% अंक

2. बारहवीं, सी०बी०एस०ई० 1999, 55% अंक

3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2002, 50% अंक

4. पत्रकारिता में दो-वर्षीय डिप्लोमा, जे०एन०यू० से प्रथम श्रेणी

कार्यानुभव- सांध्य दैनिक में एक वर्ष का अनुभव

सधन्यवाद!

भवदीय

° ………………….

(क०ख०गo कुमार)

संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

7. अपनी ग्राहक संख्या बढ़ाने के लिए एक प्रतिष्ठित समाचार-पत्र को ग्रीष्मावकाश में घर-घर जाकर प्रचार करने वाले -नवयुवतियों की आवश्यकता है। अभ्यार्थी दवारा अपनी रुचि, कुशलता, अनुभव आदि का उल्लेख हुए मुख्य प्रबंधक को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

मुख्य प्रबंधक

क०खoo समाचार-पत्र .

नई दिल्ली।

विषय- प्रचार के लिए सहायकों के पद हतु आवेदन-पत्र।

महोदय

मुझे आपके समाचार-पत्र में दिनांक ’ को प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके समूह को ग्रीष्मावकाश मैं घर-घर जाकर प्रचार करने के लिए नवयुवक/नवयुवतियों की आवश्यकता है। मैं उक्त पद हेतु स्वयं को उपयुक्त उम्मीदवार समझता हूँ।

मेरा संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

नाम- अ०ब०स० सोलंकी

पिता का नाम- श्री यoर०ल० सोलकी

जन्मतिथि- 10.07.1988

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 2004, प्रथम श्रेणी

2. बारहवीं, सी०बी०एस०ई०, 2006, द्रवितीय श्रेणी

3. सेल्स मैनेजमेंट का एक-वर्षीय डिप्लोमा 2007

कार्यानुभव- दो वर्ष का स्थानीय अखबारों में बिक्री सहायक का अनुभव।

मान्यवर, यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो मैं पूरी निष्ठा से काम करूंगा तथा समाचार-समूह के लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करूंगा। आशा है कि आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

° ………………….

(अ०ब०स० सोलंकी)

संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

8. राजीव गांधी फ़ाउंडेशन उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति प्रदान करती है। अभ्यर्थी दवारा अपनी योग्यताओं का परिचय देते हुए संस्था के सचिव को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 16 अप्रैल 20XX

सचिव

राजीव गांधी फ़ाउंडेशन

नई दिल्ली।

विषय- छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र ।

महोदय

मुझे दिनांक……………. · को ‘दैनिक हिंदुस्तान’ में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपकी संस्थान उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करती है। मैं इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा विवरण इस प्रकार है-

नाम- क०ख०ग० कुमार

पिता का नाम- श्री अ०ब०स० सिंह

जन्मतिथि- 20.09.1998

शैक्षणिक योग्यता- बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2009, 80% अंक

वर्तमान कक्षा-स्नातकोत्तर (प्रथम वर्ष)

कॉलेज- हसराज कॉलेज

परिवार की मासिक आय- 7000 रुपये प्रतिमाह

परिवार के सदस्य- सात

आशा है आप यह छात्रवृत्ति प्रदान करके मुझे भविष्य में पढ़ाई जारी रखने की सुविधा प्रदान करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

° …………………

(कooo कुमार)

संलग्नक-बी०ए० तथा पिता की आय का प्रमाण-पत्र।

प्रधानाचार्य की टिप्पणी

मैं पवन कुमार के उपर्युक्त विवरण को सत्यापित करता हूँ तथा इस मेधावी छात्र को छात्रवृत्ति देने की अनुशंसा करता हूँ।

o

प्रधानाचार्य

दिनांक – ………………….. .

मुहर

9. आपको कक्षा बारहवीं में हिंदी विषय में 95 अंक आए हैं। हिंदी में अपनी विशिष्ट योग्यता का उल्लेख करते हुए हिंदी अकादमी, दिल्ली को पत्र लिखकर उनकी पुरस्कार योजना व छात्रवृत्ति के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। [CBSE Sample Paper, 2015]

परीक्षा भवन

दिल्ली

दिनांक: 3 अप्रैल 20XX

सचिव

हिंदी अकादमी, पद्मानगर , नई दिल्ली।

विषय- विशिष्ट योग्यता वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति योजना की जानकारी के संबंध में ।

महोदय

विनम्र निवेदन यह है कि मैं सी०बी०एस०ई०, नई दिल्ली द्वारा मार्च 2015 में आयोजित बारहवीं की वार्षिक परीक्षा में शामिल हुआ था। इस परीक्षा में मुझे हिंदी में 95 प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। हमारे विद्यालय के हिंदी शिक्षक द्वारा ज्ञात हुआ कि विशिष्ट योग्यता वाले विद्यार्थियों को हिंदी अकादमी द्वारा पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति दी जाती है। मैंने इस संबंध में कई जगह से जानकारी लेने का प्रयास किया, किंतु इस संबंध में यथेष्ट जानकारी न मिल सकी। मुझे हिंदी विषय में विशिष्ट योग्यता अर्जित करने वालों को इस संस्था द्वारा प्रोत्साहित करने के लिए जो कदम उठाए जाते हैं, उनकी जानकारी चाहिए।

मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैंपस के किसी प्रतिष्ठित कॉलेज से हिंदी विषय में बी०ए० ऑनर्स करना चाहता हूँ। इस संस्था द्वारा प्राप्त पुरस्कार एवं छात्रवृत्तियाँ एक ओर मेरा उत्साहवर्धन करेंगी तो दूसरी ओर छात्रवृत्ति द्वारा मिली सहायता मेरी आर्थिक कठिनाइयों को दूर करके उच्च शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करेगी। आशा ही नहीं, वरन विश्वास है कि इस संबंध में आप जानकारी देकर मेरा मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन अवश्य करेंगे। धन्यवाद सहित,

भवदीय

ooo कुमार

II. शिकायत/समस्या/अन्य पत्र

10. आपके क्षेत्र की कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ गई है कि हर व्यक्ति अपने को असुरक्षित महसूस करता है। इसके कारणों की चर्चा करते हुए समाधान हेतु पुलिस आयुक्त को पत्र।

अथवा

दिन-दिन बिगड़ती कानून-व्यवस्था की समस्या के प्रति चिंता प्रकट करते हुए नगर के पुलिस-कमिश्नर को पत्र ।

परीक्षा भवन

मेरठ

दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

पुलिस आयुक्त

मेरठ (उत्तर प्रदेश)

विषय- बिगड़ती कानून-व्यवस्था के सबध में।

महोदय

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

इस क्षेत्र के निवासी भय के साये में रहने को विवश हैं। कुछ शरारती तत्व छीना-झपटी करते हैं। वे स्थानीय दुकानदारों व रेहड़ी वालों से हफ़्ता-वसूली भी करते हैं। उनकी माँग पूरी न करने पर वे मारपीट करते हैं। सूरज छिपने के बाद सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है, गलियों में चोरी की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय पुलिस के पास शिकायत की जाती है तो वे ऊपर के दबाव या रिश्वत के कारण उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करते। शाम को बस स्टैंड के पास कुछ असामाजिक तत्व खड़े रहते हैं। वे आती-जाती महिलाओं एवं लड़कियों पर अश्लील फ़ब्तियाँ कसते हैं। सायं सात-आठ बजते ही ये लोग यात्रियों के सामान एवं रुपये-पैसे छीन लेते हैं तथा विरोध करने पर चाकू मारने का दुस्साहस कर बैठते हैं।

आशा है कि आप इस समस्या पर गंभीरता से विचार करेंगे तथा ठोस कदम उठाएँगे ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।

सधन्यवाद

भवदीय

ooo

11. दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की समीक्षा एवं सुझाव देते हुए दूरदर्शन के निदेशक को पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 1 मार्च 20XX

निदेशक

दूरदर्शन केंद्र

नई दिल्ली।

विषय- दूरदर्शन के कार्यक्रमों की समीक्षा के संबंध में।

महोदय

मैं आपका ध्यान दिल्ली दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। आजकल दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में बदलाव नजर आ रहा है। पहले के मुकाबले आजकल के कार्यक्रमों में विविधता, गुणवत्ता में वृद्ध, आकर्षक प्रस्तुतीकरण शैली का प्रयोग मिलता है। निजी चैनलों की तुलना में दूरदर्शन के कार्यक्रम अश्लीलता से कोसों दूर हैं। ये कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की गरिमा को बनाए हुए हैं। इन सबके बावजूद दूरदर्शन के कार्यक्रम सभी आयु-वर्गों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं। खासतौर पर बच्चे, युवा व गृहणियाँ अन्य चैनलों की तरफ अधिक आकर्षित हैं। इसका कारण दर्शकों की बदलती अभिरुचि तथा दूरदर्शन की परंपरागत कार्यशैली भी हो सकती है। दूरदर्शन पर सरकारी दबाव भी उसे सभी तरह के कार्यक्रम प्रसारित करने की छूट नहीं देता। समाचार-प्रसारण में दूरदर्शन को अपनी शैली में बदलाव की जरूरत है। उसे सरकारी प्रवक्ता का रूप छोड़कर जनता की आवाज बनना होगा।

आशा है आप मेरे सुझावों को ध्यान में रखकर कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

क०खoo

12. ग्रीष्मावकाश में आप भुवनेश्वर, पुरी आदि जाना चाहते हैं। इस संदर्भ में ओडिशा के दर्शनीय स्थलों, परिवहन, अवस आव के बारे में वित्त सूचना माँगने के लिए प्रबंधक, ओडिशा पर्यटन विकास निगम, भुवनेश्वर को पत्र।

परीक्षा भवन

पटना

दिनांक: 3 मार्च 20XX

प्रबंधक महोदय

ओडिशा पर्यटन विकास निगम

भुवनेश्वर।

विषय- आोडिशा के पर्यटन स्थलों की जानकारी के सबध म।

महोदय

मैं इस ग्रीष्मावकाश में अपने परिवार के साथ भुवनेश्वर, पुरी आदि दर्शनीय स्थानों की यात्रा करना चाहता हूँ। मुझे इस क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था, आवास-सुविधा तथा सभी दर्शनीय स्थलों की जानकारी नहीं है। यदि मुझे आपके विभाग द्वारा प्रकाशित दर्शनीय स्थलों की जानकारी, परिवहन सुविधा, गाइड आदि संबंधी पुस्तिका उपलब्ध करा दी जाए तो भ्रमण के दौरान होने वाली परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है।

आपसे अनुरोध है कि मुझे ओडिशा के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के रोड मैप, उपयुक्त होटल, धर्मशाला तथा खान-पान के संबंध में जानकारी देने की कृपा करें। इसके लिए मैं निर्धारित शुल्क भी प्रेषित कर रहा हूँ।

धन्यवाद।

भवदीय

क०ख०ग०

13.आपका पानी का मीटर काफी समय से खराब है। इसकी शिकायत नगर निगम के कार्यपालक अभियंता से करते हुए पत्र।

परीक्षा भवन

पटना

दिनांक: 27 मार्च 20XX

कार्यपालक अभियंता

नगर निगम

पटना।

विषय- पानी का मीटर खराब होन के संदर्भ में।

महोदय

मैं आपका ध्यान अपने घर पर लगे पानी का मीटर खराब होने की ओर आकर्षित करता हूँ। पानी का यह मीटर पिछले पाँच माह से खराब है। इस बारे में मीटर की रीडिंग लेने वाले कर्मचारी से लिखित शिकायत भी की गई थी, परंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद जल बोर्ड ने एक निश्चित रकम का बिल भेजना शुरू कर दिया। वास्तव में मीटर के खराब होने से पानी की खपत का अनुमान नहीं लग पा रहा है। अत: यथाशीघ्र पानी का मीटर ठीक करवाने अथवा इसे बदलवाने की व्यवस्था कराएँ। मैं यह भी उल्लेख कर दूँ कि मीटर ठीक करवाने या बदलवाने का जो भी व्यय होगा, उसे मैं वहन करूंगा। आपसे प्रार्थना है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर यथोचित कार्यवाई करने की कृपा करें।

सधन्यवाद

भवदीय

ooo

संलग्नक- भुगतान किए गए पुराने बिलों की छायाप्रति।

14. नवीन के घर का फोन खराब पड़ा रहता है। क्षेत्र के टेलीफोन एक्सचेंज में प्रबंधक को शिकायती पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 1 सितंबर 20XX

प्रबंधक महोदय

टेलीफोन एक्सचेंज

दरियागंज, दिल्ली।

विषय- टलीफोन के खराब होने के संबंध में।

महोदय

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने खराब पड़े टेलीफोन की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ। मेरा टेलीफोन, जिसका नं० 22015XXX है, पिछले एक महीने से समुचित रूप से काम नहीं कर रहा है। यह कभी खराब हो जाता है तो कभी अपने-आप ठीक हो जाता है। इस बारे में विभाग से कई बार शिकायत की जा चुकी है, परंतु कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। हमारे काम पर जाने के बाद घर में वृद्ध माता-पिता रह जाते हैं। वे अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए इस फोन का सहारा लेते थे, पर फोन खराब होने से वे पंगु बनकर रह गए हैं। ऑफ़िस से आने के बाद ही उनके स्वास्थ्य के बारे में हमें कुछ पता चल पाता है। इस कारण मुझे घोर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आपके विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा है।

आपसे प्रार्थना है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए हस्तक्षेप करें तथा संबंधित कर्मचारियों को फोन ठीक करने का आदेश देने का कष्ट करें। इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय

नवीन

15. एक दिन सुबह जागने के बाद आपने पाया कि रात में आपके घर में चोरी हो गई है । आपने पुलिस को सूचित किया, किंतु पुलिस नहीं आई। थाने जाने पर आपकी शिकायत लिखी भी नहीं गई है । पूरी जानकारी देते हुए क्षेत्र के पुलिस उपयुक्त को पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 23 मार्च 20XX

