रास्ते से जाते हुए पेड़ ने मुझसे कहा …

रास्ते से जाते हुए पेड़ ने मुझसे कहा …
सुनो |.
यूँ मुझे अनदेखा करके मत जाओ
क्या तुमने मुझे देखा नहीं ?
या मुझे भुला दिया ?
तभी तो मुझसे नजरें मिलने से हिचकते हो
क्योंकि —
तुमने मुझे पहले छांटा ,
फिर धीरे-धीरे काटा ,
उसके बाद प्रकृति के गाल पर मारा चांटा |
शायद तुम भूल गए
मैंने ही तुम्हे छाया दी, फल दिए, पत्ते ,टहनियां , डालियाँ —
और –इंधन दिया |
उसके बदले में तुमने मुझे क्या दिया ?
मेरा जड़ से समूल नास—
और प्रकृति का सत्यानास |
अरे तुम भूल गए तुम जितना हमें मिटाओगे —
दुष्परिनाम ही पाओगे —
आज नहीं तो कल पछताओगे |
जब इस पृथ्वी पर न होगी ऑक्सीजन ,
न पानी , न जीवन में रवानी |
सोचो तब क्या करोगे ?
अरे करोगे क्या बैठ के रोवोगे —-
अपने ही आंसुओं से —
अपने आप को धोवोगे |
एक समय ऐसा भी आएगा
जब तुम्हारी आँखों में आंसू भी नहीं होंगे —
तब तुम्हे मेरी याद आएगी |
लेकिन —
तब तक देर हो चुकी होगी |
तब यह मुहावरा सटीक लगेगा —-
अब पछताए होय क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत ——-

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