पुलिस उपायुक्त

य०र०ल० कॉलोनी

ooo नगर ।

विषय- पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के सबध में।

महोदय

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान मोतीनगर थाने की पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। श्रीमान जी, मैं च०छ०ज० मोहल्ले में डी०-90 का निवासी हूँ। दो दिन पहले मंगलवार की रात को कुछ चोर हमारे घर में घुस गए। वे कुछ कीमती सामान चुरा ले गए। सुबह उठने पर हमें पता चला कि घर में चोरी हो गई। हमने तुरंत ही 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। काफी देर तक पुलिस नहीं आई तो मैं स्वयं थाने गया तथा सारी घटना बताई। वहाँ तैनात पुलिस ने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही प्राथमिकी दर्ज की। उलटे मुझसे ऊटपटाँग सवाल पूछे गए तथा मुझे ही लापरवाह बताया गया। उनके इस रवैये से मैं बहुत परेशान हुआ।

आपसे निवेदन है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर यथोचित कदम उठाने का कष्ट करें तथा थाने के पुलिसक. र्मियों को चोरों को पकड़ने का आदेश देने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय

ooo

16. वन-महोत्सव के अवसर पर लगाए गए वृक्ष उदयान विभाग के उपेक्षा भरे व्यवहार के कारण सूखते जा रहे हैं। उदयान विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर उचित कार्यवाही के लिए अनुरोध कीजिए।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 2 मार्च 20XX

निदेशक महोदय

उद्यान विभाग

नई दिल्ली।

विषय-विभागीय उपेक्षा से सूखते वृक्षों के संध संबंध में।

महोदय

मैं आपका ध्यान इस विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही की तरफ दिलाना चाहता हूँ जिसके कारण वन-महोत्सव के अवसर पर लगाए गए वृक्ष सूखते जा रहे हैं।

श्रीमान जी, इस वर्ष वन विभाग ने वन-महोत्सव बड़े जोर-शोर से मनाया। हमारे क्षेत्र में लोगों ने बड़ी संख्या में पौधारोपण कार्य किया। इन पौधों की देखभाल का जिम्मा उद्यान विभाग का था। विभाग के कर्मचारियों ने इन पौधों में न तो समय पर पानी दिया और न ही आवारा पशुओं से इनकी रक्षा की। सिंचाई तथा देखरेख के अभाव में ये पौधे सूखते जा रहे हैं। यदि विभाग को इन पौधों की देखभाल नहीं करनी थी तो वन-महोत्सव पर पौधे लगवाने की खाना-पूर्ति नहीं करनी चाहिए थी। विभाग की यह लापरवाही पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक है।

आपसे अनुरोध है कि आप अधीनस्थ कर्मियों को अपने कर्तव्य का बोध कराएँ तथा इन पौधों की देखभाल के लिए उपयुक्त निर्देश दें ताकि वन-महोत्सव मनाने का उद्देश्य सार्थक हो सके।

धन्यवाद।

भवदीय

ooo

17. प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश दिलाने में अभिभावकों को विशेष समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के निदान के लिए राज्य के शिक्षा निदेशक को पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 3 मार्च 20XX

निदेशक

शिक्षा निदेशालय

अ०ब०स० नगर, य०र०ल० शहर।

विषय-प्राथमिक कक्षाआों में प्रवश-सबधी समस्या के सबध म।

महोदय

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश-संबंधी समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। श्रीमान जी, फरवरी माह से स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले प्रारंभ हो जाते हैं। अनेक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। अभिभावकों को तरह-तरह से परेशान किया जाता है। कुछ स्कूलों’ में फ़ॉर्म समाप्त हो जाते हैं तो कुछ स्कूल में ‘सीट नहीं है’ का बोर्ड बाहर लगा देते हैं। कुछ स्कूल छोटे बच्चों व अभिभावकों को साक्षात्कार के नाम पर परेशान करते हैं। प्रवेश के समय बच्चे की आयु में भी एकरूपता का अभाव है। अधिकतर स्कूल दाखिले के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूलते हैं।

आपसे अनुरोध है कि आप व्यक्तिगत रुचि लेकर प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश संबंधी नियम बनाकर एकरूपता प्रदान करें तथा डोनेशन लेने वाले स्कूलों के खिलाफ़ कार्रवाई करने का कष्ट करें।

धन्यवाद।

भवदीय

क०खoग०

18.आपके नगर/कस्बे का एक नवयुवक सैनिक देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। एक वर्ष बीत जाने पर भी उसकी बेसहारा माँ को कोई सहायता नहीं मिली। उसकी दयनीय दशा बताते हुए तुरंत राहत के लिए रक्षा मंत्री, रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम पत्र।

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 17 जनवरी 20XX

माननीय रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली।

विषय- शहीद सेनिक की माँ की आर्थिक सहायता दिलवाने के सबध में।

महोदय

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान एक शहीद सैनिक की माँ की आर्थिक अभाव में होने वाली कठिनाइयों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। हमारे जिले के सूबेदार अ०ब०स० सीमा पर आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। सरकार ने उनकी शहादत पर पाँच लाख रुपये और पेंशन देने की घोषणा की थी। इस घटना को एक वर्ष बीत गया, परंतु उनके परिवार को कोई राहत नहीं दी गई। उनकी माँ बेसहारा हैं तथा वे अपना गुजर-बसर करने में सक्षम नहीं हैं। सरकार सैनिकों के परिवारों की देखभाल का दंभ भरती है, परंतु ऐसी घटनाएँ आम नागरिक का हौसला तोड़ती हैं। सरकार का यह उपेक्षा-भाव सेना की सेवा के प्रति उदासीनता को बढ़ा रहा है। सरकारी सहायता से माँ को बेटा तो नहीं मिल पाएगा, परंतु उसे दैनिक जीवन में आर्थिक संघर्ष से राहत अवश्य मिलेगी।

आपसे विनम्र निवेदन है कि आप इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर स्व० अ०ब०स० की माँ को शीघ्रातिशीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु संबंधित अधिकारियों को आदेश प्रदान करने की कृपा करें।

धन्यवाद सहित।

भवदीय

क०खoग०

19. सड़क को चौड़ा करने के बहाने आवश्यकता से अधिक पेड़ काटे गए। इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए वन एवं पर्यावरण विभाग को एक पत्र

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक: 3 अक्टूबर 20XX

प्रश्न 1) अपने शहर के मेयर को पत्र लिखकर अपने क्षेत्र में जल जमाव की समस्या के समाधान की मांग करें। आप रामगढ़ की धर्म कॉलोनी के अध्यक्ष हैं।

सेवा में
संपादक महोदय
श स ह दैनिक
नई दिल्ली -110077

विषय: जल भराव की समस्या

माननीय महोदय, इस पत्र का लक्ष्य वार्ड 2 ई, मौजपुर में जल भराव की अत्यधिक समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना है। बरसात के मौसम में जल जमाव लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है और इसे तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।

बारिश के मौसम के कारण यह समस्या बढ़ गई है। महज पांच मिनट की अवधि की बारिश के कारण नालियों के बहाव से हर जगह पानी भर जाता है। गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे खतरनाक दुर्घटनाएँ होने की संभावना बनी रहती है। कई मैनहोल खुले पड़े हैं जो बरसात के दिनों में घातक हो जाते हैं। कल स्कूल जाने वाले एक छात्र को उस समय बड़ी चोट लगी जब वह अपनी साइकिल को ऐसी कठिन परिस्थितियों में आगे ले जाने के लिए संघर्ष कर रहा था। नौकरी पर जाने वाले और अन्य लोग समान रूप से प्रभावित होते हैं। घर से सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया है। कुछ घरों में पानी भी घुस जाता है। यह न केवल हमारे कार्यक्रम को प्रभावित करता है बल्कि डेंगू जैसी कई जल जनित बीमारियों को भी जन्म देता है। दिल्ली में डेंगू के मामले पहले से ही अधिक हैं। यह केवल समस्या को और जटिल बनता  है।

 मैं आपसे संबंधित अधिकारियों को सक्रिय करने का अनुरोध करता हूं। किसी भी महामारी से बचने के लिए नालियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए। नालियों और मैनहोलों को ढंकना समय की नितांत आवश्यकता है। किसी के साथ किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए सड़कों और गलियों के उचित रखरखाव और मरम्मत की आवश्यकता है। मैं चाहूंगा कि कृपया इस समस्या का संज्ञान लें, जो हमारे जीवन में बहुत बाधा डाल रही है।

त्वरित प्रतिक्रिया की बहुत सराहना की जाएगी।

धन्यवाद
भवदीय
अध्यक्ष

धर्म कॉलोनी
रामगढ़
नई दिल्ली -110077

औपचारिक पत्र लेखन विषय 2:

प्रश्न 2) “स्ट्रीट लाइट की समस्या” विषय पर संपादक को एक पत्र लिखें.

सेवा में
संपादक महोदय
श स ह दैनिक
नई दिल्ली -110077

विषय: स्ट्रीट लाइट की समस्या

आपके प्रतिष्ठित अखबार के सम्मानित मंच के माध्यम से, मैं आपके क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा।

हमने ख़राब स्ट्रीट लाइट के बारे में कई बार शिकायत की है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रात में सड़क के संकेत पूरी तरह से अदृश्य हो जाते हैं। स्पीड ब्रेकर, गड्ढे और मैनहोल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं, जिससे हमारे क्षेत्र में घातक दुर्घटनाओं का खतरा अधिक होता है। इससे नागरिकों के जीवन को भारी खतरा है। यहाँ शाम के बाद बहुत अंधेरा और असुरक्षित माहौल हो जाता है।

अंधेरा होने के बाद महिलाएं और बच्चे अपने घर से बाहर निकलने से डरते हैं। सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से प्रभावहीन हैं। चोरी की घटनाएँ असमान रूप से बढ़ रही हैं। असामाजिक तत्वों को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है और इस विषय पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। यह वास्तव में नागरिकों में भय की भावना को बढ़ा रहा है। अपहरणकर्ता ऐसे क्षेत्रों को उनके अपवित्र कृत्यों के लिए अनुकूल पाते हैं।

इस खतरे को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। यह पूरी तरह से समाज के कानून और व्यवस्था को ठप्प कर रहा है. इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेने का अनुरोध है। स्ट्रीट लाइट का रखरखाव हमारे सुचारू और सुरक्षित जीवन के लिए तत्काल आवश्यक है।

हम इस मामले में आपके समर्थन की बहुत सराहना करेंगे।

धन्यवाद
भवदीय
य र ल 
धर्म कॉलोनी
रामगढ़
नई दिल्ली -110077

प्रश्न 5) अपने एटीएम कार्ड को फिर से जारी करने के लिए बैंक प्रबंधक को एक पत्र लिखें।

सेवा में
संपादक महोदय
श स ह दैनिक
नई दिल्ली -110077

विषय: मेरे एटीएम कार्ड को फिर से जारी करने के लिए आवेदन

यह मेरे एटीएम कार्ड के बारे में कुछ महीनों से चली आ रही समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए है।

मेरे एटीएम जनवरी 2019 से मई 2019 तक पांच महीनों के लिए किसी भी लेन-देन से नहीं गुजरा। जिसके कारण यह अवरुद्ध हो गया है और आगे के लेनदेन से इनकार कर दिया गया है। मैंने बैंक में संबंधित अधिकारियों से सलाह ली और उन्होंने मुझे फिर से नया ए टी एम जारी करवानेके लिए एक आवेदन दायर करने की सलाह दी। उसी विवरण के तहत मैंने अपना आवेदन दायर किया और इसे संबंधित काउंटर पर भेज दिया, जहां से मुझे 3-4 सप्ताह तक इंतजार करने के लिए कहा गया था। दी गई अवधि के बाद मैंने फिर से बैंक का दौरा किया और उन्होंने आवेदन को फिर से दाखिल करने के लिए कहा। मैंने उसी के संबंध में दो आवेदन दायर किए हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। न तो मुझे अपना एटीएम कार्ड मिला है और न ही कोई प्रतिक्रिया।

कृपया मुझे सूचित करें कि मेरा एटीएम कार्ड पुनः प्राप्त करने में कितना समय लगेगा। अगर कुछ अन्य प्रक्रिया का पालन किया जाना है, तो कृपया मुझे इसके बारे में निर्देश दें। मैं कई बार बैंक में जा चुका हूं लेकिन यह मुझे इसका हल नहीं मिल रहा है। यह वास्तव में मुझे मुश्किल पैदा कर रहा है। जल्द से जल्द इस मामले को संज्ञान में ले।

त्वरित प्रतिक्रिया की बहुत सराहना की जाएगी।

धन्यवाद
भवदीय
य र ल 
धर्म कॉलोनी
रामगढ़
नई दिल्ली -110077

प्रश्न 16) स्कूल के छात्रों को एक फिल्म दिखाने के बारे में पूछताछ करने वाले एक थिएटर के प्रबंधक को एक पत्र लिखें।

सेवा में

प्रबंधक महोदय

श स ह लिमिटिड

नई दिल्ली -110077

विषय: एक मूवी शो के बारे में पूछताछ।

इस पत्र का लक्ष्य हमारे स्कूल के छात्रों के लिए एक फिल्म शो के बारे में पूछताछ करना है। हम कक्षा 3 से 8 वीं के हमारे छात्रों के लिए एक मनोरंजन यात्रा की योजना बना रहे हैं।

स्कूल अधिकारियों ने हमारे छात्रों को एक प्रेरणादायक और कॉमेडी फिल्म दिखाने का फैसला किया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है कि वे इसमें मनोरंजन के साथ कुछ अलग सीखते हैं। एक ऐसी फिल्म जिस में शिक्षकों और छात्रों, दोनों के लिए सीखने के लिए कुछ है। सह-पाठयक्रम गतिविधियों की टीम ने निष्कर्ष निकाला है कि ‘हिचकी’ फिल्म इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है। मैं इसके कार्यक्रम के बारे में आपसे कुछ पूछताछ करना चाहता हूं.

अपने थिएटर की अग्नि सुरक्षा प्रणाली।

अग्निशमन विभाग से एन.ओ.सी. लाइसेंस।

क्या आपकी आपातकालीन स्थिति काम करने की अच्छी स्थिति में है।

आपके थिएटर की क्षमता। (स्टाफ सदस्यों को जोड़कर 400-500 सदस्यों के नामांकन की उम्मीद है)

वह पैकेज जो आप स्कूल यात्रा के लिए प्रदान करते हैं।

जलपान कॉम्बो आप प्रदान करते हैं।

अनुमानित कुल व्यय क्या है।

सभी आवश्यक विवरणों के साथ कृपया जवाब दें। त्वरित प्रतिक्रिया की बहुत सराहना की जाएगी।

धन्यवाद

भवदीय

द्विक जसलानी

अमेदा, सैदपुर

गाजीपुर , उ प्र 233221

प्रेस विज्ञप्ति (प्रेस रिलीज)

–    गुलाब चंद जैसल

प्रेस विज्ञप्ति (प्रेस रिलीज)

सरकारी आलेख का एक महत्वपूर्ण प्रकार है । जब सरकार के किसी विभाग के द्वारा अपने निर्णय को विस्तार से जनता के बीच प्रसारित करना होता है, तो इसके लिए वह विभाग सूचना के आलेख को तैयार कर पत्र प्रकाशन संस्थान के संपादक को पत्र मे प्रकाशित करने के लिए प्रेषित कर देता है। प्रकाशन संस्थान के द्वारा इस आलेख का प्रकाशन हू-ब-हू बिना किसी संशोधन के प्रकाशित किया जाता है । इस आलेख को प्रेस विज्ञप्ति कहते है।

प्रेस विज्ञप्ति कैसे लिखें

एक प्रेस विज्ञप्ति मीडिया के लिए एक लिखित बयान के सामान होता है । यह कई श्रेणी के समाचार आइटम जैसे, अनुसूचित घटना, व्यक्तिगत प्रोन्नति, पुरस्कार, नए उत्पाद और सेवाएँ, बिक्री उपलब्धियाँ, आदि की घोषणा के लिए उपयोग किया जाता है | यह एक महत्वपूर्ण कहानी उत्पन्न करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है | संवाददाताओं की एक कहानी पर विचार की योग्यता और भी बढ़ जाती है अगर उन्हे पहली बार में ही एक स्पष्ट प्रेस विज्ञप्ति प्राप्त हो जाए | यह पीआर का एक बुनियादी उपकरण है, उनके लिए जो उचित प्रारूप का उपयोग करते हैं | कैसे हम आपको दिखाएँगे |

1-एक वास्तविक शीर्षक लिखें: उसे स्पष्ट, संक्षिप्त और काम का होना चाहिए | शीर्षक, प्रेस विज्ञप्ति के प्रमुख बिन्दुओं का एक अत्यंत सुगठित संस्करण है | कई पेशेवर पीआर, पूरा लेख लिखने के बाद, शीर्षक को अंत में लिखने की सलाह देते हैं | अगर आप इस निर्देश का पालन करते हैं तो, पूरा लेख लिखने के बाद ही शीर्षक लिखने लोटे | शीर्षक पाठकों को आकर्षित करने वाला होना चाहिए और प्रेस विज्ञप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है |

हेडलाइन को बोल्ड में लिखें: एक बोल्ड हेडलाइन में आम तौर पर बाकी के लेख की तुलना में एक बड़े और गहरे फ़ॉन्ट आकार का उपयोग होता है | पारंपरिक प्रेस विज्ञप्ति द्वारा जारी की गयी सुर्खियों में वर्तमान काल का उपयोग करें और “आ” (a) और “दा” (the) का उपयोग ना करें, साथ ही कुछ संदर्भों में क्रिया के रूप जैसे “टू बी”(to be) के भी उपयोग से बचें |

पहला शब्द बड़े अक्षरों में लिखें: जिस प्रकार व्यक्तिवाचक संज्ञा को बड़े और गहरे शब्दों में लिखते हैं वैसे ही पहले शब्द को लिखें | ज्यादातर शीर्षक शब्द छोटे अक्षरों में लिखे जाते हैं, हालांकि नये प्रकार की “छोटे कॅप” (स्माल कॅप) फ़ॉन्ट शैली का प्रयोग करके अधिक सुचित्रित आकर्षक-खबर का भी उपयोग कर सकते हैं | हर शब्द को बड़े अक्षरों में लिखने की आवश्यकता नही है |

महत्वपूर्ण शब्दों को निकालें: प्रेस विज्ञप्ति शीर्षक बनाने के लिए सबसे आसान तरीका अपनी प्रेस विज्ञप्ति में से सबसे महत्वपूर्ण शब्दों को निकालें | इन कीवर्ड्स से, एक तार्किक और ध्यान आकर्षित करने वाले विज्ञापन का निर्माण करने का प्रयास करें | यदि शीर्षक के बाद एक सारांश वाक्य का प्रयोग कर रहे हैं तो , एक ही नियम लागू होते हैं | अधिक कीवर्ड का उपयोग कर आप खोज इंजन में बेहतर दृश्यता पा सकते हैं, और पत्रकारों और पाठकों को प्रेस विज्ञप्ति का सारांश प्राप्त करने में आसानी होती है | इस दिशा में पहले कदम को देखें, और विचार कर एक प्रेस विज्ञप्ति के शीर्षक को खोजने का प्रयास करें |

2- लेख की रूपरेखा तैयार करें: जैसे प्रेस विज्ञप्ति को एक समाचार कहानी में प्रदर्शित करना चाहते हैं वैसे ही उसे लिखें | और यह याद रखें कि अधिकतर पत्रकार बहुत व्यस्त होते हैं, और आपकी कंपनी की बड़ी घोषणा के बारे में उनके पास खोज करने का समय नहीं होता, और आप अपने प्रेस विज्ञप्ति में जो लिखते हैं पत्रकार उसी लेख को अपने विज्ञापन में आपके बड़े कार्यक्रम के बारे में बताने के लिए उपयोग करते हैं | आप जो भी अपने लेख मे लिखना चाहते हैं यहाँ लिखें |

जिस दिनांक और शहर में प्रेस विज्ञप्ति उत्पन्न हुई है उसका वर्णन करें: यदि शहर का नाम अस्पष्ट हो तो उसे ना लिखें जैसे की यदि प्रेस विज्ञप्ति किसी कंपनी के शिकागो संभाग की घटनाओं के बारे में न्यूयॉर्क में लिखा गया है |

प्रेस विज्ञप्ति का मुख्य या पहला वाक्य, पाठक का ध्यान आकर्षित करने योग्य और विज्ञप्ति में आप क्या बताना चाहते हैं उसे संक्षेप में वर्णित करने की क्षमता रखने वाला होना चाहिए | उदाहरण के लिए यदि शीर्षक “कार्परेण पब्लिशिंग रिलीसस न्यू डब्ल्यू डब्ल्यू II नॉवेल” यह है तो, पहला वाक्य इस प्रकार हो सकता है “कार्परेण प्रकाशन, लिमिटेड, ने आज अपना पहला उपन्यास, लोकप्रिय लेखक डार्सी कय द्वारा लिखित, जिसका शीर्षक द्वितीय विश्व युद्ध है, का प्रकाशन किया है” | यह पाठकों को शीर्षक के बारे में विस्तार से बताते हुए विवरण दे रहा है | अगले एक या दो वाक्य लेख के प्रमुख विषय के बारे में विस्तार से बता सकते हैं |

प्रेस विज्ञप्ति के तात्पर्य को संक्षेप में लिखें : बहुत लंबे वाक्य और पैराग्राफ के प्रयोग से बचें | दोहराव और फैंसी भाषा और भाषा के अति प्रयोग से बचें | लेख में सादगी का प्रयास करें, और कोई बेकार शब्द का प्रयोग ना करें |

पहले पैरा में (दो से तीन वाक्य के द्वारा) प्रेस विज्ञप्ति के सार को प्रस्तुत करें, और अतिरिक्त सामग्री का उपयोग कर लेख के विषय के बारे में विस्तार से बताएँ | इस तेज गति की दुनिया में, यदि लेख पढ़ने योग्य नही है तो, न तो पत्रकार, और न ही पाठक, पूरी प्रेस विज्ञप्ति को पढ़ने में रूचि दिखाएँगे |

वास्तविक तथ्य जैसे घटनाएँ, उत्पाद, सेवाएँ, लोग, लक्ष्य, उद्देश्य, योजना, परियोजनाएँ आदि को सम्मलित करें: ठोस तथ्यों का अधिकतम उपयोग करने का प्रयास करें |एक प्रभावी प्रेस विज्ञप्ति को लिखने के लिए एक सूची बनाने की अनिवार्यता है जिसमें निम्नलिखित स्पष्टीकरण जैसे – कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे के बारे में बताएँ |

3- “5 डब्ल्यू ” ( और एच) (5W and H) को स्पष्ट रूप से बतलाएँ: पाठकों को कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों और कैसे शब्दों का उपयोग के द्वारा प्री जानकारी मिलनी चाहिए | प्रेस विज्ञप्ति उत्पन्न करने के लिए ऊपर के उदाहरण का उपयोग करते हुए, नीचे दिए गए अंकों के साथ प्रसंग में चेकलिस्ट पर विचार करें |

यह किस बारे में है ? कार्परेण प्रकाशन।

वास्तविक खबर क्या है ? कार्परेण प्रकाशन पुस्तक का विमोचन कर रहे हैं |

यह कार्यक्रम कब होगा ? कल |

यह कार्यक्रम कहाँ होगा ? सभी प्रमुख बाजारों में, कल |

यह खबर क्यों है ? यह प्रसिद्ध लेखक, ‘डार्सी कय’ द्वारा लिखा गया है |

यह कैसे हो रहा है ? मुख्य समारोह शिकागो में एक किताब पर हस्ताक्षर करने के बाद सभी प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों में एक पुस्तक दौरे के लिए ले जाया जाएगा |

मूल बातें परिभाषित करने के साथ, खबर के साथ संबंधित लोग, उत्पाद, आइटम, तिथि और अन्य चीजों के बारे में जानकारी के साथ अंतराल में भरें |

यदि आपकी कंपनी समाचार का मुख्य विषय नहीं है, लेकिन प्रेस विज्ञप्ति का स्रोत है, तो लेख में यह स्पष्ट रूप से बताएँ |

इसे संक्षिप्त और प्रासंगिक रखें | यदि आप एक हार्ड कॉपी भेज रहे हैं, तो शब्दों में डबल स्पेस होना चाहिए |

आप जितना अपनी प्रेस विज्ञप्ति की प्रतिलिपि को छापने योग्य बनाएँगे, उतना ही उसकी किसी पत्रकार द्वारा रिपोर्टिंग के लिए चयनित होने की संभावना बढ़ जाएगी | सबसे पहले यह पता होना चाहिए की छापने योग्य का मतलब दिए हुए बाज़ार में क्या होता है और इस जानकारी का उपयोग कर किसी पत्रकार या संपादक को सम्पर्क करें |

4-  इसे अपने पाठकों के लिए साफ, स्पष्ट, और अनुकूल बनाएँ: जिसको भी आप अपनी प्रेस विज्ञप्ति भेज रहे हैं उसके इनबॉक्स में इसी प्रकार के एक दर्जन से अधिक लेख हैं और यदि आप चाहते हैं कि आपका लेख चुना जाना चाहिए, तो उसे अच्छा होना चाहिए | उसे सिर्फ़ अच्छा ही नही, लेकिन संभव हो तो उसे “प्रेस के लिए तैयार” भी होना चाहिए |

जब एक संपादक आपके लेख को देखता है, तो वह पहले ही क्षण से यही सोचता है कि, इन्हे मुद्रित करने के लिए कितना समय लगेगा | यदि आपका लेख त्रुटियों से भरा है, सामग्री की कमी, या सिर्फ उसे पुनर्जीवित करने की जरूरत है तो वे आपना समय इस पर बर्बाद नही करेंगे | इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपका व्याकरण अच्छा हो और जिस विषय पर आप लिखना चाहते हैं उससे संबंधित मूल जानकारी आपको होनी चाहिए |

आप लोगों को पढ़ने के लिए क्या देना चाहते हैं उस पर ध्यान देना चाहिए | अगर आप सही दर्शकों के लिए भेज रहे हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा | यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं तो अपना समय बर्बाद करना ठीक नही है | सही लोगों को खबर (समाचार, ना की विज्ञापन ) का एक हिस्सा दें और आप सही दिशा में काम कर रहे हैं |

यदि आप सुबह प्रेस विज्ञप्ति को भेजेंगे तो वे और अधिक ध्यान देंगे | यही कारण है कि वे पहले से ही जिस काम को कर रहे हैं उसी में आपके हिस्से को शामिल कर लेंगे | इसलिए यह अनिवार्य है कि आप विचारशील हों |

5 – एक साथ सहेज के रखें: अपनी प्रेस विज्ञप्ति के समर्थन में कुछ अधिक जानकारी लिंक प्रदान करें | क्या जिस कंपनी को आप बेच रहे हैं उनके पास ऑनलाइन अधिक जानकारी है जो पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है ? यदि इसका उत्तर हाँ है तो उसे भी जोड़ें |

यदि आपके पास जो सूचना है उसे लेकर आप परेशन हैं तो जो वहाँ पहले से ही है उस पर थोड़ा खोज कर लें | ऐसा हो सकता है कि किसी ने शायद, आप जो कवर कर रहे हैं उसी पर कभी कुछ लिखा हो और आप उसका उपयोग कर सकते हैं | PR Web[१] and PR Newswire[२] शुरू करने के लिए अच्छी जगह है।

    –गुलाब चंद जैसल

स्नातकोत्तर हिंदी अध्यापक, केंद्रीय विद्यालय हरसिंहपुर 

ललित निबंध क्या है?

ललित निबंध क्या है

हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के अनुसार–‘व्यक्तिगत निबंध का लेखक किसी एक विषय को छेड़ता है, किंतु जिस प्रकार वीणा के एक तार छेड़ने से बाकी सभी तार स्वतः झंकृत हो उठते हैं, उसी प्रकार उस विषय को छूते ही लेखक की चित्त-भूमि पर बँधे हुए सैकड़ों विचार बज उठते हैं।’ शास्त्र, लोक, मिथक सब आते हैं ललित निबंध में लेकिन शास्त्रीय मुद्रा में नहीं, सुर्तीठोंक मुद्रा में। यह लोक मुद्रा है और लोक में सब आते हैं, पशु-पक्षी जीव-जंतु, धरती-आकाश और जन-मन। इसीलिए ललित निबंधों में सब आते हैं कृतिकार के सृजनात्मक आकाश में पक्षी की तरह उड़ते हुए। द्विवेदी जी इसे ‘गप्प’ कहते हैं। ‘देवदारु’ में वे लकड़ी से भूत भगाने वाले पंडित जी कहानी सुनाने के बाद ‘गप्पा’ की महिमा-बखान करते हैं – ‘आदिकाल से मनुष्य गप्प हाकता आ रहा है, अब भी रचे जा रहा है। आजकल हम लोग ऐतिहासिक युग में जीने का दावा करते हैं। पुरखा मनुष्य ‘मिथकीय’ युग में रहता था, जहाँ वह भाषा के माध्यम को अपूर्ण समझता था। मिथक – गप्पें, भाषा की अपूर्णता को भरने का प्रयास हैं।’ भाषा बुरी तरह अर्थ से बँधी होती है। मिथक स्वच्छंद-विचरण करता है। आश्रय लेता है भाषा का, अभिव्यक्त करता है भाषातीत को। मिथकीय आवरणों को हटाकर उसे तथ्यानुयायी अर्थ देने वाले लोग मनोवैज्ञानिक कहलाते हैं, आवरणों की सार्वभौम रचनात्मकता को पहचानने वाले कला समीक्षक कहलाते हैं। दोनों को भाषा का सहारा लेना पड़ता है, दोनों धोखा खाते हैं। भूत तो सरसों में है। जो सत्य है, वह सर्जना शक्ति के सुनहरे पात्र में मुँह बंद किए ढँका-ही रह जाता है। एक-पर-एक गप्पों की परतें जमती जा रही हैं। सारी चमक सीपी की चमक में चाँदी देखने की तरह मन का अभ्यास मात्र है। गप्प कहाँ नहीं है, क्या नहीं है।’

साहित्य, सहित का भाव है। जो हित के साथ हो वह सहित। ‘हित’ की सूक्ष्म अर्थच्छटाओं में जाते हुए काशी के पंडित पट्टाभिराम शास्त्री ने उसके अर्थ किए – सहित, रस से सहित होना। पिहित – अर्थात ढँका हुआ हिरण्यमय पात्र से सत्य का मुँह हमेशा ढँका होता है। बड़े तीव्र सावित्र प्रकाश को पुकार लगानी पड़ती है कि सविता इसे ऐसा तपाओ कि ढक्कन खुल जाय। साहित्य में सत्य इसीलिए विहित रखा गया कि जिसका चित्र अनुभव के प्रकाश से अभिशप्त न हुआ हो, वह इस ढक्कन को उखाड़ न सके और सत्य का पूरा साक्षात्कार वह न कर सके। आधा गृहीत हो, आधा न गृहीत हो, कुछ दिखे, कुछ न दिखे – जब तक यह न दिखे हो तब तक साहित्य में पुनः पुनः आवर्तित होने की क्षमता कैसे आएगी? तुलसीदास ने ‘ज्यों मुखु मुकुरु मुकरु निज मानी, गति न जाइ अस अद्‍भुत बानी’ में वाणी की अपूर्णतता की बात की है कि अपने हाथ में आईना हो और उसमें अपने मुख का प्रतिबिंब पड़ रहा हो, आप अपने मुख को पकड़ना चाहें, पकड़ नहीं सकते। आईने को उलटिए-पुलटिए बस वह दिखेगा, पकड़ में नहीं आएगा। गप्प में शब्द का पूरा अर्थ पकड़ में नहीं आता, कुछ न कुछ छूट जाता है। छूट जाता है तब भी दूसरे चेहरे उसमें आते हैं लेकिन वे भी पकड़ में नहीं आते।                                                                                        बालमुकुंद गुप्त का एक लेख है ‘भँगेड़ी शिवशंभु’। ‘भँगेड़ी शिवशंभु’ का लक्ष्य विवेक, कभी शिथिल नहीं होता, ठीक वैसे ही बाहर से कोरा वाग-विलास प्रतीत होने वाले व्यक्तिव्यंजक निबंध का आधार नहीं छोड़ते। ‘भँगेड़ी शिवशंभु’ भंग के नशे में जिस विचार-सूत्र के प्रभाव में ऊँची उड़ान भरता है, वह साम्राज्यवाद के प्रति तीव्र युयुत्सा का भाव है। नशे की गहराई और विचार-धरातल की ऊँचाई का निर्वाह बालमुकुंद गुप्त बड़ी जागरूकता से करते हैं।।                        ललित या व्यक्ति व्यंजक निबंधों को अलग नाम देने का मुख्य कारण क्या था? कारण यह था कि इससे उन दूसरी अपेक्षाओं की काट हो जाएगी, जो निबंध के नाम से जाग उठतीं। हम निबंधों से विचार-वस्तु की अपेक्षा रखते, इतिहास और शास्त्र-चर्चा की अपेक्षा रख सकते। अज्ञेय कहते हैं, ‘ललित निबंध को ललित इसलिए कहा गया कि उससे ऐसी कोई अपेक्षा न की जाय।’ ललित निबंधों में सर्जनात्मकता पर बल है। सर्जनात्मक गद्य अच्छा गद्य होता है। उस पर व्यक्तित्व की छाप होती है जिससे अलग करके उस पर विचार नहीं किया जा सकता।                                    हिंदी गद्य के आरंभ काल से ही व्यक्तिव्यंजक निबंध लिखे जाते रहे हैं। तब से अब तक के लेखन में कुछ समान चीजें मिलती हैं – निस्संग फक्कड़पन के साथ आस-पास के जीवन से गहरा लगाव, भाषा के सभी धरातल पर उसकी संभावनाओं की खोज और नई भाषा रचने का उत्साह – नए शब्दों को गढ़ने, पुराने शब्दों को नया अर्थ देने, सामान्य जीवन के वाचक शब्दों और सामान्य मुहावरों को विशेष दीप्ति के साथ दमकाने का लक्ष्य, आधुनिक बोध – जो समसामायिक चेतना को कालातीत चेतना से जोड़ने का संकल्प लेकर ही उपस्थित होता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट, माधव मिश्र, गुलेरी जी, अध्यापक पूर्ण सिंह और परवर्ती पीढ़ी के हजारी प्रसाद द्विवेदी, सियारामशरन गुप्त, महादेवी वर्मा, रामवृक्ष बेनीपुरी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय, शिवप्रसाद सिंह, रमेशचंद्र शाह से लेकर श्रीराम परिहार तक और उसके बाद के भी निबंधकार, सभी ऊपर की विशेषताओं के किसी न किसी अनुपात के साझीदार हैं साथ ही ये सभी जीवन के बहुरूपी अनुभव के प्रमाता होने के कारण जीवन में भी उतने ही रमे हुए हैं, जितना अपने साहित्य बोध में, इसलिए इनमें एक सतरंगीपन मिलता है और वे बहुत आत्मीय हैं। उनमें एक विशेष प्रकार की उदासी मिलती है लेकिन वह एक गहरी संवेदना की उदासी है और उसकी खुशी समष्टि की उल्लसित चेतना का ज्वार है।             ललित निबंधों का भाषा से सरोकार कुछ ज्यादा-ही होता है। इसमें बहकने, बहकाने, बात को घुमाने, उसकी कहीं से कहीं पहुँचाने और द्विवेदी जी के शब्दों में बतरसने का सहारा लिया जाता है। इसलिए नहीं कि बहकाना या बतरसना अपने-आप में उद्देश्य है, बल्कि इन सबका एक-ही उद्देश्य है कि पाठक इनकी आत्मीयता की डोर में बँध जाय और उसकी ऐसी अंतरंगता हो जाय कि लेखक का परिवेश उसका अपना परिवेश हो जाए, लेखक के साझे की कहानियाँ उसके साझे की कहानियाँ हो जाय। उसके सामने उसकी देखी, अधदेखी या अनदेखी घटना आ जाय और प्रत्येक दिशा में उसे ऐसा लगे कि हमको दिखाया नहीं जा रहा है बल्कि हम स्वयं देख रहे हैं। इसलिए एक ओर तो निबंध लेखक सामान्य दैनंदिन जीवन की सामान्य घटना को बड़े सामन्य अनुभव से बात शुरू करेगा और उसे ऐसे बड़े संदर्भों से जोड़ देगा जो उसके पाठक की भी जातीय स्मृति में अंकित हो – वे संदर्भ उसके साहिय के हों, कला के हों या लोकवार्ता के हों।

उदाहरण के लिए द्विवेदी जी के निबंध ‘कुटज’ को लिया जा सकता है। वे यहाँ से शुरू करते हैं, ‘कुटज का फूल अधिकांश ने देखा नहीं है। एकाध ने देखा भी होगा तो भर-आँख नहीं देखा होगा और तब वे ले जाते है, कुटज के फूल तक और उसके ऐसे-ऐसे गुण बखानते हैं कि पाठक को लगने लगता है कि यह तो सचमुच नायाब चीज है। हमारा परिचय इससे पहले क्यों नहीं हुआ? खूब तो खिलता है जब बरसात आती है, जहाँ ऊसर जमीन होती है, कोई रस नहीं होता, नाटा-सा पेड़ फूलता है तो कितना सुंदर लगता है?

पंडित जी को जब विश्वास हो जाता है कि अब पाठक हमारे साथ हैं, तो वे उड़ जाते हैं। कालिदास का यक्ष बादल को जिस फूल से ‘अर्ध’ चढ़ाता है वह कुटज है। इस एक सूत्र से पाठक के मन में उत्सुकता जग जाती है और तब पंडित जी उसमें मनुष्य को लाते हैं, जो कभी हार नहीं मानता, कठिन से कठिन परिस्थितियों में कहीं भी रहता है, खड़ा रहता है, फूलता रहता है, तना रहता है, सबके उल्लास में उल्लसित रहता है। कुटज मनुष्य बन जाता है और मनुष्य कुटज। कविता में यही बात दूसरी तरह से व्यंजित की जा सकती थी, पर कविता व्यक्तित्व को विखंडित करके ही बात को उपस्थित कर सकती है जबकि निबंध व्यक्तित्व को साथ लिए चलता है – पर खंडित रूप में नहीं, छँटे हुए – तराशे हुए रूप में। व्यक्ति का विलय नहीं होता न उसके वैयक्तिक अनुभव का महत्व कहीं कम होता है, उसके परिवेश के शब्द, कथानक, स्मृतियाँ, गूँजें और अनुगूँजे निरंतर आत्मीय संबंध की स्थापना में सहायक होती है।

ललित निबंधकारों के त्रिविर हजारीप्रदास द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुवेरनाथ राय व्यक्तित्व को साथ लिए चलते हैं और हाथ अलग करके भी। उनके लिए व्यक्तित्व वैयक्तिक स्तर पर संबंध स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। व्यक्तित्व के साथ यह संलग्नता कि वह माध्यम है, साधना से आती है। इसलिए हिंदी की लोकप्रिय विधा होने के बावजूद हिंदी में ललित निबंधकार थोड़े हैं और जो हैं उनकी भी ललित निबंध मुख्य विधा नहीं है।

निबंध को ‘गप्प’ कहने वाले हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध न केवल मुद्रा लालित्य में बेजोड़ है, बल्कि उनके वैचारिक धरातल तक पहुँच पाना साधारण प्रतिभा के लिए संभव नहीं है। इसी प्रकार मांतैन, चार्ल्स लैंब और गुलेरी जी का भरपूर स्वाद लेने के लिए यह जरूरी है कि पाठक विद्या-संस्कारी हो। कुट्टीचातन – अज्ञेय के निबंधों का व्यंग्य और लालित्य बहुश्रुत और अधीन व्यक्ति के लिए आस्वाद्य है। विद्यानिवास मिश्र में माटी-महिमा का जैसा उच्छल उल्लास और गतिमान वैदुष्य का जैसा सहज लालित्य दिखाई देता है वह भारतीय भाषा-परिदृश्य में विरल है। रमेशचंद्र शाह के निबंधों की रम्य मुद्रा आज भी प्रसन्न है, जो प्रमाण है इस विधायक स्थिति का, कि व्यक्तित्व की खोज की प्रवृत्ति और आत्मज्ञान की उन्मुक्त चेतना क्षीण नहीं हुई है। श्रीराम परिहार भय के बीच भरोसा तो दिलाते ही हैं, उनके निबंध बौराये बाग की तरह लालित्य-सौभाग्य से संपन्न हैं।

नामवर जी ने द्विवेदी जी के दूसरे प्रिय शब्द (पहला है ‘गप्प’) ‘छंद’ की चर्चा की है। इसका प्रयोग द्विवेदी जी विशिष्ट अर्थ में करते हैं। देवदारु का पेड़ उन्हें मूर्तिमान छंद मालूम होता है। ‘उसकी झबरीली टहनियाँ कटीले पत्तों के ऐसे लहरदार छंदों का वितान ताननी हैं कि छाया चेरी-सा अनुगमन करती है।’ फिर, ‘पेड़ क्या है, किसी सुलझे हुए कवि के चित्त का मूर्तिमान छंद है – धरती के आकर्षण को अभिभूत करके लहरतार वितान की श्रृंखला को सावधानी से सँभालता हुआ, विपुल व्योम की ओर एकाग्रीभूत मनोहर छंद। उनकी दृष्टि में यह अर्थातीत छंद है और इसीलिए अर्थातीत आंनद भी महादेव के तांडव के तुल्य।

उनके प्राणवेगी गद्य का एक उदाहरण पुनः ‘देवदारु’ से – ‘मगर कुछ लोग ऐसे होते हैं कि उन्हें सबै धान बाइस पसेरी दिखते हैं। वे लोग सबको एक-जैसा ही देखते हैं। उनके लिए वह खूँसट वह पाधा, वह सम, वह सनकी, वह झिंझोटा, वह झबरैला, वह चपरपेंगा, वह गदरौना, वह खितखिटा, वह झक्षी, वह झुमरैला, वह घोकरा, वह नटखटा, वह चुनमुन, वह बाँकुरा, वह चौरंगी सब समान है।’ देशज और तद्भव विशेषणों की यह सूची लहालोट करने वाली है। छंद द्विवेदी जी की मज्जा में हैं। ‘गप्प’ और छंदमयता के कारण द्विवेदी जी के निबंधों से एक अनुगूँज आती है जो बहुत देर तक भीतर गूँजती रहती है। पता नहीं चलता कि ये विचार की तरंगें हैं या प्रकाश की लहरें। इसीलिए इनकी लयकारी और लहरदारी इतनी मोहक है।

विद्यानिवास मिश्र में ‘संद्यःसीरोत्कर्षण सुरभि’ (ताजा जुते खेत की गंध) आती है। सर्जनात्मक गद्य से मंडित उनके निबंधों में उनका अनुभव-संसार इतना विस्तृत और बहुरंगी है कि आश्चर्य होता है अपने निबंधों के बारे में उनकी कुछ विशिष्ट मान्यताएँ हैं। उनका कहना है कि एक व्यक्तिव्यंजक निबंध व्यक्ति का व्यंजक नहीं है, व्यक्ति के माध्यम से व्यंजित है। जो कुछ अनुभव के दायरे में आता है – ऐंद्रिय या अतींद्रिय – किसी भी अनुभव के, उसे निबंधकार लोगों तक पहुँचा पाने वाली भाषा की कड़ाही में झोंक देता है। जो पककर निकलता है वह व्यक्तिव्यंजक निबंध है अराजक मुद्रा में मुखर होकर भी निबंध में रचना का बुनियादी अनुशासन होता है। व्यक्तिव्यंजक निबंध केवल सतह पर तर्कहीन होता है, अन्यथा उसमें सतह पर तर्क होता है, उसमें सतह पर तर्क का उपहास होता है, कुतर्क का उपयोग होता है, उसमें अनर्गल तर्क दिए जाते हैं। पर यह सब इसलिए कि पाठक महसूस करने लगे कि इस तर्क से भिन्न संगीत की तलाश करनी चाहिए। एक उदाहरण है अज्ञेय का निबंध ‘मार्गदर्शन’। आदमी रास्ता पूछता है लेकिन कोई सही रास्ता नहीं बताता जो बताता भी है वह उस ओर इशारा करता है जिस ओर नहीं जाना है। मार्गदर्शन के आलावा सारी चीजें हैं। मार्ग का अदर्शन ही सब-कुछ हो जाता है। मार्गदर्शन प्रश्नचिह्न बन कर रह जाता है। पाठक को अपने आप एक अन्विति दिखती है कि इस सारी उलझन और परेशानी में एक ही प्रतीयमान है कि मार्ग का दिखना कठिन है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी और विद्यानिवास मिश्र इसकी बुनावट का एक महत्वपूर्ण बिंदु शब्द-चयन को मानते हैं। इस प्रक्रिया में वे शब्दों से खेलते हैं और एक-एक शब्द की अर्थक्रीड़ा में दूर तक रस लेते हैं। आम्र और कुटज, अशोक और देवरारु में इतिहास की परतों को खोलने में द्विवेदी जी ऐसा रस लेते हैं कि पाठक लहालोट हो जाता है। विद्यानिवास जी पर्वो और उत्सवों पर लिखते हुए उनकी गाँठें खोलते हैं। दोनों की प्राण-नाड़ी गाँव ने रची है। जन्म-गाँव और पड़ोसी गाँव के चेहरे-चरित्र, साँवली मिट्टी की शोभा-सुरभि, जातीय तीज-त्यौहार के उल्लास की उद्दाम लहरों का आस्वाद और अपनी धरती के जुझारू पौरुष तथा संघर्षप्रियता का विरल तेज उनके मन में हमेशा बसा रहता है। गाँव की संवेदना उनकी संवेदना है, जो मूल्यों और समष्टि से संसिक्त होती है।

कुबेरनाथ राय के निबंधों को तमस के घटाटोप में संवेदना की रोशनी रचती है। आज गाँव-शहर-मनुष्य ने अपना मूल धरातल छोड़ दिया है। इसलिए तमस अपने डरावने रूप में खेत-खलिहान, आँगन-बगीचे, और राह-बाट में हर क्षण चीत्कार करता रहता है। कूट मुहावरों की व्यंजना पकड़ में नहीं आती और जब खुलती है तो डर लगता है। अपनी मिट्टी ही पराई लगने लगती है। यह परायापन उदास करता है इसलिए ललित निबंधों में एक स्थायी उदासी का भाव छाया रहता है।

ललित और व्यक्तिव्यंजक निबंधों के सभी प्रमुख निबंधकार पूर्वांचल के भोजपुरी क्षेत्र से आते हैं। द्विवेदी जी, विद्यानिवास मिश्र, शिवप्रसाद सिंह, कृष्णबिहारी मिश्र सब इसी क्षेत्र के हैं। कुबेरनाथ राय की भी यही धरती है। इन सभी ने अपने अध्ययन के साथ संस्कृत से गहरा संबंध जोड़ा था तो दूसरी ओर अपनी आंचलिक बोली के माध्यम से आंचलिक जीवन के साथ अटूट संबंध जोड़े रखा। इसीलिए उनकी निबंध-भाषा में एक ओर संस्कृत थी तो दूसरी ओर बोली की छटा जगमगाती रही। इनके पहले के जो निबंधकार थे, जैसे गुलेरी जी और बाबू गुलाब राय, आरंभ से ही खड़ी बोली में पले थे, उनकी भाषा में जिस बोली की सहजता लक्षित होती वह बोली भी वही थी, जो वह लिख रहे थे। इसलिए उनकी भाषा में किसी विशेष रंगत की खुशबू नहीं मिलती। रमेशचंद्र शाह के पास भी एक भाषा है जो खेलती नहीं, कहती है क्योंकि उसके पास कहने को बहुत कुछ है – ऐसा बहुत कुछ, जो स्वयं राग रंजित है इसलिए रंजित भाषा की अपेक्षा नहीं रखता।

चूँकि यह एक सर्जनात्मक विद्या है इसलिए वह निर्बंध चिंतन को ही नहीं, निर्बंध कल्पना को खुली छूट देता है। वह कल्पना ही तो है जो चिंतन को निर्बंध करती है और इसीलिए चिंतन की निर्बंधता व्यक्तिव्यंजक हो जाती है। कल्पना अगर मुक्त है तो उसे किसी क्षेत्र-विशेष के साथ जोड़ना कोई विशेष अर्थ नहीं रखता, लेकिन कल्पना जो बिंब उभारती है उसका स्रोत भले ही कहीं झाँकते हों स्वस्थ मानसिकता वाले चरित्रों के माध्यम से वे पूरे समाज को बदलने-सुधारने का संकल्प लिए हुए है। शाह के निबंधों में रूढ़ियों के सम्मोहन के प्रति प्रेम नहीं एक वितृष्णा का भाव है जो उन्हे निरंतर मानव की विकास यात्रा के अग्रिम चरणों से जोड़ता है। वे कहीं रूमानियत के शिकार नहीं हुए हैं इसीलिए वे कुबेरनाथ राय की तरह सम्मोहनों से अपने को तोड़ पाने में असमर्थ नहीं हैं।

साहित्य भी विधा के रूप में हिंदी ललित निबंध संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश की कथा – विशेष रूप से ‘आख्यायिका’ का उत्तराधिकारी है और वह इसलिए कि प्रकृति एवम मानव-जीवन में एक विंबानुविंव-भाव देखने का अभ्यासी है। पश्चिम में प्रकृतिपरक निबंधों में यह बात नहीं मिलती। प्रकृति का सूक्ष्म निरीक्षण उसमें जरूर मिलता है और उसमें रमने की उत्कंठा भी मिलती है लेकिन उसके साथ गहरा तादात्म्य नहीं मिलता। हिंदी में प्रकृति में घटित होने वाले परिवर्तनों में मानव-जीवन-संवत्सर का जैसा आवर्तन देखने का भाव है वह भी वहाँ नहीं मिलता हिंदी ललित निबंध की वैचारिक पृष्ठभूमि की तीन विशेषताएँ हैं – अखंड विश्व-दृष्टि, मुक्त फक्कड़ भाव, सामान्य में निगूढ़तम वैशिष्ट्‍य की तलाश। इस वैचारिक पीठिका को भूल कर लोग शैली को ही निबंध मान लेते हैं और विचार को निबंध के लिए गौण। लेकिन वे भूल जाते हैं कि सर्जन के क्षण में विचार या भाव में विश्लेष या विलगाव असंभव है। सर्जनात्मक साहित्य भाव और विचार का ऐक्य मात्र है। विचार प्रधान निबंध भी सर्जनात्मक हो सकते हैं जैसे आ. रामचंद्र शुक्ल के निबंध। विचार प्रधान निबंध में भी भावना तिरोहित नहीं होती, उसका एक भिन्न प्रकार का बौद्धिक संस्कार होता है। वहाँ समस्त रागात्मकता बुद्धि-रूप में परिणत हो जाती है। इस प्रकार दोनों में भाव भी हैं, विचार भी हैं। दूसरा अंतर यह है कि ललित निबंध तर्क से मनवाने की कोशिश नहीं करता, विचारप्रधान के लिए तर्क एक प्रधान साधन है। चाहे वह तर्क से यही सिद्ध करे कि बहुत कुछ शेष रह जाता है, जो तर्क से परे है।

हिंदी के महत्वपूर्ण ललित निबंधकारों में गाँव की मिट्टी का महत्व ज्यादा है। जैसे कुम्हार मिट्टी के बर्तन या खिलौने बना कर, पकने से पहले उन्हें चिकनी मिट्टी का ओप देता है, उसी तरह द्विवेदी जी, विद्यानिवास जी, कुबेरनाथ राय, कृष्णबिहारी मिश्र, शिवप्रसाद सिंह आदि अपने ललित निबंधों को गाँव के सीधे मुहावरे का ओप देते हैं जिससे पकने पर उनमें एक विशिष्ट चमक आ जाती है। इनमें प्रथम तीन देहाती मिट्टी के ओप के बाद फिर संस्कृत के खनिजों से भी उसे अलंकृत करते हैं। बावजूद इसके, एक अनलंकृत भोलापन भी उनमें मिलता है।

रमेशचंद्र शाह जड़ों की तलाश करते हैं तो जड़ खोदकर नहीं, अपनी प्राणनाड़ी का संधान करते हुए करते हैं। वे समस्त जातीय चेतना के रसग्राही स्रोत में धँसी हुई जड़ की खोज करते हैं और अधूरेपन से उद्विग्न होकर समग्र का चित्र अंकित करने के लिए स्वप्नाविष्ट होते हैं। उनमें विभाजन नहीं है, संशय नहीं है, चित्त के दो पाटों के बीच जीने का, ‘दारुण दुसःह दुख’ को न्यौत कर समग्र होने के लिए विभक्त होने का संकल्प है। यह संवेदनशील जागरूक लेखक की नियति है। ऐसे लेखक को लीक की नहीं, परंपरा की चिंता होती है, क्योंकि परंपरा और आगे जाने की राह है। वह श्रेष्ठतर की, परत्तर की तलाश है, वह पराये से भी पराये को आत्मीय बनाने की चुनौती है। वह आत्म के जरिए अध्यात्म तक पहुँचते हैं।

ललित निबंध के त्रिविर और अन्य निबंधकारों ने हिंदी गद्य की सत्ता को एक नई ऊँचाई, एक नया रूप दिया है। अवसाद और भय के बीच भरोसा लिए इन निबंधकारों ने अपने सर्जनशील स्पर्श से उस बुझती हुई आग को फिर-से चेताया है जो धुँधुँआती है तो धुँआ उठता है और जब जलती है तो वह सब प्रकाशित हो जाता है जो धुंध, धूल और धुएँ में खोया हुआ है। आश्वस्ति की संभावनापूर्ण आवाज को उठाने में गद्य बहुत आगे रहा है, ललित निबंध उससे भी आगे है।

अभिव्यक्ति और मध्यम

प्रस्तुति-गुलाब चंद जैसल
कुछ विशेष ध्यान देने योग्य बातें :
  • एक-एक अंक के पांच प्रश्न बोर्ड परीक्षा में आते हैं जिनका संक्षेप में सारगर्भित उत्तर देना चाहिए।
  • पांच में से पांच अंक प्राप्त करने के लिए कुछ बातों का यदि हम ध्यान रखें तो यह बहुत आसान है।
  • प्रश्न विशेष रूप से तथ्यपरक होते हैं, अत: उत्तर लिखते समय सही तथ्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। तथ्यों तथा विचारों की पुनरावृत्ति नहीं करनी चाहिए।
  • उत्तर बिंदुवार लिखेंमुख्य बिंदु को सबसे पहले लिखें।
  • शुद्ध वर्तनी का ध्यान रखें।
  • उत्तर साफ-सुथरा बिना काट-छांट के पठनीय होना चाहिए।
  • उत्तर में अनावश्यक बातें नहीं लिखनी चाहिए।
  • सी.बी.एस.ई. परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न-पत्र के तीन सेट होते हैं, जिनमें प्रायः सभी प्रश्न-पत्रों में जनसंचार माध्यम के पांच प्रश्न अलग-अलग होते हैं। कभी तीनों सेट में सभी प्रश्न एक जैसे हो सकते हैं, अथवा उनमें आंशिक समानता/ भिन्नता भी हो सकती है।
  • बहुत बार देखा गया है कि गत वर्षों के प्रश्न-पत्रों से कुछ प्रश्न अगले वर्षों के प्रश्न-पत्रों में दे दिए जाते हैं। अतः यहां कुछ स्थानों पर प्रश्नोत्तर की पुरनावृति देखी जा सकती है।
  • साफ-सफाई के कोई अतिरिक्त अंक नहीं है, फिर भी इसका प्रभाव अंकों पर अवश्य पड़ता है। अतः पांचों प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखेंगे तथा प्रत्येक उत्तर के बाद एक अथवा दो पंक्तियां छोड़कर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखेंगे।

 जनसंचार माध्यम और लेखन     

जनसंचार माध्यम

  1. संचार : ‘संचार’ शब्द चर् धातु के साथ सम् उपसर्ग जोड़ने से बना है- इसका अर्थ है चलना या एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना। संचार संदेशों का आदान-प्रदान है। सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का लिखित, मौखिक या दृश्य-श्रव्य माध्यमों के जरिये सफलता पूर्वक आदान-प्रदान करना या एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना संचार है।

इस प्रक्रिया को संपन्न करने में सहयोगी तरीके तथा उपकरण संचार के माध्यम कहलाते हैं।

संचार के मूल तत्त्व : संचारक या स्रोत,  एन्कोडिंग (कूटीकरण), संदेश (जिसे संचारक प्राप्तकर्ता तक पहुँचाना चाहता है), माध्यम (संदेश को प्राप्तकर्ता तक पहुँचाने वाला माध्यम होता है जैसे- ध्वनि-तरंगें, वायु-तरंगें, टेलीफोन, समाचारपत्र, रेडियो, टी वी आदि), प्राप्तकर्त्ता (डीकोडिंग कर संदेश को प्राप्त करने वाला), फीडबैक (संचार प्रक्रिया में प्राप्तकर्त्ता की प्रतिक्रिया), शोर (संचार प्रक्रिया में आने वाली बाधा)

संचार के प्रमुख प्रकार : सांकेतिक संचार, मौखिक संचार, अमौखिक संचार, अंत:वैयक्तिक संचार, अंतरवैयक्तिक संचार, समूह संचार, जन संचार।

  1. जनसंचार : प्रत्यक्ष संवाद के बजाय किसी तकनीकी या यान्त्रिक माध्यम के द्वारा समाज के एक विशाल वर्ग से संवाद कायम करना जनसंचार कहलाता है।
  2. जनसंचार के माध्यम : अखबार, रेडियो, टीवी, इंटरनेट, सिनेमा आदि.
  3. जनसंचार की विशेषताएँ :
  • इसमें फीडबैक तुरंत प्राप्त नहीं होता।
  • इसके संदेशों की प्रकृति सार्वजनिक होती है।
  • संचारक और प्राप्तकर्त्ता के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता।
  • जनसंचार के लिये एक औपचारिक संगठन की आवश्यकता होती है।
  • इसमें ढेर सारे द्वारपाल काम करते हैं।
  1. जनसंचार के प्रमुख कार्य:
  • सूचना देना
  • शिक्षित करना
  • मनोरंजन करना
  • निगरानी करना
  • एजेंडा तय करना
  • विचार-विमर्श के लिए मंच उपलब्ध कराना आदि।

 पत्रकारिता के विविध आयाम

  1. पत्रकारिता ऐसी सूचनाओं का संकलन एवं संपादन कर आम पाठकों तक पहुँचाना, जिनमें अधिक से अधिक लोगों की रुचि हो तथा जो अधिक से अधिक लोगों को प्रभावित करती हों,  पत्रकारिता कहलाता है। देश-विदेश में घटने वाली घटनाओं की सूचनाओं को संकलित एवं संपादित कर समाचार के रूप में पाठकों तक पहुँचाने की क्रिया/ विधा को पत्रकारिता कहते हैं।
  2. समाचार : समाचार किसी भी ऐसी ताजा घटना, विचार या समस्या की रिपोर्ट है,जिसमें अधिक से अधिक लोगों की रुचि हो और जिसका अधिक से अधिक लोगों पर प्रभाव पड़ता हो ।
  3. समाचार के तत्त्व : पत्रकारिता की दृष्टि से किसी भी घटना, समस्या व विचार को समाचार का रूप धारण करने के लिए उसमें निम्न तत्त्वों में से अधिकांश या सभी का होना आवश्यक होता है:   नवीनता, निकटता, प्रभाव, जनरुचि, संघर्ष, महत्त्वपूर्ण लोग, उपयोगी जानकारियाँ, अनोखापन आदि ।
  • डेडलाइन- समाचार माध्यमों के लिए समाचारों को कवर करने के लिये निर्धारित समय-सीमा को डेडलाइन कहते हैं।
  • डेटलाइन- समाचार पत्र की दिनांक को डेटलाइन कहते हैं।
  1. संपादन प्रकाशन के लिए प्राप्त समाचार सामग्री से उसकी अशुद्धियों को दूर करके पठनीय तथा प्रकाशन योग्य बनाना संपादन कहलाता  है।
  2. संपादकीयसंपादक द्वारा किसी प्रमुख घटना या समस्या पर लिखे गए विचारात्मक लेख को, जिसे संबंधित समाचारपत्र की राय भी कहा जाता है, संपादकीय कहते हैं।संपादकीय किसी एक व्यक्ति का विचार या राय न होकर समग्र पत्र-समूह की राय होता है, इसलिए संपादकीय में संपादक अथवा लेखक का नाम नहीं लिखा जाता ।
  3. पत्रकारिता के प्रमुख प्रकार:
  4. खोजी पत्रकारिता– जिसमें आम तौर पर सार्वजनिक महत्त्व के मामलों जैसे, भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गड़बड़ियों की गहराई से छानबीन कर सामने लाने की कोशिश की जाती है। स्टिंग ऑपरेशन खोजी पत्रकारिता का ही एक नया रूप है।
  5. वॉचडॉग पत्रकारिता– लोकतंत्र में पत्रकारिता और समाचार मीडिया का मुख्य उत्तरदायित्व सरकार के कामकाज पर निगाह रखना है और कोई गड़बड़ी होने पर उसका पर्दाफाश करना होता है, परंपरागत रूप से इसे वॉचडॉग पत्रकारिता कहते हैं। इसे खोजी पत्रकारिता भी कहते हैं।
  6. एडवोकेसी पत्रकारिता– इसे पक्षधर पत्रकारिता भी कहते हैं। किसी खास मुद्दे या विचारधारा के पक्ष में जनमत बनाने के लिए लगातार अभियान चलाने वाली पत्रकारिता को एडवोकेसी पत्रकारिता कहते हैं।
  7. पीत पत्रकारिता पाठकों को लुभाने के लिये झूठी अफवाहों, आरोपों-प्रत्यारोपों, प्रेम संबंधों आदि से संबंधित सनसनी खेज समाचारों से संबंधित पत्रकारिता को पीत पत्रकारिता कहते हैं।
  8. पेज थ्री पत्रकारिता– ऐसी पत्रकारिता जिसमें फैशन, अमीरों की पार्टियों , महफ़िलों और जानेमाने लोगों के निजी जीवन के बारे में बताया जाता है।
  9. वैकल्पिक पत्रकारिता- मुख्य धारा के मीडिया के विपरीत जो मीडिया स्थापित व्यवस्था के विकल्प को सामने लाकर उसके अनुकूल सोच को अभिव्यक्त करता है उसे वैकल्पिक पत्रकारिता कहा जाता है ।आम तौर पर इस तरह के मीडिया को सरकार और बड़ी पूँजी का समर्थन प्राप्त नहीं होता और न ही उसे बड़ी कंपनियों के विज्ञापन मिलते हैं।
  10. विशेषीकृत पत्रकारिता– किसी विशेष क्षेत्र की विशेष जानकारी देते हुए उसका विश्लेषण करना विशेषीकृत पत्रकारिता है।

विशेषीकृत पत्रकारिता के प्रमुख क्षेत्र संसदीय पत्रकारिता, न्यायालय पत्रकारिता, आर्थिक पत्रकारिता, खेल पत्रकारिता, विज्ञान और विकास पत्रकारिता, अपराध पत्रकारिता, फैशन और फिल्म पत्रकारिता।

विभिन्न माध्यमों के लिए लेखन

   प्रमुख जनसंचार माध्यम– प्रिंट, टी.वी., रेडियो और इंटरनेट

  1. प्रिंट माध्यम (मुद्रित माध्यम)-
  • जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है ।
  • आधुनिक छापाखाने का आविष्कार जर्मनी के गुटेनबर्ग ने किया।
  • भारत में पहला छापाखाना सन 1556 में गोवा में खुला, इसे ईसाई मिशनरियों ने धर्म-प्रचार की पुस्तकें छापने के लिए खोला था
  • मुद्रित माध्यमों के अन्तर्गत अखबार, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि आती हैं ।

मुद्रित माध्यम की विशेषताएँ :

  • छपे हुए शब्दों में स्थायित्व होता है, इन्हें सुविधा अनुसार किसी भी प्रकार से पढा़ जा सकता है।
  • यह माध्यम लिखित भाषा का विस्तार है।
  • यह चिंतन, विचार- विश्लेषण का माध्यम है।

        मुद्रित माध्यम की सीमाएँ/ दोष :

  • निरक्षरों के लिए मुद्रित माध्यम किसी काम के नहीं होते।
  • ये तुरंत घटी घटनाओं को संचालित नहीं कर सकते।
  • इसमें स्पेस तथा शब्द सीमा का ध्यान रखना पड़ता है।
  • इसमें एक बार समाचार छप जाने के बाद अशुद्धि-सुधार नहीं किया जा सकता।

मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए ध्यान रखने योग्य बातें :

  • भाषागत शुद्धता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • प्रचलित भाषा का प्रयोग किया जाए।
  • समय, शब्द व स्थान की सीमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • लेखन में तारतम्यता एवं सहज प्रवाह होना चाहिए।
  1. रेडियो (आकाशवाणी) :

रेडियो एक श्रव्य माध्यम है । इसमें शब्द एवं आवाज का महत्त्व होता है। रेडियो एक रेखीय माध्यम है। रेडियो समाचार की संरचना उल्टा पिरामिड शैली पर आधारित होती है। उल्टापिरामिड शैली में समाचर को तीन भागों में बाँटा जाता है- इंट्रो, बॉडी और समापन। इसमें तथ्यों को महत्त्व के  क्रम से  प्रस्तुत किया जाता है, सर्वप्रथम सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण तथ्य को तथा उसके उपरांत महत्त्व की दृष्टि से घटते  क्रम में तथ्यों  को रखा जाता   है।

रेडियो समाचार-लेखन के लिए बुनियादी बातें :

  • समाचार वाचन के लिए तैयार की गई कापी साफ-सुथरी और टाइप्ड कॉपी हो ।
  • कॉपी को ट्रिपल स्पेस में टाइप किया जाना चाहिए।
  • पर्याप्त हाशिया छोडा़ जाना चाहिए।
  • अंकों को लिखने में सावधानी रखनी चाहिए।
  • संक्षिप्ताक्षरों के प्रयोग से बचा जाना चाहिए।
  1. टेलीविजन (दूरदर्शन) : भारत में टेलीविजन का प्रारंभ 15 सितंबर 1959 को हुआ । यूनेस्को की एक शैक्षिक परियोजना के अन्तर्गत दिल्ली के आसपास के एक गाँव में दो टी.वी. सैट लगाए गए, जिन्हें 200 लोगों ने देखा । सन 1965 के बाद विधिवत्‌ टीवी सेवा आरंभ हुई । सन 1976 में दूरदर्शन  नामक निकाय की स्थापना हुई।जनसंचार का सबसे लोकप्रिय  व सशक्त माध्यम है। इसमें ध्वनियों के साथ-साथ दृश्यों का भी  समावेश होता है। इसके लिए  समाचार  लिखते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि शब्द व पर्दे पर दिखने वाले दृश्य में समानता हो।
  • लाइव : किसी घटना का घटना-स्थल से सीधा प्रसारण लाइव कहलाता है।

 टी.वी. खबरों के विभिन्न चरण :

दूरदर्शन मे कोई भी सूचना निम्न चरणों या सोपानों को पार कर दर्शकों तक पहुँचती है –

  1. फ़्लैश या ब्रेकिंग न्यूज (समाचार को कम-से-कम शब्दों में दर्शकों तक तत्काल पहुँचाना)
  2. ड्राई एंकर (एंकर द्वारा शब्दों में खबर के विषय में बताया जाता है)
  3. फोन इन (एंकर रिपोर्टर से फ़ोन पर बात कर दर्शकों तक सूचनाएँ पहुँचाता है )
  4. एंकर-विजुअल (समाचार के साथ-साथ संबंधित दृश्यों को दिखाया जाना)
  5. एंकर-बाइट (एंकर का प्रत्यक्षदर्शी या संबंधित व्यक्ति के कथन या बातचीत द्वारा प्रामाणिक खबर प्रस्तुत करना)
  6. लाइव (घटनास्थल से खबर का सीधा प्रसारण)
  7. एंकर-पैकेज (इसमें एंकर द्वारा प्रस्तुत सूचनाएँ; संबंधित घटना के दृश्य, बाइट,ग्राफ़िक्स आदि व्यवस्थित ढंग से दिखाई जाती हैं)
  8. इंटरनेट: इंटरनेट विश्वव्यापी अंतर्जाल है, संसार का सबसे नवीन व लोकप्रिय माध्यम है। इसमें जनसंचार के सभी माध्यमों के गुण समाहित हैं। यह जहाँ सूचना, मनोरंजन, ज्ञान और व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक संवादों के आदान-प्रदान के लिए श्रेष्ठ माध्यम है, वहीं अश्लीलता, दुष्प्रचार  व गंदगी फैलाने का भी जरिया है ।

इंटरनेट पत्रकारिता इंटरनेट पर समाचारों का प्रकाशन या आदान-प्रदान इंटरनेट पत्रकारिता कहलाता है। इंटरनेट पत्रकारिता दो रूपों में होती है। प्रथम- समाचार संप्रेषण के लिए नेट का प्रयोग करना । दूसरा- रिपोर्टर अपने समाचार को ई-मेल  द्वारा अन्यत्र भेजने  व  समाचार को संकलित करने  तथा  उसकी सत्यता, विश्वसनीयता सिद्ध करने के लिए करता है। रीडिफ डॉट कॉम, इंडियाइंफ़ोलाइन व सीफी भारत में सच्चे अर्थों में वेब पत्रकारिता करने वाली साइटे है। टाइम्स आफ इंडिया , हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रैस , हिंदू, ट्रिब्यून आदि समाचार-पत्र इंटरनेट  पर उपलब्ध हैं। प्रभा साक्षी नाम का अखबार  प्रिंट रूप में न होकर सिर्फ नेट पर उपलब्ध है । हिंदी वेब जगत में अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिंदी नेस्ट, सराय आदि साहित्यिक पत्रिकाएँ चल रही हैं।

इंटरनेट पत्रकारिता का इतिहास:

विश्व-स्तर पर इंटरनेट पत्रकारिता का विकास निम्नलिखित चरणों में हुआ-

(१) प्रथम चरण-1982 से 1992

(२) द्वितीय चरण-1993 से 2001

(३) तृतीय चरण- 2002 से अब तक

भारत में इंटरनेट पत्रकारिता

इसका पहला चरण 1983 से तथा दूसरा चरण  2003 से शुरू माना जाता है। भारत में सच्चे अर्थों में वेब पत्रकारिता करने वाली साइटें रीडिफ डॉट कॉम, इंडिया इफोलाइन व सीफी हैं । रीडिफ को भारत की पहली साइट कहा जाता है ।  वेब साइट पर विशुद्ध पत्रकारिता  शुरू करने का श्रेय  तहलका डॉट कॉम को जाता है।

हिंदी में नेट पत्रकारिता

’वेब दुनिया’के साथ शुरू हुई। यह हिन्दी का संपूर्ण पोर्टल है।  प्रभा साक्षी  नाम का अखबार  प्रिंट रूप में न होकर सिर्फ नेट पर ही उपलब्ध है। आज पत्रकारिता के लिहाज से हिन्दी की सर्व श्रेष्ठ साइट बीबीसी की है, जो इंटरनेट के मानदंडों के अनुसार चल रही है। हिन्दी वेब जगत में अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिन्दी नेस्ट, सराय आदि साहित्यिक पत्रिकाएँ भी अच्छा काम कर रही हैं। अभी हिन्दी वेब जगत की सबसे बड़ी समस्या मानक की बोर्ड तथा फोंट  की है। डायनमिक फोंट  के अभाव के कारण हिन्दी की ज्यादातर साइटें खुलती ही नहीं हैं ।

पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप और लेखन प्रक्रिया

पत्रकारीय लेखन

समाचार माध्यमों मे काम करने वाले  पत्रकार अपने पाठकों  तथा श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखन के  विभिन्न रूपों का इस्तेमाल करते हैं, इसे ही पत्रकारीय लेखन कहते हैं। पत्रकारिता या पत्रकारीय लेखन के अन्तर्गत  सम्पादकीय, समाचार , आलेख, रिपोर्ट, फीचर , स्तम्भ तथा कार्टून आदि आते हैं। पत्रकारीय लेखन का प्रमुख उद्देश्य है- सूचना देना, शिक्षित करना तथा मनोरंजन आदि करना। इसके कई प्रकार हैं यथा- खोज परक पत्रकारिता, वॉचडॉग पत्रकारिता और एड्वोकैसी पत्रकारिता आदि। पत्रकारीय लेखन का संबंध समसामयिक विषयों, विचारों व घटनाओं से है। पत्रकार को लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए वह सामान्य जनता के लिए लिख रहा है, इसलिए उसकी  भाषा सरल व रोचक होनी चाहिए। वाक्य छोटे व सहज हों। कठिन भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। भाषा को प्रभावी बनाने के लिए  अनावश्यक विशेषणों,जार्गन्स (अरचलित शब्दावली) और क्लीशे (पिष्टोक्ति, दोहराव) का प्रयोग नहीं होना चहिए।

पत्रकार के प्रकार- पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं ।

  • पूर्ण कालिक
  • अंशकालिक (स्ट्रिंगर)
  • फ्रीलांसर या स्वतंत्र पत्रकार

समाचार लेखन

समाचार उलटा पिरामिड शैली में लिखे जाते हैं, यह समाचार लेखन की सबसे उपयोगी और लोकप्रिय शैली है। इस शैली का विकास अमेरिका में गृह-यद्ध के दौरान हुआ। इसमें महत्त्वपूर्ण घटना  का वर्णन पहले प्रस्तुत किया जाता है, उसके बाद महत्त्व की दृष्टि से घटते क्रम में घटनाओं को प्रस्तुत कर समाचार का अंत होता है। समाचार में इंट्रो, बॉडी और समापन के क्रम में घटनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं ।

समाचार के छ: ककार

समाचार लिखते समय मुख्य रूप से छ: प्रश्नों- क्या, कौन, कहाँ, कब , क्यों और कैसे का उत्तर देने की कोशिश की जाती है। इन्हें समाचार के छ: ककार कहा जाता है। प्रथम चार प्रश्नों के उत्तर इंट्रो में तथा अन्य दो के उत्तर समापन से पूर्व बॉडी वाले भाग में दिए जाते हैं ।

फीचर: फीचर  एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है ।

फीचर लेखन का उद्देश्य: फीचर  का उद्देश्य मुख्य रूप से पाठकों को सूचना देना, शिक्षित करना तथा उनका मनोरंजन करना होता है।

फीचर और समचार में अंतर:  समाचार में रिपोर्टर को अपने विचरों को डालने की स्वतंत्रता नहीं होती, जबकि फीचर  में लेखक को अपनी राय , दृष्टिकोण और भावनाओं को जाहिर करने का अवसर होता  है । समाचार उल्टा पिरामिड शैली में लिखे जाते हैं, जबकि फीचर  लेखन की कोई सुनिश्चित शैली नहीं होती । फीचर  में समाचारों की तरह शब्दों की सीमा नहीं होती। आमतौर पर फीचर , समाचार रिपोर्ट से बडे़ होते हैं । पत्र-पत्रिकाओं में प्राय: 250 से 2000 शब्दों तक के फीचर  छपते हैं ।

विशेष रिपोर्ट :

सामान्य समाचारों से अलग वे विशेष समाचार जो गहरी छान-बीन, विश्लेषण और व्याख्या के आधार पर प्रकाशित किये जाते हैं, विशेष रिपोर्ट कहलाते हैं ।

विशेष रिपोर्ट के प्रकार:

  1. खोजी रिपोर्ट : इसमें अनुपल्ब्ध तथ्यों को गहरी छान-बीन कर सार्वजनिक किया जाता है।
  2. इन्डेप्थ रिपोर्ट: सार्वजनिक रूप से प्राप्त तथ्यों की गहरी छान-बीन कर उसके महत्त्वपूर्ण पक्षों को पाठकों के सामने लाया जाता है ।
  3. विश्लेषणात्मक रिपोर्ट : इसमें किसी घटना या समस्या का विवरण सूक्ष्मता के साथ विस्तार से दिया जाता है। रिपोर्ट अधिक विस्तृत होने पर कई दिनों तक किश्तों में प्रकाशित की जाती है।
  4. विवरणात्मक रिपोर्ट : इसमें किसी घटना या समस्या को विस्तार एवं बारीकी के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

विचारपरक लेखन :

समाचार-पत्रों में समाचार एवं फीचर  के अतिरिक्त संपादकीय, लेख, पत्र, टिप्पणी, वरिष्ठ पत्रकारों व विशेषज्ञों के स्तम्भ छपते हैं । ये सभी विचारपरक लेखन के अन्तर्गत आते हैं ।

संपादकीय :

संपादक द्वारा किसी प्रमुख घटना या समस्या पर लिखे गए विचारात्मक लेख को, जिसे संबंधित समाचारपत्र की राय भी कहा जाता है, संपादकीय कहते हैं ।  संपादकीय किसी एक व्यक्ति का विचार या राय न होकर समग्र पत्र-समूह की राय होता है, इसलिए संपादकीय में संपादक अथवा लेखक का नाम नहीं लिखा जाता ।

स्तम्भ  लेखन: 

एक प्रकार का विचारत्मक लेखन है। कुछ महत्त्वपूर्ण लेखक अपने खास वैचारिक रुझान एवं लेखन शैली   के लिए जाने जाते हैं। ऐसे लेखकों की लोकप्रियता को देखकर समाचरपत्र उन्हें अपने पत्र में नियमित स्तम्भ- लेखन की जिम्मेदारी प्रदान करते हैं। इस प्रकार किसी समाचार-पत्र  में किसी ऐसे लेखक द्वारा किया गया विशिष्ट व नियमित लेखन जो अपनी विशिष्ट शैली व वैचारिक रुझान के कारण समाज में ख्याति प्राप्त हो, स्तम्भ लेखन कहा जाता है ।

संपादक के नाम पत्र :

समाचार पत्रों में  संपादकीय पृष्ठ पर तथा पत्रिकाओं की शुरुआत में संपादक के नाम आए पत्र प्रकाशित किए जाते हैं । यह प्रत्येक समाचारपत्र का नियमित स्तम्भ होता है । इसके माध्यम से समाचार-पत्र अपने पाठकों को जनसमस्याओं तथा मुद्दों पर अपने विचार एवम  राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है ।

साक्षात्कार/इंटरव्यू:

किसी पत्रकार के द्वारा अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करने के लिए, किसी व्यक्ति विशेष से उसके विषय में अथवा किसी विषय या मुद्दे पर किया गया प्रश्नोत्तरात्मक संवाद साक्षात्कार कहलाता है ।

विशेष लेखन: स्वरूप और प्रकार

विशेष लेखन

किसी खास विषय पर  सामान्य लेखन से हट कर किया गया लेखन है । जिसमें  राजनीतिक, आर्थिक, अपराध, खेल, फिल्म,कृषि, कानून विज्ञान और अन्य किसी भी मत्त्वपूर्ण विषय से संबंधित विस्तृत सूचनाएँ प्रदान की जाती हैं।

डेस्क :

समाचारपत्र, पत्रिकाओं, टीवी और रेडियो चैनलों में अलग-अलग विषयों पर विशेष लेखन के लिए निर्धारित  स्थल को डेस्क कहते हैं। और उस विशेष डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों का भी अलग समूह होता है। यथा, व्यापार तथा  कारोबार के लिए अलग तथा खेल की  खबरों के लिए अलग डेस्क निर्धारित होता है।

बीट :

विभिन्न विषयों से जुडे़ समाचारों के लिए संवाददाताओं के बीच काम का विभाजन आम तौर पर उनकी दिलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रख कर किया जाता है। मीडिया की भाषा में इसे बीट कहते हैं।

बीट रिपोर्टिंग तथा विशेषीकृत रिपोर्टिंग में अन्तर:

बीट रिपोर्टिंग के लिए  संवाददाता में उस क्षेत्र के बारे में  जानकारी व दिलचस्पी का होना पर्याप्त है, साथ ही उसे  आम तौर पर अपनी बीट से जुडी़ सामान्य खबरें ही लिखनी होती हैं। किन्तु विशेषीकृत रिपोर्टिंग  में सामान्य समाचारों से आगे बढ़कर संबंधित विशेष क्षेत्र या विषय से जुडी़ घटनाओं, समस्याओं और मुद्दों  का बारीकी से विश्लेषण कर प्रस्तुतीकरण किया जाता है। बीट कवर करने वाले रिपोर्टर को संवाददाता तथा  विशेषीकृत रिपोर्टिंग करने वाले रिपोर्टर को विशेष संवाददाता कहा जाता है।

विशेष लेखन की भाषा-शैली:

विशेष लेखन की भाषा-शैली सामान्य लेखन से अलग होती है। इसमें संवाददाता को संबंधित विषय की तकनीकी शब्दावली का ज्ञान होना आवश्यक होता है, साथ ही यह भी आवश्यक होता है कि वह पाठकों को उस शब्दावली से परिचित कराए जिससे पाठक रिपोर्ट को समझ सकें। विशेष लेखन की कोई निश्चित शैली नहीं होती।

विशेष लेखन के क्षेत्र :

विशेष लेखन के अनेक क्षेत्र होते हैं, यथा- अर्थ-व्यापार, खेल, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, कृषि, विदेश, रक्षा, पर्यावरण शिक्षा, स्वास्थ्य, फ़िल्म-मनोरंजन, अपराध, कानून व सामाजिक मुद्दे आदि।

गत सी.बी.एस.ई. परीक्षा-2016 के तीनों सेट के प्रश्नों के उत्तर

सेट- ए

  1. डेड लाइन किसे कहते हैं?
  2. वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है?
  3. संपादक के कार्य लिखिए।
  4. पत्रकार किसे कहते हैं?
  5. ब्रेकिंग न्यूज किसे कहते हैं?

उत्तर :

  1. डेडलाइन किसी समाचार पत्र की वह समय सीमा है जब तक कि समाचारों को वह कवर कर सकता है। जैसे कोई प्रातः कालीन समाचार पत्र रात दस बजे तक समाचार कवर करता है।
  2. किसी के कामकाज पर निगाह रखते हुए किसी गड़बड़ी का पर्दाफाश करना वॉचडॉग पत्रकारिता कहलाती है।
  3. समाचार पत्र में प्रकाशित समाचारों की प्रामाणिकता, निष्पक्षता, संतुलन व महत्त्व के अनुसार समाचार पत्र में स्थान निर्धारण करना आदि कार्य संपादक के प्रमुख कार्य हैं।
  4. समाज की विभिन्न सूचनाओं, समाचारों को संकलित-संपादित कर समाचार के रूप में किसी समाचार पत्र के लिए तैयार करने वाले को पत्रकार कहते हैं।
  5. ऐसा समाचार जो दर्शकों तक कम से कम शब्दों में तत्काल पहुंचाया जाना जरूरी हो, उसे ब्रेकिंग न्यूज कहते हैं। इसमें केवल घटना की सूचना दी जाती है।

सेट- बी

  1. ‘बीट’ से क्या आशय है?
  2. भारत में पहला समाचार पत्र कब और कहां से प्रकाशित हुआ?
  3. प्रिंट मीडिया की दो विशेषताएं लिखिए।
  4. पीत पत्रकारिता से क्या आश्य है?
  5. ‘समाचार’ शब्द को परिभाषित कीजिए।

उत्तर :

  1. समाचार पत्र में समाचार कई तरह के होते हैं। जैसे- राजनीति, आर्थिक, अपराध, शिक्षा, फिल्म, कृषि, विज्ञान आदि। संवाददाताओं का कार्य विभाजन इन के लिए रुचि को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, मीडिया की भाषा में इसे ‘बीट’ कहते हैं।
  2. बंगाल गजट, जिसका प्रकाशन कलकत्ता (अब कोलकत्ता) से सन 1780 में हुआ। इस के संपादक जेम्स ऑगस्ट हिकी थे।
  3. चिंतन, विचार व विश्लेषण के आधार पर तैयार होते हैं। छपे हुए शब्दों का स्थायित्व होता है।
  4. सनसनीखेज समाचारों को मीडिया में जारी करने अथवा नहीं करने के बदले में जो धन का लेन-देन चलता है, उसे पीत पत्रकारिता कहते हैं।
  5. किसी भी ताजा घटना, विचार अथवा समस्या की रिपोर्टिंग जिसमें अधिक लोगों की रुचि और उपयोगिता जुड़ी हुई हो उस लेखन को समाचार कहते हैं।

सेट- सी

  1. जनसंचार के किन्हीं दो कार्यों पर प्रकाश डालिए?
  2. इंटरनेट तेजी से लोकप्रिय क्यों हो रहा है? दो कारण लिखिए।
  3. खोजी पत्रकारिता का क्या आशय है?
  4. संपादन के किन्हीं दो सिद्धांतों का उल्लेख कीजिए?
  5. फ्री-लांसर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर :

  1. जन संचार के दो प्रमुख कार्य हैं-

(1.) सामाजिक संपर्क स्थापित करना व

(2.) स्वयं को अभिव्यक्त करने की क्षमता का विकास।

  1. इंटरनेट की लोकप्रियता के दो कारण हैं-

(1.) किसी भी समय हम स्वयं को अपडेट कर सकते हैं व

(2.) बहुत कम समय में बहुत अधिक जानकारी का सुलभ होना ।

  1. किसी के कामकाज पर निगाह रखते हुए किसी गड़बड़ी का पर्दाफाश करना खोजी पत्रकारिता है। इसे वॉचडॉग पत्रकारिता भी कहते हैं।
  2. संपादन के दो सिद्धांत हैं- वस्तुपरकता एवं निष्पक्षता।
  3. भुगतान के आधार पर काम करने वाले पत्रकार को फ्री-लांसर कहते हैं।

सी.बी.एस.ई. द्वारा जारी आदर्श प्रश्न-पत्र में जनसंचार के प्रश्नोत्तर

  1. पत्रकारिता लेखन में सर्वाधिक महत्त्व किस बात का है?
  2. अखबारी भाषा में ‘बीट’ किसे कहते हैं?
  3. ब्रेकिंग न्यूज क्या है?
  4. समाचार लेखन कौन करते हैं?
  5. अखबार अन्य माध्यमों से अधिक लोकप्रिय क्यों है? एक मुख्य कारण लिखिए।

उत्तर :

  1. पत्रकारिता में सर्वाधिक महत्त्व समसामयिक घटनाओं का है।
  2. समाचार पत्र में समाचार कई तरह के होते हैं। जैसे- राजनीति, आर्थिक, अपराध, शिक्षा, फिल्म, कृषि, विज्ञान आदि। संवाददाताओं का कार्य विभाजन इन के लिए रुचि को ध्यान में रखते हुए किया जाता है, मीडिया की भाषा में इसे ‘बीट’ कहते हैं।
  3. ऐसा समाचार जो दर्शकों तक कम से कम शब्दों में तत्काल पहुंचाया जाना जरूरी हो, उसे ब्रेकिंग न्यूज कहते हैं। इसमें केवल घटना की सूचना दी जाती है।
  4. समाचार लेखन संवाददाता एवं रिपोर्टर करते हैं।
  5. अखबार में अन्य माध्यमों की तुलना में स्थायित्व अधिक है। इसे हम जब चाहें, जैसे चाहें और जहां चाहें सुविधानुसार देख-पढ़ सकते हैं।

परीक्षोपयोगी प्रमुख प्रश्नोत्तर

  1. जन संचार का सबसे पहला महत्त्वपूर्ण तथा सर्वाधिक विस्तृत माध्यम कौन सा था?

उत्तर : समाचार-पत्र और पत्रिका

  1. प्रिंट मीडिया के प्रमुख तीन पहलू कौन-कौन से  हैं?

उत्तर : समाचारों को संकलित-संपादित कर मुद्रण एवं प्रसारण।

  1. हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र किसे माना जाता है?

उत्तर : हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र ‘उदंत मार्तंड’ को माना जाता है, जो कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में निकला था।

  1. आजादी से पूर्व कौन-कौन प्रमुख पत्रकार हुए?

उत्तर : महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, मदन मोहन मालवीय, माखनलाल चतुर्वेदी, गणेश शंकर विद्यार्थी, महावीर प्रसाद द्विवेदी, प्रताप नारायण मिश्र, बालमुकुंद गुप्त आदि।

  1. आजादी से पूर्व के प्रमुख समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के नाम लिखिए।

उत्तर : केसरी, हिन्दुस्तान, सरस्वती, हंस, कर्मवीर, आज, प्रताप, प्रदीप, विशाल भारत आदि।

  1. आजादी के बाद की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं तथा पत्रकारों के नाम लिखए।

उत्तर : प्रमुख समाचारपत्र- नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, नई दुनिया, हिन्दुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण आदि।

प्रमुख पत्रिकाएं– धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, दिनमान, रविवार, इंडिया टुडे, आउट लुक आदि।

प्रमुख पत्रकार-  अज्ञेय, रघुवीर सहाय, धर्मवीर भारती, मनोहरश्याम जोशी, राजेन्द्र माथुर, प्रभाष जोशी आदि ।

  1. पत्रकारीय लेखन तथा साहित्यिक सृजनात्मक लेखन में क्या अंतर है?

उत्तर : पत्रकारीय  लेखन का प्रमुख उद्देश्य सूचना प्रदान करना होता है, इसमें तथ्यों की प्रधानता होती है, जबकि साहित्यिक सृजनात्मक लेखन भाव, कल्पना एवं सौंदर्य-प्रधान होता है।

  1. पत्रकारिता के प्रमुख आयाम कौन-कौन से हैं?

उत्तर : संपादकीय, फ़ोटो पत्रकारिता, कार्टून कोना , रेखांकन और कार्टोग्राफ।

  1. पत्रकारिता के विकास में कौन-सा मूल भाव सक्रिय रहता है?

उत्तर : जिज्ञासा का।

  1. प्रिंट मीडिया से क्या आशय है?

उत्तर : छपाई वाले संचार माध्यम को प्रिंट मीडिया कहते हैं।इसे मुद्रण-माध्यम भी कहा जाता है।समाचार-पत्र ,पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि इसके प्रमुख रूप हैं।

  1. इलैक्टॉनिक माध्यम से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : जिस जन संचार में इलैक्ट्रानिक उपकरणों का सहारा लिया जाता है, इसे इलैक्टॉनिक माध्यम  कहते हैं। रेडियो, दूरदर्शन , इंटरनेट  प्रमुख इलैक्ट्रानिक माध्यम हैं।

  1. ऑल इंडिया रेडियो की विधिवत स्थापना कब हुई?

उत्तर : सन 1936 में

  1. एफ.एम. रेडियो की शुरुआत कब से हुई?

उत्तर : एफ.एम. (फ्रिक्वेंसी माड्युलेशन) रेडियो की शुरूआत सन 1993 से हुई ।

  1. उल्टा पिरामिड शैली क्या है? यह कितने भागों में बँटी होती है?

उत्तर : जिसमें तथ्यों को महत्त्व के क्रम से  प्रस्तुत किया जाता है, सर्वप्रथम सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण तथ्य को तथा उसके उपरांत महत्त्व की दृष्टि से घटते  क्रम में तथ्यों  को रखा जाता है उसे उल्टा पिरामिड शैली कहते हैं ।  उल्टापिरामिड शैली में समाचार को तीन भागों में बाँटा जाता है-इंट्रो,प बॉडी और समापन।

  1. इंटरनेट पत्रकारिता को और किन-किन नामों से जाना जाता है?

उत्तर : ऑनलाइन पत्रकारिता, साइबरपत्रकारिता,वेब पत्रकारिता आदि नामों से ।

अभ्यास के लिए महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

  1. सम्पादकीय में सम्पादक का नाम क्यों नहीं लिखा जाता?
  2. पेड न्यूज से क्या अभिप्राय है?
  3. लीड किसे कहते हैं?
  4. भारत में पहला छापाखाना किस उद्देश्य से खोला गया?
  5. गुटेनबर्ग को किस क्षेत्र में योगदान के लिए याद किया जाता है?
  6. रेडियो समाचर किस शैली में लिखे जाते हैं?
  7. रेडियो तथा टेलीविजन माध्यमों में मुख्य अंतर क्या है?
  8. एंकर बाईट क्या है?
  9. समाचार को संकलित करने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है?
  10. नेट साउंड किसे कहते हैं?
  11. फ्लैश या ब्रेकिंग न्यूज से आप क्या समझते हैं?
  12. सामान्य लेखन तथा पत्रकारीय लेखन में क्या अंतर है?
  13. पत्रकारीय लेखन के उद्देश्य लिखिए।
  14. उल्टा पिरामिड शैली का विकास कब और क्यों हुआ?
  15. समाचार के ककारों के नाम लिखिए।
  16. बॉडी क्या है?
  17. फीचर किस शैली में लिखा जाता है?
  18. फीचर व समाचार में क्या अंतर है?
  19. विशेष रिपोर्ट से आप क्या समझते हैं?
  20. इन्डेप्थ रिपोर्ट किसे कहते हैं?
  21. स्वतंत्र पत्रकार किसे कहते है?
  22. पूर्णकालिक पत्रकार से क्या अभिप्राय है?
  23. अंशकालिक पत्रकार किसे कहते हैं?
  24. प्रिंट माध्यम किसे कहते हैं?
  25. जनसंचार के प्रचलित माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम क्या है?
  26. किन्हीं दो मुद्रित माध्यमों के नाम लिखिए।
  27. हिंदी का पहला समाचार-पत्र कब, कहाँ से किसके द्वारा प्रकाशित किया गया?
  28. हिंदी में प्रकाशित होने वाले दो दैनिक समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं के नाम लिखिए।
  29. रेडियो की अपेक्षा टी.वी. समाचारों की लोकप्रियता के दो कारण लिखिए।
  30. स्तंभ लेखन से क्या तात्पर्य है?
  31. पीत पत्रकारिता किसे कहते हैं?
  32. खोजी पत्रकारिता का आशय स्पष्ट कीजिए।
  33. उल्टा पिरामिड शैली क्या है?
  34. मुद्रित माध्यमों की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  35. डेड लाइन क्या है?
  36. रेडियो समाचार की भाषा की दो विशेषताएँ लिखिए।
  37. एंकर बाईट किसे कहते हैं?
  38. किन्हीं दो समाचार चैनलों के नाम लिखिए।
  39. इंटरनेट पत्रकारिता के लोकप्रिय होने के क्या कारण हैं?
  40. भारत के किन्हीं चार समाचार-पत्रों के नाम लिखिए जो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं?
  41. पत्रकारिता की भाषा में बीट किसे कहते हैं?
  42. बीट रिपोर्टर किसे कहते हैं?
  43. रिपोर्ट लेखन की भाषा की दो विशेषताएँ लिखिए।
  44. संपादक के दो प्रमुख उत्तरदायित्वों का उल्लेख कीजिए।
  45. आडिएंस से आप क्या समझते हैं?
  46. इलेक्ट्रोनिक मीडिया क्या है?
  47. भारत में नियमित अपडेट साइटों के नाम बताइए।
  48. कम्प्यूटर के लोकप्रिय होने का प्रमुख कारण बताइए।
  49. विज्ञापन किसे कहते हैं?
  50. कूटवाचन से आप क्या समझते हैं?
  51. कूटीकरण किसे कहते हैं?
  52. फीडबैक से आप क्या समझते हैं?
  53. सनसनीखेज समाचारों से सम्बंधित पत्रकारिता को क्या कहते हैं?
  54. मीडिया की भाषा में द्वारपाल किसे कहते हैं?
  55. संचार तथा जनसंचार में क्या अंतर है?
  56. जनसंचार के प्रमुख माध्यमों के नाम लिखिए ।
  57. जनसंचार के प्रमुख कार्यों को लिखिए ।
  58. संपादकीय पृष्ठ से आप क्या समझते हैं?
  59. वॉचडॉग पत्रकारिता क्या है?
  60. पेज-थ्री पत्रकारिता किसे कहते हैं?
  61. मुद्रण का प्रारंभ सबसे पहले किस देश में हुआ ?
  62. आधुनिक छापाखाने का आविष्कार कहाँ, कब और किसने किया?
  63. भारत मे पहला छापाखाना कब, कहाँ, किसने और किस उद्देश्य से खोला था?
  64. रेडियो किस प्रकार का माध्यम है?
  65. रेडियो के समाचार किस शैली में लिखे जाते हैं?
  66. समाचार-लेखन की सर्वाधिक लोकप्रिय शैली कौन-सी है?
  67. इंटरनेट प्रयोक्ताओं की लगातार वृद्धि के क्या कारण हैं?
  68. इंटरनेट पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं?
  69. भारत में इंटरनेट पत्रकारिता का प्रारंभ कब से माना जाता है।
  70. इंटरनेट पर पत्रकारिता करने वाली भारत की पहली साइट कौन-कौन सी है?
  71. भारत में वेबसाइट पर विशुद्ध पत्रकारिता करने का श्रेय किस साइट को जाता है?
  72. नेट पर हिन्दी की कौन-कौन सी साहित्यिक पत्रिकाएँ उपलब्ध हैं?
  73. उल्टा पिरामिड शैली का विकास कब और क्यों हुआ?
  74. डेस्क किसे कहते हैं?
  75. विशेष संवाददाता किसे कहते हैं?
  76. मुद्रित माध्यम की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
  77. समाचारपत्र में संपादक की भूमिका क्या होती है?
  78. फीचर किस शैली में लिखा जाता है?
  79. कार्टून कोना क्या है?
  80. स्टिंग ऑपरेशन क्या है?
  81. ड्राई एंकर से क्या अभिप्राय है?
  82. ऑप-एड पृष्ठ किसे कहते हैं
  83. एफ.एम. क्या है?
  84. अपडेटिंग से क्या अभिप्राय है?
  85. सीधा प्रसारण किसे कहते हैं?

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